बिहार की राजधानी पटना में राजनीतिक गलियारों की हलचल बढ़ गई है, क्योंकि पटना में राबड़ी देवी के सरकारी बंगले की शिफ्टिंग शुरू हो गई है. दरअसल, सम्राट सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने के लिए 29 जून तक का समय दिया था. इसी क्रम में सोमवार को बंगले से सामान की शिफ्टिंग तेजी से हो रही है. फर्नीचर, घरेलू सामान के साथ-साथ पेड़-पौधे तक हटाए जा रहे हैं.

इस शिफ्टिंग के साथ कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं. मसलन, अब लालू परिवार कहां जाएगा? परिवार बंगले में कब से है? यह बंगला इतना जरूरी क्यों था? और बंगले की राजनीति क्या है? आइए, इन तमाम सवालों को विस्तार से देखें.

क्या था ऑर्डर

इस पूरे मामले की जड़ें 2 जून के एक बयान में मिलती हैं. इसी रोज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कहा था कि राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला हर हाल में खाली करना होगा. सरकारी बंगला किसी की बपौती नहीं है और कोई भी व्यक्ति सरकारी आवास पर स्थायी कब्जा नहीं रख सकता.

मुख्यमंत्री के इस मौखिक बयान ने आधिकारिक रूप उस समय ले लिया, जब सम्राट सरकार ने राबड़ी देवी के नाम नोटिस जारी कर कहा कि राबड़ी देवी को 15 दिन का अंतिम अल्टीमेटम दिया जाता है.

सरकार ने क्या कहा था

सरकार का कहना है कि 10 सर्कुलर रोड का आवंटन राबड़ी देवी के नाम पर अब वैध नहीं रहा, क्योंकि उन्हें विपक्ष की नेता होने के नाते 39 हार्डिंग रोड स्थित नया सरकारी आवास आवंटित किया जा चुका है. भवन निर्माण विभाग के अनुसार, सरकारी आवास नियमों के तहत एक पात्र व्यक्ति को नए आवंटन के बाद पुराना आवास खाली करना होता है. इसलिए राबड़ी देवी को कई नोटिस जारी किए गए.

सरकार ने यह भी तर्क दिया कि खाली कराया जा रहा बंगला अब बिहार के पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया गया है.

राबड़ी देवी बंगले में कब से हैं?

राबड़ी देवी 1997 से 2005 तक बिहार के मुख्यमंत्री पद पर आसीन थीं. इसी दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री को पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले का आवंटन किया गया था. बंगले का यह सिलसिला 2005 के बाद भी जारी रहा. समय के साथ राबड़ी देवी ने अलग-अलग पद संभाले, लेकिन उनका पता वही रहा.

राबड़ी देवी बिहार विधान परिषद की सदस्य (एमएलसी) बनीं और अलग-अलग अवधियों में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष भी रहीं. फरवरी 2024 में भी उन्होंने नेता प्रतिपक्ष का पद संभाला और वे इसी बंगले में बनी रहीं. यह आवास सिर्फ उनका सरकारी निवास नहीं था, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राजनीति का प्रमुख केंद्र भी बन गया था. इसी पते पर पार्टी की अहम बैठकें और राजनीतिक रणनीति तैयार होती थीं.

कौन-कौन रहता था

इस बंगले में राबड़ी देवी के साथ उनके पति और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव रहते थे. परिवार के अन्य सदस्य तथा कई मौकों पर उनके बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव भी इस आवास के निवासी रहे हैं.

बंगले की क्या खासियत

10 सर्कुलर रोड का यह बंगला बिहार सरकार का VVIP टाइप-VIII श्रेणी का सरकारी बंगला माना जाता है. यह राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित सरकारी आवासों में शामिल है. इसमें बड़ा परिसर, कई कमरे, बैठक हॉल, सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ क्वार्टर और राजनीतिक बैठकों के लिए पर्याप्त जगह होती है. ऐसे बंगले आमतौर पर मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष या अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को आवंटित किए जाते हैं.

सरकारी आवासों का आवंटन बिहार सरकार का भवन निर्माण विभाग देखता है. किसे कौन-सा बंगला मिलेगा, यह उसके पद, वरिष्ठता और पात्रता पर निर्भर करता है. किसी पदाधिकारी का कार्यकाल समाप्त होने या उसे नया सरकारी आवास आवंटित होने पर पुराने बंगले को खाली करना नियमों का हिस्सा होता है, ताकि उसे किसी अन्य पात्र मंत्री या पदाधिकारी को आवंटित किया जा सके. इसी नियम का हवाला देते हुए सरकार ने कहा कि 10 सर्कुलर रोड अब पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया गया है, इसलिए राबड़ी देवी को इसे खाली करना होगा.

"बिहार की राजधानी पटना में राजनीतिक गलियारों की हलचल बढ़ गई है, क्योंकि पटना में राबड़ी देवी के सरकारी बंगले की शिफ्टिंग शुरू हो गई है. दरअसल…"