Bollywood के दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार का जन्म 9 जुलाई 1938 को गुजरात के सूरत शहर में हुआ. उनका असली नाम हरिहर जेठालाल जरीवाला था. लेकिन, जब हरिहर केवल 11 साल के थे तब उनकी ज़िंदगी में एक ऐसा मोड़ आया, जिसने उनकी ज़िंदगी को पूरी तरह बदल दिया. दरअसल, उनके पिता के निधन के बाद उनके परिवार को मुंबई में शिफ्ट होना पड़ा. यहाँ उन्होंने कई कठिनाइयों का सामना करा, जैसे पैसों की तंगी से जूझना और कई बार खाने तक के लाले पड़ जाना. 

लेकिन हरिहर बचपन से ही एक्टिंग में बेहद शौक रखते थे. उन्होंने शुरुआती जीवन में ‘इप्टा’ (IPTA) और ‘इंडियन नेशनल थिएटर’ में नाटक करना शुरू किया. उनके अभिनय करियर में सबसे बड़ी सहारा बनी उनकी माँ, जिन्होंने हरिहर के सपने को पूरा करने के लिए अपने गहने तक बेच दिए. 

क्रेडिट लिस्ट में भी नाम नहीं आया 

1960 में हरिहर ने पहली बार फिल्मी दुनिया में कदम रखा. जहां उन्होंने फिल्म ‘हम हिंदुस्तानी’ में एक बहुत छोटी सी भूमिका से शुरुआत की. इसमें उन्होंने एक पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभाया था. उनका किरदार इतना छोटा था कि इस फिल्म में उन्हें ऑफिसियल क्रेडिट लिस्ट में नाम तक नहीं मिला था.  

लीड रोल ने बदलवा दिया नाम 

हरिहर का नाम संजीव कुमार तब पड़ा जब उन्हें फिल्मों में बतौर मुख्य अभिनेता काम मिलना शुरू हुआ था. मशहूर फिल्म निर्माता सावन कुमार टाक ने ही उनका नाम परिवर्तन किया था. 1968 में आई फिल्म शंघार और शिकार से उन्हें असली पहचान मिली. 

आपको बता दें, संजीव की सबसे बड़ी ख़ासियत यही थी कि वे बड़े पर्दे पर बूढ़े किरदार निभाने से कभी नहीं कतराते थे. उन्हें महज 34 साल की उम्र में ही फ़िल्म ‘कोशिश’ (1972) में गूँगे-बहरे व्यक्ति का किरदार निभाने के लिए राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला था. 

फिल्म शोले में ठाकुर का निभाया किरदार 

1975 में आई फिल्म शोले, जिसे आज तक लोग बड़े चाव से देखते हैं, उस फिल्म में संजीव ने ‘ठाकुर बलदेव सिंह’ का किरदार निभाया था. यह किरदार इतना लोकप्रिय बना की इसे लोग आज अमर किरदार भी कह कर पुकारते हैं. बिना हाथों के सिर्फ आँखों और आवाज के जरिए उन्होंने जो अभिनय किया, वह आज भी बेमिसाल है.

इसके अलावा उन्होंने 'आंधी', 'मौसम', 'अंगूर', 'त्रिशूल', और 'खिलौना' जैसी सुपरहिट फिल्मों में अभिनय किया है. उनके 25 साल के करियर में उन्होंने लगभग 140-150 फिल्मों में काम किया है जिसमे उन्होंने करीब 100 फिल्मों में मुख्य अभिनेता और बतौर पैरेलल लीड काम किया है.

शराब पीने की थी आदत 

संजीव कुमार का निधन 6 नवंबर 1985 को केवल 47 वर्ष की आयु में गंभीर दिल का दौरा पड़ने के कारण हुआ था. 6 नवंबर 1985 की सुबह मुंबई के पाली हिल स्थित अपने घर पर उन्हें सीने में तेज दर्द उठा लेकिन अस्पताल ले जाने से पहले ही उनका निधन हो गया. साल 1978 में भी उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद वे इलाज के लिए अमेरिका गए थे और वहां उनकी बायपास सर्जरी हुई थी. डॉक्टरों ने उन्हें बेहद संभलकर रहने की सलाह भी दी थी.

दरअसल संजीव कुमार को खाने-पीने का बहुत शौक था. वे शूटिंग के बाद देर रात तक भारी और ऑयली खाना खाते थे. इसके साथ ही उन्हें शराब पीने और स्मोकिंग की भी लत थी, जिसने उनके दिल को और कमजोर कर दिया था. यही नहीं, उनके परिवार में पुरुषों की कम उम्र में मौत का एक जेनेटिक इतिहास भी रहा था. उनके पिता और छोटे भाई (निकुल) की मौत भी 50 साल की उम्र से पहले दिल की बीमारी के कारण ही हुई थी.

आज संजीव हमारे बीच मौजूद नहीं हैं लेकिन उनके द्वारा निभाए गए किरदार आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं. 

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