हरियाणा सरकार के पैसों का बड़े स्तर पर गबन होने का मामला सामने आया है. मामला का खुलासा बुधवार यानी 25 जून को हुआ. खुलासा होते ही चंडीगढ़ प्रशासन अलर्ट पर आ गया है. चीफ सेक्रेटरी एच राजेश प्रसाद ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वित्त सचिव दीप्रवा लाकड़ा को तुरंत जांच के आदेश दिए हैं.
मामला सामने आने के बाद वित्त विभाग ने आईडीएफसी बैंक के उच्च अधिकारियों के साथ अहम बैठक की और खातों से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड तलब किया. इस मामले में वित्त सचिव की ओर से सभी विभागों को बैंक संबंधित एडवाइजरी भी जारी कर दी गई है. साथ ही सभी विभागों से दो दिन के भीतर आईडीएफसी बैंक में खातों से जुड़ी पूरी जानकारी देने के सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं. पूरे मामले को लेकर हाईपावर कमेटी गठित करने की भी तैयारी है. जिसमें सभी विभागों के बैंक अकाउंट्स को लेकर ऑडिट कराया जा सकता है.
प्रशासन-बैंक की बैठक में क्या तय हुआ?
चंडीगढ़ प्रशासन ने मामले की जांच करते हुए सबसे पहले आईडीएफसी बैंक के अधिकारियों के साथ बैठक की है. पूरे मामले में बैंक अधिकारियों से वित्त सचिव और अन्य अधिकारियों ने विस्तार से जानकारी ली है.
बैंक अधिकारियों से भी खातों से संबंधित पूरा रिकॉर्ड देने के लिए कहा गया है. बैंक में प्रशासन के कई विभागों के खातों की उच्च अधिकारियों ने पुष्टि की है. उधर बैंक ने चंडीगढ़ प्रशासन को आश्वासन दिया है कि बैंक खातों में जमा पूरी पूंजी और ब्याज तुरंत प्रशासन को जारी कर दिया जाएगा. इस संबंध में चीफ सेक्रेटरी ने भी कहा कि बैंक ने पूरा पैसा सुरक्षित होने की बात कही है.
बार-बार क्यों बदले गए विभागों के बैंक खाते?
प्रशासन के कुछ बड़े विभागों ने पिछले कुछ समय में सरकारी खातों को एक बैंक से दूसरे बैंक में शिफ्ट किया गया है. अब इसकी जांच होगी कि आखिर कम समय में बैंक बदलने के पीछे क्या वजह थी और इसके लिए जिम्मेदार कौन है.
प्राइवेट बैंकों के चयन का क्या था मापदंड?
चंडीगढ़ प्रशासन के 45 से अधिक विभागों के खाते ज्यादातर नेशनल बैंकों में हैं. ऐसे में आईडीएफसी या एयू (AU) जैसे प्राइवेट/मल्टीनेशनल बैंकों को चुनने के लिए क्या नियम अपनाए गए, इसकी भी स्क्रूटनी की जाएगी. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि नियमों के तहत दो प्राइवेट बैंक पैनल में शामिल हो सकते हैं.
क्या चंडीगढ़ के विभागों में भी हुआ है गोलमाल?
चंडीगढ़ परिवहन विभाग (CTU) के खाते भी आईडीएफसी बैंक (सेक्टर-9 ब्रांच) में बताए जा रहे हैं. प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि हरियाणा की तरह चंडीगढ़ के किसी विभाग के फंड में हेराफेरी तो नहीं हुई है.
हरियाणा सरकार और CID साथ मिलकर करेंगे जांच
इस महाघोटाले की कमान अब सिर्फ एक एजेंसी के हाथ में नहीं है. चंडीगढ़ प्रशासन का सीआइडी (CID) तंत्र पूरी तरह सतर्क हो गया है. निष्पक्ष जांच के लिए चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारी हरियाणा पुलिस और वहां गठित हाई-पावर कमेटी के साथ मिलकर काम करेंगे, यह पूरा मामला पंजाब राजभवन और चंडीगढ़ के उपराज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की नजर में भी है, जिन्होंने निष्पक्ष जांच के सख्त निर्देश दिए हैं. पंजाब राजभवन से भी पूरे मामले में अपडेट मांगी गई है, साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए कहा गया है.
अधिकारियों का क्या है कहना
‘यूटी (चंडीगढ़) प्रशासन के कुछ विभागों के आईडीएफसी बैंक में खाते जरूर हैं, लेकिन शुरुआती जानकारी के मुताबिक सेक्टर-32 की विवादित शाखा में किसी का खाता नहीं है. सभी विभागों से दो दिन में रिपोर्ट मांगी गई है. अभी तक हरियाणा जैसी किसी वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं हुई है.’
-दीप्रवा लाकड़ा, वित्त सचिव, चंडीगढ़ प्रशासन
'यह मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है. वित्त सचिव को गहन जांच के आदेश दे दिए गए हैं. इस मामले में अगर कोई भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.'
-एच राजेश प्रसाद, चीफ सेक्रेटरी, चंडीगढ़ प्रशासन
"हरियाणा सरकार के पैसों का बड़े स्तर पर गबन होने का मामला सामने आया है. मामला का खुलासा बुधवार यानी 25 जून को हुआ. खुलासा होते ही चंडीगढ़ प्र…"
