जुलाई के महीने में संसद का मानसून सत्र शुरू होना है. इस सत्र को लेकर सरकार ने भी अपने मोजे चढ़ा लिए हैं. खबरों के मुताबिक, 130वां संविधान संशोधन विधेयक इसी सत्र में पेश किया जाएगा. यानी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 30 दिन की न्यायिक हिरासत होती है तो उन्हें पद छोड़ना होगा.

क्या कहता है कानून

चर्चाओं का विषय बना 130वां संविधान संशोधन विधेयक शुरुआत से ही सवालों के घेरे में है. विधेयक के अनुसार, यदि किसी प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या राज्य एवं केंद्र के मंत्री को ऐसे आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया जाता है, जिसमें पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, और वह लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे पद छोड़ना होगा. यदि संबंधित व्यक्ति 30 दिन पूरे होने से पहले जमानत पर रिहा हो जाता है, तो यह प्रावधान लागू नहीं होगा.

कब किया जाएगा पेश

20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से तीन दिन पहले संयुक्त संसदीय समिति (JPC) अपनी रिपोर्ट सौंपने की तैयारी में है. 17 जुलाई को पेश होने वाली इस रिपोर्ट को लेकर विपक्षी खेमे में खलबली मच गई है, क्योंकि सूत्रों का दावा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर मोदी सरकार संसद में विधेयक पेश करेगी. दूसरी तरफ भाजपा पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि सरकार इस सत्र के लिए विशेष बहुमत का आंकड़ा जोड़ रही है. विपक्ष के मुताबिक, तृणमूल, शिवसेना, DMK और सपा के सांसद इसी नीयत से तोड़े गए हैं.

संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन करने वाला यह विधेयक 20 अगस्त 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था. विधेयक संख्या 111, 2025 के रूप में जब इसे पेश किया गया था, तब संसद में विपक्ष और सरकार के बीच तीखी बहस देखने को मिली थी. इस तनाव के बाद सरकार ने इसे विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया था.

समिति के सदस्य कौन

130वें संविधान संशोधन विधेयक की जांच के लिए गठित 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की अध्यक्षता भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी कर रही हैं. समिति में लोकसभा और राज्यसभा के सांसद शामिल हैं. सत्ता पक्ष से अनुराग सिंह ठाकुर और रविशंकर प्रसाद हैं, तो वहीं विपक्ष से असदुद्दीन ओवैसी और सुप्रिया सुले इसका हिस्सा हैं. समिति का दायित्व विधेयक के संवैधानिक, कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपना है.

विपक्ष का क्या कहना

विपक्ष का कहना है कि 130वां संविधान संशोधन विधेयक 'दोष सिद्ध होने तक निर्दोष' के संवैधानिक सिद्धांत के खिलाफ है. उनका तर्क है कि केवल गिरफ्तारी और 30 दिन की न्यायिक हिरासत के आधार पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री को पद से हटाना उचित नहीं है, क्योंकि इस चरण में अदालत ने व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया होता है. विपक्ष का यह भी कहना है कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार कर निर्वाचित सरकारों को अस्थिर किया जा सकता है.

विपक्ष और कई संवैधानिक विशेषज्ञों का यह भी तर्क है कि प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को हटाने का फैसला सदन के बहुमत और संवैधानिक प्रक्रिया से होना चाहिए, न कि केवल गिरफ्तारी या लंबी हिरासत के आधार पर. यदि यह कानून लागू हुआ तो जांच एजेंसियों को अप्रत्यक्ष रूप से निर्वाचित सरकारों के भविष्य को प्रभावित करने की शक्ति मिल सकती है. विपक्ष और अदालतें भी बार-बार कहती रही हैं कि जांच एजेंसियां सत्ता के पिंजरे में कैद तोता बन गई हैं. ऐसे में विपक्ष को डर है कि सत्ता मनमुताबिक तरीके से किसी भी निर्वाचित सरकार को गिरा देगी.

कांग्रेस क्या बोली

इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा था, "सिर्फ गिरफ्तारी या 30 दिन की हिरासत किसी व्यक्ति को दोषी नहीं बना देती. यह विधेयक संविधान के उस मूल सिद्धांत के खिलाफ है कि जब तक अदालत दोष सिद्ध न करे, तब तक व्यक्ति निर्दोष माना जाता है. इस तरह का प्रावधान जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का रास्ता खोल सकता है और निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने का हथियार बन सकता है."

वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में इसका विरोध करते हुए कहा था कि यह विधेयक शक्तियों के उचित बंटवारे और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है. उनका तर्क था कि इससे जांच एजेंसियों को निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने का रास्ता मिल सकता है. उन्होंने इसे "लोकतांत्रिक सरकारों के लिए डेथ नेल" और "पुलिस स्टेट की ओर कदम" बताया था.

सरकार का पक्ष

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधेयक पेश करते हुए कहा था, "प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल में रहकर सरकार नहीं चला सकते. अगर 30 दिन के भीतर जमानत मिल जाती है तो कोई कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन अगर मामला झूठा है तो अदालतें जमानत देंगी." उन्होंने यह भी कहा कि विधेयक किसी विपक्षी दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर भी समान रूप से लागू होगा.

"जुलाई के महीने में संसद का मानसून सत्र शुरू होना है. इस सत्र को लेकर सरकार ने भी अपने मोजे चढ़ा लिए हैं. खबरों के मुताबिक, 130वां संविधान सं…"