राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के रजिस्ट्रेशन को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है. केरल के त्रिशूर में आयोजित संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि RSS कोई गुप्त संगठन नहीं है. संघ की शाखाएं खुले मैदानों में लगती हैं और उसके कार्यकर्ता समाज के बीच ही काम करते हैं.
भागवत ने कहा कि सरकार को संघ के अस्तित्व की पूरी जानकारी है. उनका कहना था कि पिछले 100 वर्षों में किसी भी सरकारी अधिकारी ने संघ को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए अनिवार्य नहीं बताया.
RSS प्रमुख ने कहा कि जिन संस्थाओं को सरकार से आर्थिक मदद लेना होता है, उनके लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है. उन्होंने कहा कि संघ के पास छिपाने जैसा कुछ नहीं है और उसकी गतिविधियां हमेशा सार्वजनिक रूप से होती हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1950 में संघ ने अपना लिखित संविधान सरकार को सौंप दिया था. इसके बावजूद कभी किसी सरकार ने रजिस्ट्रेशन को जरूरी शर्त नहीं बताया.
प्रियांक खड़गे ने उठाए सवाल
भागवत के बयान पर कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा- संघ देश-विदेश से चंदा जुटाता है और उसके लोगों को सरकारी सुरक्षा भी मिलती है. लोकतंत्र में कोई भी संस्था कानून और जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकती. संघ को अहंकार छोड़कर कानून का पालन करना चाहिए.
प्रियांक खड़गे ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर जो वीडियो उनके पत्र के जवाब के रूप में साझा किया जा रहा है, वह सही नहीं है. खड़गे के मुताबिक, उन्होंने 15 जून को RSS के रजिस्ट्रेशन को लेकर पत्र भेजा था, जबकि भागवत की यह टिप्पणी 13 या 14 जून की है.
भागवत की प्रमुख बातें
- RSS पर पहले दो बार प्रतिबंध लगाया गया था, एक प्रतिबंध कोर्ट के आदेश से लगा था. दूसरा सत्याग्रह के बाद हटाया गया. जिससे यह स्पष्ट है कि सरकार संघ के अस्तित्व से परिचित थी.
- संघ ने कई दशक पहले अपना संविधान सरकार को सौंप दिया था.
- सौ साल से अधिक समय में किसी सरकार ने रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य नहीं बताया.
- संघ की शाखाएं और कार्यक्रम खुले तौर पर आयोजित होते हैं.
- लोगों के बीच संघ की मौजूदगी इतनी व्यापक है कि उसे गुप्त संगठन कहना उचित नहीं है.
खड़गे के पुराने बयान भी चर्चा में
इस मुद्दे से पहले भी प्रियांक खड़गे कई बार RSS को लेकर बयान दे चुके हैं. अक्टूबर 2025 में उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ RSS कार्यकर्ताओं ने उन्हें धमकी दी थी. वहीं जुलाई 2025 में उन्होंने कहा था कि यदि केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनती है तो RSS पर प्रतिबंध लगाने पर विचार किया जा सकता है.
RSS के रजिस्ट्रेशन को लेकर शुरू हुई यह बहस अब राजनीतिक रूप लेती दिखाई दे रही है. एक ओर संघ खुद को खुला और सार्वजनिक संगठन बता रहा है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस नेता संगठन की कानूनी मान्यता पर सवाल उठा रहे हैं. आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चाओं का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है.
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