दिल्ली की एक अदालत ने 5 अक्टूबर को मतदाता सूची के SIR में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ और उसे नुकसान पहुंचाने के आरोपी 17 प्रदर्शनकारियों को जमानत दे दी. अदालत ने कहा कि आरोपी युवा छात्र हैं और पहली नजर में आदतन अपराधी नहीं दिखते. पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनिमेष त्रिपाठी ने देर रात हुई सुनवाई में यह आदेश दिया.
दिल्ली पुलिस ने अदालत से आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने की मांग की थी. पुलिस का आरोप था कि आरोपी गैरकानूनी जमावड़े का हिस्सा थे और उन्होंने ऐसे सार्वजनिक स्थान पर बाधा डाली, जहां निषेधाज्ञा लागू थी. पुलिस ने दलील दी कि रिहा होने पर आरोपी दोबारा हिंसा में शामिल हो सकते हैं, इसलिए उन्हें हिरासत में रखना जरूरी है.
पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लेते समय प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों से धक्का-मुक्की की, जिसमें एक महिला पुलिसकर्मी घायल हो गईं. पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि जिस वाहन में प्रदर्शनकारियों को रखा गया था, उसकी खिड़की और पीछे के शीशे उन्होंने तोड़ दिए.
आरोपियों के वकील सैमन फारूकी ने रिमांड की मांग का विरोध किया. उन्होंने कहा कि लगाई गई सभी धाराओं में सात साल से कम की सजा का प्रावधान है, इसलिए आरोपियों की गिरफ्तारी ही नहीं होनी चाहिए थी. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि किसी आरोपी की अलग-अलग भूमिका तय नहीं की गई है और आरोपों की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज भी पेश नहीं किया गया.
अदालत ने माना कि आरोप गंभीर हैं. उसने कहा कि जांच अधिकारी की ओर से पेश मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी) के अनुसार एक पुलिसकर्मी को चोट आई है. अदालत ने टिप्पणी की कि हर व्यक्ति को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन की आड़ में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला करना गंभीर चिंता का विषय है और इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती.
इसके बाद अदालत ने कहा कि ज्यादातर अपराध जमानती हैं और उनमें अधिकतम दो साल की सजा हो सकती है. अदालत के अनुसार, आरोपी युवा हैं, आदतन अपराधी नहीं लगते और उनके सामने पूरा करियर पड़ा है. अदालत ने प्रत्येक आरोपी को 15,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर राहत दी.
सुनवाई के दौरान दो आरोपियों ने हिरासत में यातना देने का आरोप लगाया. अदालत ने पुलिस को इन आरोपों पर रिपोर्ट दाखिल करने और संसद मार्ग थाने के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया.
फारूकी ने बताया कि चार महिला प्रदर्शनकारियों को 5 अक्टूबर को ही निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया. बाकी आरोपियों को जमानत की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मंगलवार को रिहा किया जाएगा.
दिल्ली पुलिस ने सोमवार को चार मामले दर्ज कर 18 लोगों को गिरफ्तार किया था. यह कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एसआईआर प्रक्रिया को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों और भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) व भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के सदस्यों के बीच हुई झड़प के बाद की गई. आरोपियों पर मारपीट, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कर्मचारी को उसके कर्तव्य निभाने से रोकने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है.
-ममता सिंह
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