जिस Gen-Z प्रोटेस्ट के बाद सत्ता में आए थे, आज वही Gen-Z उनके ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट पर उतर आई है. आख़िर ऐसा क्या किया नेपाल की बालेन शाह सरकार ने की लोग उसी नेता के ख़िलाफ़ हो गए जिन्हें कुछ महीने पहले ही प्रधानमंत्री बनाया था.
दरअसल पिछले साल हुए Gen-Z प्रोटेस्ट के बाद मार्च 2026 में भारी मत से पीएम बने बालेन शाह को अब अपनी ही सबसे बड़ी ताक़त यानी नेपाल के युवाओं के भारी गुस्से और विरोध प्रदर्शनों का सामना करना पड़ रहा है. रविवार यानी 12 जुलाई को लोग बड़े पैमाने में काठमांडू की सड़कों पर सिंहदरबार सचिवालय के बाहर उनके खिलाफ नारे लगा रहे हैं.
उनके हाथों में पोस्टर और प्लेकार्ड थे, जिन पर ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसी बातें लिखी थीं.
फिर सड़कों पर क्यों उतरे Gen-Z?
नेपाल की राजधानी काठमांडू में 25 वर्षीय राइड-शेयरिंग ड्राइवर गणेश नेपाली ने गुरुवार दोपहर करीब 1:45 बजे त्रिपुरेश्वर स्थित पासपोर्ट विभाग के बाहर खुद को आग लगा ली. यह घटना काठमांडू महानगरपालिका (KMC) के एक पुलिसकर्मी के साथ बहस के बाद हुई. गंभीर रूप से झुलसे गणेश नेपाली की अगले दिन इलाज के दौरान मौत हो गई.
आग लगाने पर क्यों मजबूर हुआ गणेश?
बताया जा रहा है कि गणेश नेपाली पहले से ही अपनी 3 लाख नेपाली रुपये की मोटरसाइकिल लोन की किस्तें चुकाने के दबाव में थे. घटना से ठीक पहले उनकी बाइक पर पार्किंग नियम उल्लंघन के कारण व्हील लॉक लगाया गया था. हालांकि, उनके परिवार का आरोप है कि महानगरपालिका की ओर से बार-बार लगाए गए जुर्मानों और लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरने से पहले उन्होंने अपने भाई से कहा था, “यह सब महानगरपालिका की वजह से हुआ है.”
बेदखली अभियान से बढ़ रही थी नाराज़गी
गणेश नेपाली के इस भयावह कदम उठाने के बाद नेपाल की जानता का गुस्सा और बढ़ गया. लोग पहले ही बालेन शाह द्वारा उठाए क़दम से निराश थे क्योंकि उन्होंने काठमांडू में नदी किनारे बनी अवैध बस्तियों को हटाने का अभियान चला दिया है जिसमे कई लोग बेघर हो गए. इसमें लोगो का आक्रोश इस लिए भी नज़र आया क्योंकि प्रभावित लोगों के रहने का कोई इंतज़ाम भी नहीं किया गया था. इसी के बीच गणेश नेपाली के आत्मदाह से नेपाल की जनता का आक्रोश और भी बढ़ गया. प्रदर्शनकारियों के पास जो पोस्टर्स थे, उन पर ‘गरीबों के ख़िलाफ़ अत्याचार बंद हों’ और ‘मानवाधिकारों की रक्षा हो’ जैसे नारे लिखे थे.
जनता का चहेता नेता विरोध के घेरे में
केवल 35 साल की उम्र में बालेन शाह 27 मार्च 2026 को नेपाल के नए प्रधानमंत्री बने. लोगों ने उन्हें खूब प्यार भी दिया लेकिन हाल ही में लिए उनके इन फैसलों और गणेश की मृत्यु के बाद से जनता उनसे काफी निराश हैं और प्रदर्शन कर रही हैं.
“लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है": कपिल श्रेष्ठ
हालांकि कोई भी प्रतिक्रिया बालेन सरकार की तरफ़ से सामने नहीं आई है. वहीं, नेपाल में मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष कपिल श्रेष्ठ ने RT India के प्रस्तोता ओसामा शाब से बातचीत में कहा,
"लोग असंतुष्ट हैं और उनका गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है. जिन लोगों ने बालेन सरकार को आखें बंद किए वोट दिए थे, वे आज असंतुष्ट नज़र आ रहे हैं.”
"जिस Gen-Z प्रोटेस्ट के बाद सत्ता में आए थे, आज वही Gen-Z उनके ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट पर उतर आई है. आख़िर ऐसा क्या किया नेपाल की बालेन शाह सरकार न…"
