देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है. सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के नतीजों और उसके बाद शुरू  हुए 'ऑन स्क्रीन' विवाद को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है.  छात्रों और विपक्ष के भारी विरोध के बीच, सरकार ने मंगलवार को सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है. 

उनके स्थान पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया चेयरमैन और हिमांशु भारद्वाज को नया सचिव नियुक्त किया गया है. 

क्या था पूरा 'ऑन स्क्रीन' विवाद?

इस पूरे विवाद की जड़ सीबीएसई द्वारा हाल ही में जारी किए गए 12वीं कक्षा के परिणाम हैं.  रिजल्ट घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने शिकायत की थी कि उनके अंक उनकी उम्मीदों से काफी कम आए हैं.  

अपनी शंकाओं को दूर करने और मूल्यांकन की पारदर्शिता जांचने के लिए जब विद्यार्थियों ने बोर्ड से अपनी जांची हुई कॉपियों की मांग की, तो उन्हें भारी तकनीकी और प्रशासनिक खामियों का सामना करना पड़ा. 

छात्रों का आरोप है कि कॉपी प्राप्त करने के लिए आवेदन करते समय उन्हें पोर्टल पर भुगतान संबंधी कई विफलताओं  का सामना करना पड़ा.  हद तो तब हो गई जब कई छात्रों से वेबसाइट पर कॉपी दिखाने के नाम पर बहुत अधिक पैसे की मांग की गई. 

इतना ही नहीं, भारी-भरकम भुगतान करने और तकनीकी समस्याओं से जूझने के बावजूद, कई विद्यार्थियों को उनकी असली उत्तर पुस्तिकाएं प्राप्त ही नहीं हुईं.  इस 'ऑन स्क्रीन' कॉपी वितरण प्रणाली की विफलता ने छात्रों और अभिभावकों के गुस्से को भड़का दिया. 

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की उठी मांग

छात्रों के भविष्य के साथ हो रही इस लापरवाही को लेकर देश भर में भारी आक्रोश फैल गया.  पीड़ित छात्रों ने सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक अपना विरोध दर्ज कराया.  वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया और सोशल मीडिया पर सरकार से सवाल किए.  

विपक्ष और छात्र संगठनों ने मिलकर इस भारी गड़बड़ी के लिए सीधे तौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जिम्मेदार ठहराया और उनके इस्तीफे की मांग की. 

केंद्र सरकार का एक्शन और नई नियुक्तियां

बढ़ते राजनीतिक दबाव और छात्रों के  विरोध को देखते हुए केंद्र सरकार ने डैमेज कंट्रोल करते हुए मंगलवार को यह बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया.  तत्कालीन चेयरमैन राहुल सिंह को सीबीएसई से हटाकर अब कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में एडिशनल सेक्रेटरी के पद पर भेज दिया गया है.  

वहीं सचिव हिमांशु गुप्ता की जगह हिमांशु भारद्वाज को बोर्ड की कमान सौंपी गई है. 

कौन हैं सीबीएसई के नए चेयरमैन लोखंडे प्रशांत सीताराम?

सीबीएसई की कमान अब लोखंडे प्रशांत सीताराम के हाथों में है. वह 2001 बैच के एजीएमयूटी AGMUT कैडेर,  जिसमें अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और अन्य केंद्र शासित प्रदेश आते है,  कैडर के एक बेहद अनुभवी आईएएस अधिकारी हैं.   प्रशासनिक सेवा में आने से पहले प्रशांत सीताराम ने पुणे यूनिवर्सिटी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. 

सीबीएसई चेयरमैन की कुर्सी संभालने से पहले वह केंद्रीय गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (एडिशनल सेक्रेटरी) के अहम पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे.  उन्हें एक तेज-तर्रार अधिकारी के रूप में जाना जाता है. उनके उत्कृष्ट कार्यों और बेहतर प्रशासनिक सेवाओं के लिए उन्हें अब तक दो बार सवर्ण  पदक'  से भी सम्मानित किया जा चुका है. 

सरकार को उम्मीद है कि लोखंडे प्रशांत सीताराम के नेतृत्व में सीबीएसई में चल रहे तकनीकी विवादों का जल्द निपटारा होगा और छात्रों का विश्वास फिर से बहाल किया जा सकेगा. 

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