ममता बनर्जी की पार्टी विधानसभा और लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी बिखर रही है. ममता ने महिला सांसदों की जो फौज तैनात की थी, उसमें भी बिखराव दिखने लगे हैं. जहां ममता की स्टार प्रचारक सयानी घोष के बागी होने की खबरें हैं, तो वहीं तृणमूल की राष्ट्रीय राजनीति का अहम चेहरा रहीं सुष्मिता देव ने भी ममता का साथ छोड़ दिया है.

सुष्मिता देव

सुष्मिता देव ने आज यानी बुधवार दोपहर 1 बजे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दिया है. पार्टी छोड़ने के कारणों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

हिमंता से मिलीं

दिल्ली में राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता, असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व शर्मा से भी मिलीं. मुलाकात की बातचीत सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन मिलन की फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. अंदरखाने के सूत्रों की मानें तो सुष्मिता देव भाजपा जॉइन कर, कमल के निशान पर राज्यसभा जा सकती हैं.

ममता के लोकसभा सांसदों की टूट सार्वजनिक हो गई है, बस आधिकारिक होने की देरी है. इस देरी की वजह भारतीय कानून हैं, दरअसल कानून कहता है कि जब तक दो-तिहाई सांसद बागी न हो जाएं, तब तक उनकी बगावत वैध नहीं मानी जाएगी. तृणमूल के लोकसभा में 28 सांसद हैं. यानी बागियों को 19 का आंकड़ा पार करना होगा. हालांकि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में करीब 20 पार्टी सांसद एनडीए के साथ जाने की कोशिश कर रहे हैं.

लोकसभा में टूट

तृणमूल में वरिष्ठता के लिहाज से शीर्ष स्थानों पर रहीं दस्तीदार इस बगावत की सूत्रधार थीं. इनके ही नेतृत्व में भाजपा, तृणमूल के इच्छुक बागियों से कथित संपर्क साध रही है. दस्तीदार के मुताबिक, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को 20 सांसदों के समर्थन वाला पत्र भेजा गया है. इन 20 नामों में ममता की स्टार प्रचारक सयानी घोष का नाम शामिल है. बंगाली सिनेमा की कलाकार सयानी घोष बंगाल चुनावों के दौरान ‘दिल में हैं काबा’ गाने के चलते सुर्खियों में आई थीं.

काकोली घोष के साथ में शताब्दी रॉय, बापी हलदर, अरूप चक्रवर्ती, जून मालिया, दीपक अधिकारी (देव), कालीपदा सरेन, जगदीश बसुनिया, असित मल, अबू ताहिर खान, खलीकुर रहमान, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी और पार्थ भौमिक हैं.

सुष्मिता देव कौन हैं

असम की राजनीतिक सरजमीन से आने वाली सुष्मिता देव का राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू हुआ, जहां वह असम के सिलचर से विधायक और बाद में 2014 में लोकसभा सांसद चुनी गईं. वह पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष मोहन देव की बेटी हैं. सुष्मिता कांग्रेस की महिला इकाई की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रही हैं.

2019 का लोकसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने 2021 में कांग्रेस छोड़कर ममता बनर्जी की टीएमसी का दामन थाम लिया था. इसके बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया और वह पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में भी सक्रिय रहीं थीं.

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