बिहार पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर सहरसा जिले में पुलिस विभाग के भीतर चल रहे दलाली और रिश्वत के बड़े मामले का खुलासा हुआ है. सलखुआ थाने में केस डायरी के नाम पर पैसे की लेन-देन और पैरवी का खेल चल रहा था, जो जांच में सामने आ गया. इसके बाद कोशी क्षेत्र के डीआईजी ने अचानक थाने निरीक्षण किया और तुरंत कार्रवाई शुरू की. इस दौरान एक कथित दलाल को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से तीन अलग-अलग थानों की असली केस डायरी, एक लैपटॉप और अन्य सामान बरामद हुआ. मामला गंभीर पाए जाने पर सलखुआ थानाध्यक्ष समेत सहरसा, सुपौल और मधेपुरा के 10 पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया. पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है.
डीआईजी ने किया निरीक्षण
सूत्रों के मुताबिक पटना स्थित पुलिस मुख्यालय को एक अहम इनपुट मिला था, जिसमें बताया गया कि सहरसा जिले के सलखुआ थाने में सतीश कुमार नाम का व्यक्ति कथित तौर पर दलाली का नेटवर्क चला रहा है. आरोप है कि इस काम में उसे थानाध्यक्ष मुकेश कुमार और सब-इंस्पेक्टर रविता कुमारी का भी सहयोग मिल रहा था. साथ ही जानकारी में यह भी सामने आया कि सतीश कुमार का भाई चंद्रकिशोर रजक नशे के अवैध कारोबार से जुड़ा हुआ है. इस गंभीर सूचना को देखते हुए कोशी रेंज के डीआईजी डॉ. कुमार आशीष ने सख्त कदम उठाते हुए 2 जुलाई 2026 को खुद सलखुआ थाने का निरीक्षण किया और मामले की जांच शुरू कर दी.निरीक्षण के दौरान जांच में यह बात सामने आई कि थानाध्यक्ष मुकेश कुमार और कथित दलाल सतीश कुमार के बीच फोन पर बातचीत हुई थी. इस पुष्टि के बाद पुलिस ने मामले की जांच और तेज कर दी है.
डायरी ने किया बड़ा खुलासा
जांच के दौरान पुलिस को सबसे बड़ा सबूत तब मिला, जब आरोपी के पास से पिपरा, सलखुआ और नवहट्टा थाने की असली केस डायरी बरामद हुई. गोपनीय पुलिस दस्तावेज एक बाहरी व्यक्ति के पास मिलने से पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया. इसके बाद सलखुआ थाना में कांड संख्या 107/26 दर्ज किया गया और आरोपी सतीश कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. फिलहाल आरोपी के खिलाफ कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जा रही है.
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