भारत में UPI ने भुगतान का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. सब्जी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक, हर जगह QR कोड से भुगतान आम बात हो गई है. लेकिन अब लोकसभा में पारित एक नए विधेयक के बाद UPI पर Merchant Discount Rate (MDR) यानी डिजिटल भुगतान शुल्क को लेकर बहस तेज हो गई है.
हालांकि सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि अभी UPI पर कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है. यह विधेयक केवल सरकार को भविष्य में जरूरत पड़ने पर शुल्क लागू करने का कानूनी अधिकार देता है.
सबसे पहले समझिए MDR क्या है?
Merchant Discount Rate (MDR) वह शुल्क है जो किसी डिजिटल भुगतान को स्वीकार करने पर दुकानदार (Merchant) बैंक या पेमेंट सेवा प्रदाता को देता है. अभी UPI पर अधिकांश लेनदेन के लिए यह शुल्क शून्य है. नए कानूनी प्रावधान के बाद सरकार चाहे तो भविष्य में कुछ श्रेणियों के व्यापारियों या कुछ प्रकार के लेनदेन पर MDR लागू कर सकती है.
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आम आदमी के लिए क्या बदलेगा?
फिलहाल कुछ भी नहीं
- ग्राहक पहले की तरह UPI से मुफ्त भुगतान कर सकेंगे.
- सरकार ने अभी किसी भी ग्राहक पर शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की है.
- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी स्पष्ट किया है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा।.
- यानी यदि आप रोज़ाना ₹100, ₹500 या ₹1,000 का UPI भुगतान करते हैं, तो फिलहाल आपको अतिरिक्त पैसा देने की जरूरत नहीं है.
व्यापारियों के लिए क्या असर हो सकता है?
यहीं सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है.
यदि भविष्य में MDR लागू होता है तो कुछ बड़े व्यापारियों को हर UPI भुगतान पर एक छोटा प्रतिशत शुल्क देना पड़ सकता है. इससे उनकी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ सकती है, हालांकि अभी अंतिम नियम तय नहीं हुए हैं.
क्या छोटे दुकानदारों को भी शुल्क देना होगा?
अभी ऐसा कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सरकार ऐसे मॉडल पर विचार कर रही है जिसमें-
- छोटे व्यापारियों को राहत मिल सकती है.
- बड़े कारोबार वाले व्यापारियों पर ही MDR लागू हो सकता है.
- ₹2,000 से अधिक के कुछ लेनदेन पर शुल्क लगाने का विकल्प भी विचाराधीन है.
हालांकि सरकार ने अभी किसी मॉडल को अंतिम मंजूरी नहीं दी है.
सरकार यह बदलाव क्यों करना चाहती है?
UPI आज दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणालियों में से एक है. लेकिन इसे चलाने के लिए बैंक, पेमेंट कंपनियां और तकनीकी संस्थाएं लगातार खर्च करती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इनके लिए कोई राजस्व मॉडल नहीं होगा तो भविष्य में इस व्यवस्था को और मजबूत बनाना मुश्किल हो सकता है. इसलिए सरकार ने पहले कानूनी रास्ता तैयार किया है, ताकि जरूरत पड़ने पर MDR लागू किया जा सके.
ग्राहकों और व्यापारियों को अभी क्या करना चाहिए?
ग्राहकों को किसी अफवाह पर भरोसा करने की जरूरत नहीं है क्योंकि UPI अभी भी मुफ्त है.
वहीं व्यापारियों को सरकार और RBI की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी चाहिए. यदि भविष्य में कोई शुल्क लागू होता है तो उसके नियम, दरें और लागू होने वाले व्यापारियों की श्रेणियां अलग से अधिसूचित की जाएंगी.
"भारत में UPI ने भुगतान का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. सब्जी वाले से लेकर बड़े शोरूम तक, हर जगह QR कोड से भुगतान आम बात हो गई है. लेकिन अब लो…"
