केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को कारण बताओ नोटिस भेजा है. नोटिस में पूछा गया है कि क्लब के खिलाफ परिसर खाली कराने की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए.
यह नोटिस केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस(L&DO) की ओर से 29 जून को जारी किया गया. नोटिस एस्टेट ऑफिसर बिपिन कुमार सिंह ने जारी किया है.
क्लब और इस मामले से जुड़े सभी पक्षों को 7 जुलाई तक अपना जवाब देने के लिए कहा गया है. साथ ही, उन्हें 7 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे व्यक्तिगत सुनवाई के लिए भी बुलाया गया है.
क्या है पूरा मामला
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने अदालत में कहा है कि दिल्ली जिमखाना क्लब की 27.3 एकड़ जमीन की जरूरत रक्षा से जुड़े काम, सार्वजनिक सुरक्षा और दूसरे जनहित के प्रोजेक्ट्स के लिए है.
सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और लोगों के हित को देखते हुए इस जमीन का इस्तेमाल जरूरी है. इसी वजह से इसे अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है.
मई में इस मामले पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई थी. दिल्ली जिमखाना क्लब ने केंद्र सरकार के जमीन अपने कब्जे में लेने के फैसले को अदालत में चुनौती दी है.
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना क्लब पर कब्जा नहीं करेगी. उन्होंने बताया कि अगर क्लब खुद परिसर खाली नहीं करता, तब भी बेदखली कानून के मुताबिक तय प्रक्रिया अपनाने के बाद ही की जाएगी.
तुषार मेहता ने यह भी कहा कि कानून के तहत मुआवजा देने का प्रावधान है. यह मुआवजा पैसे या फिर दूसरी जमीन के रूप में दिया जा सकता है.
वहीं, क्लब की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि दिल्ली जिमखाना क्लब एक गैर-लाभकारी संस्था है. उन्होंने कहा कि सरकार ने 5 जून तक क्लब खाली करने का आदेश ऐसे समय दिया, जब इस मामले की सुनवाई पहले से ही राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) में चल रही है.
बेदखली पर क्या बोला कोर्ट?
अदालत ने कहा कि अगर सरकार इस जमीन का अधिग्रहण करती है, तब भी दिल्ली जिमखाना क्लब के सदस्यों की सदस्यता अपने आप खत्म नहीं होगी. सरकार ने यह भी बताया कि जरूरत पड़ने पर क्लब को दूसरी जमीन देने का विकल्प भी मौजूद है.
हाई कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर आठ हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. अदालत ने यह भी याद दिलाया कि पहले भी लीज की शर्तों को लेकर क्लब और सरकार के बीच विवाद हुआ था, जिसे बाद में सुलझा लिया गया था.
इसके बाद क्लब के प्रबंधन को लेकर मामला NCLT तक पहुंचा, जहां से नई प्रबंधन समिति बनाने का रास्ता साफ हुआ.
दरअसल, केंद्र सरकार सफदरजंग रोड पर 27.3 एकड़ में फैले दिल्ली जिमखाना क्लब की जमीन अपने कब्जे में लेना चाहती है. सरकार का कहना है कि यह जमीन सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से जरूरी है, क्योंकि यह प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग के बेहद करीब है.
इसी L&DOने क्लब को खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की है.
1913 में स्थापित दिल्ली जिमखाना क्लब देश के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित क्लबों में से एक है. इसका मौजूदा भवन 1930 के दशक में वास्तुकार रॉबर्ट टी. रसेल ने डिजाइन किया था. लंबे समय से यह क्लब वरिष्ठ नौकरशाहों, सेना के अधिकारियों, राजनयिकों और कई प्रमुख लोगों का पसंदीदा केंद्र रहा है.
क्लब के करीब 5,600 स्थायी सदस्य हैं और इसकी सदस्यता पाने के लिए लोगों को कई साल इंतजार करना पड़ता है.
अब इस मामले में सबकी नजर 7 जुलाई की सुनवाई पर है, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया और क्लब के भविष्य को लेकर अहम फैसला हो सकता है.
" केंद्र सरकार ने दिल्ली जिमखाना क्लब को कारण बताओ नोटिस भेजा है. नोटिस में पूछा गया है कि क्लब के खिलाफ परिसर खाली कराने की कार्रवाई क्यों न…"
