28 मई को तमिल फ़िल्म ‘करप्पु’ पर बैन लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के दो जजों, जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन की बेंच ने फ़िल्म से जुड़े मामले पर सुनवाई करते हुए स्वीकार किया कि “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है.” साथ ही टिप्पणी की कि जज कोई पवित्र गाय नहीं हैं.
क्या है पूरा मामला
दरअसल तमिल फ़िल्म ‘करप्पु’ में दिखाए गए कुछ दृश्यों में न्यायपालिका और अदालती व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार को उजागर किया गया है. जिससे आहत होकर याचिकाकर्ता ने एक याचिका दायर की थी, जिसमें ‘न्यायालय अवमानना अधिनियम 1971’ के तहत फ़िल्म को बैन करते हुए कार्रवाई की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता का नाम आर.एस. वावेंदन है और वो चेन्नई के एक वकील हैं.
जिस पर सुनवाई करते हुए बेंच ने कहा कि “कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार है. पहले भी जज भ्रष्ट थे और आज भी हैं. हम जानते हैं और हमें न्यायिक भ्रष्टाचार के मामले देखने को मिले हैं. मद्रास हाई कोर्ट नियमित रूप से ऐसे भ्रष्ट तत्वों को बाहर का रास्ता दिखाता है.”
कौन हैं दोनों जज?
दोनों जजों में से पहले जज, जिनका नाम जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन है, वो तमिलनाडु के तिरुवरूर के रहने वाले हैं. इनकी पत्नी हाउसवाइफ हैं और विकलांग लोगों के लिए काम करती हैं. जस्टिस स्वामीनाथन अब तक 52094 फैसले सुना चुके हैं और देश के प्रतिष्ठित जजों में गिने जाते हैं.
इससे पहले वो मदुरै की थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर स्थित सुल्तान सिकंदर शाह की दरगाह और प्राचीन सुब्रमण्यम स्वामी (भगवान मुरुगन) मंदिर के बीच में स्थित एक खंभे पर हिंदुओं के कार्तिगई दीपम (दीपक) जलाने के मामले में सुनवाई करते हुए चर्चा में आए थे.
मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने अपने ऐतिहासिक फैसले में स्पष्ट किया था कि पत्थर का खंभा दरगाह के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और हिंदुओं को वहां 'कार्तिगई दीपम' (दीपस्तंभ) जलाने की अनुमति दी थी. इस बेंच में जस्टिस स्वामीनाथन भी थे. इसी फ़ैसले से नाराज होकर विपक्षी पार्टियों (DMK और कांग्रेस सहित) के 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर वाला नोटिस लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपा गया था, जिसमें उन पर महाभियोग चलाने की मांग की गई थी.
वहीं दूसरे जज जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन का जन्म 4 अक्टूबर 1970 को हुआ था. बेंगलुरू के नेशनल लॉ स्कूल से उन्होंने लॉ की डिग्री हासिल की है. 2010 से वे मद्रास लॉ जर्नल और मद्रास लॉ के एडिटर-इन-चीफ हैं. उन्हें 2018 और 2021 में राज्यपाल द्वारा सीनेट सदस्य के तौर पर नॉमिनेट किया गया था.
करप्पु फ़िल्म के बारे में
करप्पु एक तमिल एक्शन ड्रामा फ़िल्म है, जिसकी कहानी केरल से चेन्नई आए एक असहाय पिता और उनकी बेटी से शुरू होती है. फ़िल्म में बेटी बीमार रहती है जिसके लिवर ट्रांसप्लांट के लिए पैसों की जरूरत होती है. लेकिन देश के सिस्टम में बैठे भ्रष्ट लोगों और यहाँ तक कि भ्रष्ट वकीलों और जजों के कारण उन्हें दर-बदर भटकना पड़ता है, जिसमें खासतौर पर न्यायपालिका के भ्रष्टाचार का उल्लेख किया गया है.
इस फ़िल्म के निर्देशक और स्क्रीनप्ले राइटर दोनों आर.जे. बालाजी हैं, वहीं इस फ़िल्म में हीरो सूर्या और हीरोइन तृषा कृष्णन हैं. मद्रास हाई कोर्ट ने जजों के भ्रष्ट होने की बात को स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया, साथ ही इसे एक काल्पनिक कहानी और अभिव्यक्ति की आजादी करार दिया.
"28 मई को तमिल फ़िल्म ‘करप्पु’ पर बैन लगाने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के दो जजों, जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन और जस्टिस वी…"
