पंजाब कांग्रेस एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है. जहां पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं. बल्कि आंतरिक एकजुटता है. 11 जुलाई को चंडीगढ़ में कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच हुई बैठक ने इस बहस को और तेज कर दिया है. क्या कांग्रेस 2021 की वही राजनीतिक गलती दोहराने जा रही है, जिसने उसे सत्ता से बाहर कर दिया था.

रूठे चन्नी कैसे मानेंगे? 
नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी इस समय विदेश में है. उनके न रहने पर भूपेश बघेल को पंजाब प्रभारी बना कर भेजा गया है. पार्टी में हो रहे आपसी तनाव और चन्नी गुट का खुलेआम बगावत को संभालने के लिए बघेल इस समय पंजाब में मौजूद है. वह दोनों पक्षों से मिल कर पार्टी टकराव को रोकना चाहते हैं. चन्नी गुट के बगावत को बातचीत करके उन्हें मनाने में लगे हुए है. उन्होंने दोनों पक्षों के लिए दरवाजे खोल दिए है. जिसको भी मिलना है ,आकर मिल सकता है. लेकिन इसके बावजूद कोई भी निष्कर्ष निकल के सामने नहीं आ रहा है. पार्टी में कलह वैसे का वैसा बना हुआ है.

2021 में कांग्रेस में क्या हुआ था?
2021 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह थे. लेकिन सरकार चलाने से ज्यादा चर्चा पार्टी के अंदर चल रही खींचतान की होने लगी. नवजोत सिंह सिद्धू लगातार अपनी ही सरकार और मुख्यमंत्री की सार्वजनिक आलोचना कर रहे थे. पार्टी हाईकमान ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की, सिद्धू को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया. लेकिन विवाद कम होने के बजाय और बढ़ गया. आखिरकार कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया,और चरणजीत सिंह चन्नी को नया मुख्यमंत्री बनाया गया. कुछ ही दिनों बाद सिद्धू ने भी प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया.बात करें 2022 विधानसभा चुनाव  की तो कांग्रेस को 117 सीटों में  केवल 18 सीटें ही मिल पाई थी. जो 2017 के 77 सीटों के आंकड़े से  कम थी. वहीं पंजाब में पहली बार आम आदमी पार्टी नें 92 सीटों के साथ प्रचंड और ऐतिहासिक जीत हासिल की थी. भगवंत मान CM के रुप में चुने गए थे.

2026 में इतिहास फिर खुद को दोहराएगा?
चार साल बाद पंजाब कांग्रेस फिर एक नेतृत्व संकट का सामना करती दिख रही है. इस बार विवाद का केंद्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग हैं. पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और उनके समर्थकों ने संगठनात्मक नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं और बदलाव की मांग की है. इसी विवाद को सुलझाने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल को बातचीत की जिम्मेदारी दी.11 जुलाई को हुई बैठक में चन्नी गुट ने अपनी नाराज़गी खुलकर रखी. रिपोर्टों के अनुसार, इस बैठक में राजा वड़िंग मौजूद नहीं थे.क्योंकि असंतुष्ट नेताओं ने अलग से बातचीत की मांग की थी.बैठक के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि सभी नेताओं की बातें हाईकमान तक पहुंचाई जाएंगी और सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि'सब ठीक है' तथा नेतृत्व परिवर्तन का कोई निर्णय नहीं हुआ है.

2021 और 2026 में क्या समानताएं हैं?
दोनों परिस्थितियों में कुछ समान राजनीतिक संकेत दिखाई देते हैं. वहीं पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असहमति अब भी बनीं हुई है. वरिष्ठ नेताओं का सार्वजनिक रूप से अपनी ही संगठनात्मक व्यवस्था पर सवाल उठाना. हालांकि हाईकमान बातचीत करके इस संकट को सुलझाने में लगे हुए है. लेकिन इसके बावजूद चुनाव से पहले संगठनात्मक अस्थिरता की चर्चा बनी हुई है. हालांकि, एक महत्वपूर्ण अंतर भी है. 2021 में विवाद सीधे मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के बीच था, जबकि 2026 में फिलहाल यह मुख्य रूप से संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर है.अभी तक न तो सरकार बदलने जैसी स्थिति है और न ही हाईकमान ने नेतृत्व परिवर्तन का संकेत दिया है.

कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
राजनीति में विपक्ष से लड़ना आसान हो सकता है, लेकिन अपनी पार्टी के भीतर पैदा हुए अविश्वास को दूर करना कहीं अधिक कठिन होता है. यदि मतभेद लंबे समय तक सार्वजनिक बने रहते हैं, तो इसका असर कार्यकर्ताओं के मनोबल, संगठन की एकजुटता और मतदाताओं की धारणा पर पड़ सकता है. यही बात 2021 में भी देखने को मिली थी.

क्या 2021 वाली गलती दोहरा रही है कांग्रेस? 
भूपेश बघेल और चरणजीत सिंह चन्नी की बैठक केवल एक राजनीतिक मुलाकात नहीं थी. बल्कि यह कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा भी है. यदि पार्टी समय रहते संवाद और संगठनात्मक संतुलन स्थापित कर लेती है, तो वह 2021 जैसी स्थिति से बच सकती है. लेकिन यदि मतभेद सार्वजनिक रूप से बढ़ते रहे, तो विपक्ष को राजनीतिक बढ़त मिल सकती है. इतिहास हमेशा खुद को नहीं दोहराता, लेकिन राजनीति में इतिहास से सबक न लेने की कीमत अक्सर चुनावी हार के रूप में चुकानी पड़ती है. पंजाब कांग्रेस के सामने आज सबसे बड़ा सवाल यही है.क्या वह 2021 से सीख लेगी, या फिर वही कहानी एक नए रूप में दोहराई जाएगी.

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