मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना के मशहूर शो “इंडियाज गॉट लेटेंट” के उपर चल रहे मुद्दे और विवाद अभी ख़त्म हुए ही थे कि समय एक बार फिर उन्हीं विवाओं के घेरे में वापस लौट आए हैं. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार यानी 14 जुलाई को समय रैना समेत 5 अन्य पर तीन-तीन लाख रुपए का जुर्माना लगाया है. 

कोर्ट ने यह साफ़ किया है कि कॉमेडियन समय अदालत के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं. जिसके चलते यह जुर्माना लगाया गया है. कोर्ट का कहना है कि समय रैना को आदेश दिए थे की वह अपने शो में दिव्यांग लोगों को बुलाये. कोर्ट के मुताबिक, समय ने ऐसा नहीं किया जिसके चलते उन्हें यह रकम भरनी पड़ेगी.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ ने यह आदेश तब पारित किया जब उसे सूचित किया गया कि समय रैना ने अपने पूर्व आदेश के अनुसार अपने शो में किसी भी विकलांग व्यक्ति को आमंत्रित नहीं किया था.

कोर्ट ने घटाई जुर्माने की रकम

शुरुआत में अदालत ने सभी आरोपियों पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया था. हालांकि, कॉमेडियन्स के वकील द्वारा नरमी बरतने की अपील के बाद कोर्ट ने जुर्माने की राशि घटाकर ₹3 लाख प्रत्येक व्यक्ति कर दी.

सुप्रीम कोर्ट ने सभी आरोपियों को दो हफ्तों के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि अगर उसके निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो जुर्माने की राशि बढ़ाकर ₹30 लाख कर दी जाएगी.

समय ने कोर्ट को गुमराह किया है: SC 

सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना के मामले की सुनवाई के दौरान कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने कहा कि उसके पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया गया. साथ ही अदालत ने कहा कि समय रैना ने कोर्ट को गुमराह किया है.

दरअसल, यह मामला 2025 का है जब दिव्यांगों पर कमेंट करने के आरोप 'क्योर SMA इंडिया फाउंडेशन' ने समय के ऊपर लगाए थे. इस मामले में समय के साथ अन्य लोगों के नाम भी शामिल है. 

कब हुआ था विवाद शुरू?

यह मामला 'इंडियाज गॉट लैटेंट' शो से जुड़ा है, जिसमें रणवीर इलाहाबादिया और समय रैना पर दिव्यांगों को लेकर की गई टिप्पणियों को लेकर विवाद हुआ था. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने दोनों को फटकार लगाते हुए कहा था कि कमाई के लिए किसी का अपमान करना स्वीकार नहीं किया जा सकता. अदालत ने दोनों को वीडियो जारी कर माफी मांगने का भी निर्देश दिया था.

साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणियों पर रोक लगाने के लिए सही गाइडलाइंस तैयार करने को कहा था. 

कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) को सोशल मीडिया पर इस्तेमाल की जाने वाली भाषा को लेकर विस्तृत गाइडलाइन बनाने का भी निर्देश दिया. सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि इन नियमों को तैयार करते समय राष्ट्रीय दिव्यांगजन कल्याण बोर्ड (NBDSA) और दिव्यांगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले अन्य संगठनों से भी सलाह ली जाए.

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