अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कारोबार पर भी पड़ सकता है. अमेरिकी सीनेट ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को भारी बहुमत से पारित कर दिया.
इसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान है. भारत और चीन जैसे रूस के बड़े तेल खरीदार इस प्रस्ताव के दायरे में आ सकते हैं.
100% टैरिफ़ का मतलब क्या है?
अगर भारत से अमेरिका जाने वाले किसी सामान की कीमत 100 रुपये है और उस पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाया जाता है, तो अमेरिकी बाजार में उस सामान पर 100 रुपये तक का अतिरिक्त शुल्क लग सकता है.
इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में वह सामान सीधे 100 प्रतिशत महंगा हो जाएगा. इसका असर मुख्य रूप से अमेरिकी खरीदार, भारतीय निर्यातक और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा.
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कपड़े और गारमेंट उद्योग पर बड़ा असर
भारत का कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट उद्योग अमेरिकी बाजार पर काफी निर्भर है. भारी शुल्क लगने से भारतीय कपड़े अमेरिका में महंगे हो जाएंगे. ऐसे में अमेरिकी कंपनियां भारत के बजाय बांग्लादेश, वियतनाम जैसे दूसरे देशों से सामान खरीदने का विकल्प तलाश सकती हैं. इससे भारतीय कंपनियों के ऑर्डर, बिक्री और मुनाफे पर दबाव आ सकता है.
गहने और हीरा कारोबार भी जोखिम में
रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए अमेरिका एक महत्वपूर्ण बाजार है. अगर भारतीय आभूषणों पर भारी शुल्क लगता है तो अमेरिकी ग्राहकों के लिए इनकी कीमत बढ़ सकती है. इससे निर्यात घटने और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव की आशंका बढ़ सकती है. छोटे और मध्यम आभूषण कारोबारियों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है.
चमड़ा, जूते और समुद्री उत्पाद
चमड़ा, फुटवियर और समुद्री उत्पाद भी अमेरिकी बाजार में भारतीय निर्यात की महत्वपूर्ण श्रेणियां हैं. इन उत्पादों पर शुल्क बढ़ने से भारतीय सामान की प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है. खासकर झींगा और दूसरे समुद्री उत्पादों के निर्यातकों को अमेरिका में कीमत बनाए रखना मुश्किल हो सकता है.
शेयर बाजार में इन सेक्टरों पर नजर
अगर अमेरिका वास्तव में भारत पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ़ लगाता है तो शेयर बाजार में सबसे पहले निर्यात आधारित कंपनियों पर दबाव देखने को मिल सकता है.
सबसे ज्यादा जोखिम वाले सेक्टरों में-
- कपड़ा और परिधान
- रत्न एवं आभूषण
- चमड़ा और फुटवियर
- समुद्री उत्पाद
- इंजीनियरिंग सामान
शामिल हैं.
इन क्षेत्रों में जिन कंपनियों का अमेरिकी बाजार से कारोबार ज्यादा है, उनके शेयरों में ज्यादा उतार-चढ़ाव हो सकता है.
क्या आईटी कंपनियां भी प्रभावित होंगी?
आईटी सेवाओं पर असर कपड़े या आभूषण जैसा सीधा नहीं होगा, क्योंकि टैरिफ़ मुख्य रूप से वस्तुओं के आयात पर लागू होता है. लेकिन अगर व्यापार तनाव से अमेरिकी कंपनियां खर्च कम करती हैं तो भारतीय आईटी कंपनियों के नए सौदों और आईटी बजट पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है.
पेट्रोल-डीजल 100% महंगा होगा?
नहीं. यह समझना बहुत जरूरी है. अमेरिकी टैरिफ़ का मतलब भारत में पेट्रोल-डीजल पर 100 प्रतिशत शुल्क नहीं है. घरेलू ईंधन कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, रुपये की विनिमय दर और क़रों जैसे कई कारकों पर निर्भर करती हैं. हालांकि, रूस से तेल खरीद को लेकर तनाव बढ़ने पर वैश्विक तेल बाजार प्रभावित होता है तो भारत में ईंधन कीमतों पर अप्रत्यक्ष असर संभव है.
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
आम लोगों के लिए सबसे बड़ा खतरा यह नहीं है कि हर चीज अचानक 100 प्रतिशत महंगी हो जाएगी. असली चिंता निर्यात, रोजगार और कंपनियों के मुनाफे को लेकर है. अगर अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा होता है तो ऑर्डर घट सकते हैं. इससे उत्पादन, निवेश और रोजगार पर दबाव आ सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम उद्योग काम करते हैं.
अभी क्या स्थिति है?
फिलहाल भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ़ नहीं लगा है. अभी केवल ऐसा विधेयक सीनेट से पारित हुआ है जिसमें भारी शुल्क लगाने का प्रावधान है. अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की प्रक्रिया और उसके बाद राष्ट्रपति का फैसला महत्वपूर्ण होगा.
अगर यह प्रावधान लागू होता है तो भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी. रूस से ऊर्जा जरूरतें पूरी करना और साथ ही अमेरिकी बाजार तक अपनी पहुंच बनाए रखना.
यही वजह है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भारत-अमेरिका बातचीत और अमेरिकी प्रशासन का फैसला शेयर बाजार से लेकर भारतीय निर्यातकों तक, सभी के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगा.
"अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत के कारोबार पर भी पड़ सकता है. अमेरिकी सीनेट ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को…"
