बुधवार रात को ईरान-अमेरिका तनाव ने उस वक्त खतरनाक मोड़ ले लिया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान पर जोरदार हमला करने की धमकी दे डाली. लेकिन, सुबह होते-होते ट्रम्प का मूड बदल गया और हफ्ते भर के अंदर समझौते की घोषणा कर डाली. हालांकि, ईरानी पक्ष ने इस एकतरफा घोषणा पर हामी नहीं भरी है.
दरअसल, बुधवार रात की धमकी होर्मुज में अमेरिकी AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर गिराए जाने के बाद आई थी. ट्रम्प का दावा था कि हेलिकॉप्टर को ईरानी कार्रवाई में मार गिराया गया, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी ठिकानों पर हवाई हमले भी किए थे.
ट्रम्प ने क्या कहा था
बुधवार रात राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर ईरान को "बहुत जोरदार" सैन्य जवाब देने की चेतावनी दी थी. साथ ही कहा था कि अमेरिका जल्द ही ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप को कब्जे में ले लेगा. ट्रम्प ने ईरान के प्रमुख तेल और गैस केंद्रों को हथियाने की धमकी भी दी थी. खार्ग द्वीप ईरान के लगभग 90 प्रतिशत कच्चे तेल के निर्यात का केंद्र माना जाता है, इसलिए इसे ईरानी अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा कहा जाता है.
एकतरफा समझौता
बुधवार रात की धमकी के कुछ घंटों बाद ट्रम्प ने अचानक यू-टर्न लेते हुए प्रस्तावित हमले को रद्द कर दिया और दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता लगभग तैयार हो चुका है. ट्रम्प ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा कि इस सप्ताह के अंत तक यूरोप में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. समझौते से जुड़े दस्तावेज "लगभग अंतिम रूप" में हैं और अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस हस्ताक्षर समारोह में शामिल हो सकते हैं.
ट्रम्प ने ईरानी परमाणु हथियार कार्यक्रम पर अहम दावा करते हुए कहा कि ईरान भविष्य में न तो परमाणु हथियार विकसित करेगा और न ही किसी अन्य देश से खरीदेगा और यही अमेरिकी अभियान का मुख्य उद्देश्य था. ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होते ही होर्मुज पूरी तरह खुल जाएगा.
ईरान का पक्ष
वहीं ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इस दावे पर पूरी तरह सहमति नहीं जताई है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि समझौते के मसौदे का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है, लेकिन अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.
तेहरान ने साफ किया है कि वह वार्ता में अपनी "रेड लाइन्स" से कोई समझौता नहीं करेगा. ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा. रिपोर्टों के अनुसार, ईरान किसी भी संभावित समझौते के बदले अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत, विदेशों में जमी हुई ईरानी संपत्तियों की रिहाई और होर्मुज में अपने अधिकारों को स्वीकार किए जाने जैसी मांगों पर जोर दे रहा है. इसलिए ईरानी पक्ष का कहना है कि बातचीत आगे बढ़ी है, लेकिन अंतिम समझौता होने की घोषणा करना अभी जल्दबाजी होगी.
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