अर्जेंटीना और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के लिए पुलिस और सुरक्षाकर्मी पूरी तैयारी में जुटे हुए हैं. प्लेयर्स तो अपनी तैयारी कर ही रहे हैं पर पुलिस वाले भी अपनी व्यवस्था चाक चौबंद कर रहे हैं क्योंकि इन दोनों टीमों के बीच फीफा में जब भी भिड़ंत हुई है तो कुछ न कुछ लफड़ा जरूर हुआ है. कभी दर्शक प्लेयर्स के ऊपर बॉटल फेंकने लगते हैं तो सुरक्षाकर्मियों को बीच में आना पड़ता है तो कभी कोई प्लेयर फुटबॉल के इस गेम में हाथ से ही गोल कर देता है.
ये जो आप गेम में रेड कार्ड और येलो कार्ड देखते हैं इसका बीज इन्हीं दोनों टीमों के लफड़े ने ही बोया था . तो चलिए आपको बताते हैं FIFA में इन दोनों के बीच हुए मैचों की कुछ ऐसी ही दिलचस्प कहानियां.
लफड़ा नंबर 1
बात है 1966 के फीफा वर्ल्ड कप की. लन्दन के वेंबली मैदान में हुए इस मैच के 35वें मिनट में रेफरी रुडोल्फ क्रेटलिन ने अर्जेंटीना के कैप्टन एंटोनियो रेटिन को दुर्व्यवहार के कारण ग्राउंड से बाहर जाने को कहा. अब समस्या ये थी की रेफरी को स्पेनिश नहीं आती थी और रेटिन जर्मन समझ नहीं पाते थे. इस चक्कर में वो लगभग 8 मिनट तक ग्राउंड में ही रहे और और गुस्से में लाल हो चुके थे. उसके बाद उन्होंने मैदान छोड़ा और ग्राउंड के कोने में जो अंग्रेजों का फ्लैग लगा हुआ था उसको पूरे तबीयत से मसलने लगे. उसके बाद क्वीन एलिजाबेथ 2 के लिए जो रेड कार्पेट बिछाया गया था रेटिन उसपर जा कर बैठ गए . अब वहां पर स्टैंड में जो इंग्लैंड के फैंस थे उन्होंने रेटिन के ऊपर बॉटल्स और जो भी सामान उनके पास था उसको फेंक के मारने लगे जिसके बाद सुरक्षाकर्मियों को बीच बचाव के लिए आना पड़ा.
इंग्लैंड यह मैच 1-0 से जीत गया. पर मैच से ज्यादा चर्चा में वो विवाद था जिसने जन्म दिया रेड कार्ड और येलो कार्ड को. ये उपाय किया गया था भाषा की उस खाई को पाटने के लिए की अगर प्लेयर और रेफरी की भाषाएं अलग अलग हों तो भी बस एक कार्ड को दिखाकर अपनी बात प्लेयर तक पहुंचाई जा सके. जिसमें येलो कार्ड का मतलब वॉर्निंग देना होता है और रेड कार्ड का मतलब मैच से बाहर करने का .
लफड़ा नंबर 2
1966 के ठीक 20 साल बाद यानी 1986 का फीफा वर्ल्ड कप. क्वार्टफाइनल में हुए इस मैच का सेंटर प्वाइंट थे अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर और कैप्टन डिएगो माराडोना जो उस समय बेहतरीन फॉर्म में थे. दोनों टीमें शुरू से ही काफी संभल संभल कर खेल रही थी. पहले हाफ में एक भी गोल नहीं हुआ. फिर आया मैच का 51वां मिनट जहां माराडोना ने एक ऊंची छलांग लगाकर हेडर लगाया जिसमें असल में उन्होंने हाथ से गोल कर दिया था. पर ट्यूनीशिया के रेफरी अली बेनासेउर ने फाउल देखा ही नहीं और गोल मान लिया गया.
बाद में माराडोना ने एक इंटरव्यू में कहा कि उस मैच में 'थोड़ा माराडोना का दिमाग था और थोड़ा भगवान का हाथ' और वहीं से उस गोल को 'hand ऑफ god के गोल से जाना जाता है. हालांकि उसके कुछ मिनट बाद ही माराडोना ने एक ऐसा गोल भी किया जिसे गोल ऑफ द सेंचुरी कहा जाता है. उस गोल की खासियत ये थी की माराडोना ने ग्राउंड के दूसरे छोर से अकेले ही पांच - छ खिलाड़ियों को छकाते हुए एक लम्बी दूरी तय कर के इस गोल को किया था. और यही गोल उस मैच का विनिंग गोल भी साबित हुआ और अर्जेंटीना ने वो मैच 2-1 से जीत लिया.
लफड़ा नंबर 3
1998 में एक बार फिर से ये चिर प्रतिद्वंद्वी आमने सामने थे. दोनों ही टीमों ने काफी अटैकिंग गेम से शुरुआत की. पर मैच में मोड़ तब आया जब दूसरे में डेविड बेकहम और डिएगो सिमोन टकराकर गिर गए . कुछ लोग सिमोन पर आरोप लगाते हैं की उन्होंने बेईमानी की तो कुछ लोग बेकहम को. पर ट्विस्ट ये है की दोनों खिलाड़ी जब उठ रहे थे तो बेकहम ने सिमोन को टांग मारी और इसपर रेफरी किम मिल्टन नीलसन ने उनको रेड कार्ड दिखा दिया. अब इंग्लैंड को बाकी बचे मैच को 10 प्लेयरों के साथ खेलना पड़ा . नतीजा ये हुआ की मैच 2-2 से बराबर हो गया पर अर्जेंटीना ने पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से ये मैच जीत लिया. इंग्लैंड फैंस ने इस हार का जिम्मेदार बेकहम को माना और देश में उनके पुतले फूंके गए और काफी ट्रोल किया गया. हालांकि बाद में सिमोन ने माना की बेकहम द्वारा जब उनको किक किया गया तो उन्होंने थोड़ा ज्यादा ही रिएक्ट किया था.
लफड़ा नंबर 4
हालांकि ये विवाद उतना बड़ा नहीं था पर इसको बेकहम के बदले के तौर पर देखा जाता है. 2002 में हुए इस मैच में अर्जेंटीना के मॉरिशियो पोचेटीनो ने ओवेन को फाउल कर दिया और इस पर इंग्लैंड को पेनाल्टी मिली, जिसको बेकहम ने गोल कर टीम को जीत दिला दी और 1998 का अपना बदला पूरा किया.
अब 24 साल बाद ये दोनों टीमें फिरसे आमने सामने होंगी. एक तरफ मेसी हैं तो दूसरी तरफ हैरी केन. देखने वाली बात होगी कि इस बार बाजी किसके हाथ लगती है. इस फीफा में इन दोनों टीमों के बीच सिर्फ मैच ही होगा या लफड़ा भी ये तो वक्त ही बताएगा.
"अर्जेंटीना और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के लिए पुलिस और सुरक्षाकर्मी पूरी तैयारी में जुटे हुए हैं. प्लेयर्स तो अपनी तैयारी…"
