ममता बनर्जी की परेशानियाँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कभी उनके नेताओं के साथ हिंसा हो रही, तो कहीं विधायक दल की बैठकों में विधायक नहीं जुट रहे. सत्ता की कमान तो गई, अब पार्टी में भी टूट के आसार प्रबल होते जा रहे हैं. सोमवार को पार्टी की दरार उस समय सार्वजनिक हो गई, जब टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) ने कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में दो विधायकों को पार्टी से निकाल दिया.
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला बंगाल विधानसभा से शुरू होता है. दरअसल, 20 मई के रोज टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भेजा था, जिसमें शोभनदेब चट्टोपाध्याय को सदन में पार्टी का नेता और नेता विपक्ष घोषित किया गया था. इसी पत्र में चट्टोपाध्याय के समर्थन में 70 विधायकों के हस्ताक्षर भी थे. इनमें से 14 हस्ताक्षर कथित तौर पर गलत पाए गए.
इस मामले की जांच के लिए सीआईडी सक्रिय हो गई है, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को भी तलब किया गया है. इस विवाद के बीच पार्टी के दो विधायकों रिताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने अध्यक्ष को शिकायत पत्र भेजा है, जिसमें कहा गया है कि नेता विपक्ष संबंधी प्रस्ताव पर हम दोनों विधायकों के नाम भी लिखे गए, जबकि हमने उस पर हस्ताक्षर नहीं किए थे.
पार्टी का पक्ष
टीएमसी ने सोमवार को दोनों विधायकों पर कार्रवाई करते हुए, उन्हें पार्टी से निकाल दिया है. साथ ही अलग गुट बनाने का आरोप लगाते हुए, पार्टी बोली है कि, “हमें जानकारी मिली थी कि ये दोनों विधायक पार्टी के भीतर अलग गुट बनाने की कोशिश कर रहे थे. इससे पहले कि वे संगठित हो पाते, पार्टी ने उन्हें निष्कासित करने का फैसला कर लिया है.
ममता बनर्जी का हमला
ममता बनर्जी ने आरोप लगाने वाले विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनका काम लोगों को अधिकारों से वंचित करना था. साथ ही पार्टी के सांसदों और कार्यकर्ताओं पर हुए हमलों को लेकर ममता बोली हैं कि, राज्यभर में पार्टी कार्यालयों पर हमले हुए हैं और हजारों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है. साथ ही अन्य विधायकों से भी अपील की कि वे बंदोपाध्याय और साहा का समर्थन न करें.
सांसदों पर हमला
बंगाल में चुनावी हिंसा की जो परंपरा वाम ने शुरू की, जो ममता राज में पली-बढ़ी वो अब भाजपा राज में नई ऊंचाइयों को छू रही है. अब कैमरे के सामने सांसदों को पीटा जा रहा है. ममता के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी और पार्टी के तेज-तर्रार सांसद कल्याण बनर्जी को कैमरे के सामने पीटा गया है.
पार्टी टूटेगी
खबरें, सूत्र और पार्टी तीनों की गतिविधियों से यह तय है कि पार्टी में सब ठीक नहीं है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में सत्ता के साथ पार्टी बदलने की परंपरा रही है. इसी क्रम में हरियाणा के आया राम-गया राम बंगाल में भी जारी रहेगा. इस आवागमन के लक्षण उस विधायक दल की बैठक में भी दिखे, जब 60 विधायक बैठक से अनुपस्थित रहे.
दरअसल, दल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने ममता बनर्जी के आवास पर विधायक दल की बैठक बुलाई थी. बैठक का मुख्य उद्देश्य चुनावों में मिली हार और अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद की स्थिति की समीक्षा करना था. लेकिन जब बैठक शुरू होने का समय आया, तो वहां केवल 20 विधायक ही मौजूद थे. सूत्रों ने बताया कि जो 60 विधायक बैठक से अनुपस्थित रहे, जब पार्टी नेतृत्व ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, तो वे सभी पूरी तरह से ‘इनकम्युनिकेटो’ (संपर्क से बाहर) पाए गए.
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि दोनों बागी विधायकों के तेवर किसी बड़ी उठापटक की ओर इशारा कर रहे हैं. खबरों के मुताबिक दोनों विधायकों रिताब्रत बनर्जी और संदीपन साहा के पास पचास से ज्यादा विधायकों का समर्थन है. सूत्र तो यहाँ तक कह रहे हैं कि, कोलकाता मेयर फिरहाद हकीम भी बागियों के संपर्क में हैं.
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