भारतीय जनता पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तैयारी में जुट गई है. सूत्रों के हवाले से संगठन और मंत्रिमंडल में बड़े बदलावों की खबरें आने लगी हैं. इन बदलावों के जरिए 2027 में होने वाले चुनावों के जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधा जाएगा और साथ ही संगठन के स्तर पर भी फेरबदल किए जाएंगे. खासतौर पर पंजाब और उत्तर प्रदेश की राजनीति को केंद्र में रखकर राजनीतिक बिसात बिछाई जाएगी. आइए इन बदलावों के कब, कहां और कैसे वाले सवालों को देखते हैं.
कब होंगे बदलाव
मई के अंतिम हफ्ते से कयासों का बाजार गर्म है. 18 जून को संपन्न हुए राज्यसभा चुनावों ने इन कयासों पर मुहर भी लगा दी है. मई के कयासों की मानें तो यह बदलाव दो वजहों से टल रहे हैं. पहली वजह है अधिक मास. इस मुहूर्त पर पार्टी राजनीतिक बदलाव नहीं करती है, हालांकि 15 जून को यह समाप्त हो चुका है. दूसरी वजह थी प्रधानमंत्री मोदी की विदेश यात्रा, जिसका समापन 18 जून को हो चुका है. इन दोनों वजहों के आधार पर देखें तो बदलाव कभी भी घोषित हो सकते हैं.
भाजपा पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के मुताबिक जुलाई में होने वाले मानसून सत्र में मोदी सरकार परिसीमन विधेयक दोबारा ला सकती है. इस आधार पर कहा जा रहा है कि संभावित बदलाव इस सत्र से पहले या इसके दौरान हो सकते हैं.
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में रविवार या सोमवार को बड़ा फेरबदल हो सकता है. इसी सिलसिले में गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात भी की है.
क्या बदलाव होंगे
खबरों के मुताबिक मंत्रिमंडल के कई मंत्री अपने अतिरिक्त विभागों से मुक्त कर दिए जाएंगे. कई मंत्रियों को आगामी विधानसभा चुनावों में उतारा जाएगा. संगठन के स्तर पर भी कई अहम बदलाव किए जाएंगे. आरएसएस की पत्रिका पाञ्चजन्य ने भी मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल के संकेत दिए हैं. पाञ्चजन्य की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भाजपा द्वारा नितिन नवीन को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में व्यापक फेरबदल की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है.
सूत्रों के अनुसार, इस फेरबदल का एक प्रमुख उद्देश्य मोदी सरकार की औसत उम्र कम करना होगा. इसके तहत युवा नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी जा सकती है, जबकि एक दशक या उससे अधिक समय से मंत्री रहे नेताओं को संगठन की तरफ मोड़ा जा सकता है.
क्यों हो रहे बदलाव
भाजपा प्रशासन और संगठन में हो रहे इन बदलावों के पीछे दो अहम वजह हैं. पहली वजह है 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव. यह चुनाव उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में होने हैं. इन राज्यों की सूची में उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड भाजपा के लिए अहम माने जा रहे हैं, इसीलिए राघव चड्ढा और रवनीत सिंह बिट्टू के पद में बदलाव किए जाने की चर्चा है. उत्तर प्रदेश में भी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को नई टीम मिल रही है, जिसमें राजनाथ सिंह के बेटे भी रहेंगे.
वहीं दूसरी वजह है हाल ही में हुई टूटें. दरअसल, आम आदमी पार्टी, शिवसेना और तृणमूल के जिन बागियों ने भगवा गमछा पहन लिया है, उन सांसदों को भी सरकार में जगह देनी होगी. इसी क्रम में मंत्रिपरिषद में जगह बनाई जा रही है. सुगबुगाहट तो यहां तक है कि बंगाल को ज्यादा तवज्जो मिल सकती है. क्योंकि भाजपा के 12 और टीएमसी के 20 बागी मिलाकर भाजपा के पास बंगाल में पर्याप्त सीटें हो गई हैं. 20 बागियों ने केंद्र में अल्पमत झेल रही मोदी सरकार को मजबूत कर दिया है. इस वजह से बंगाल के सांसद मंत्रिपरिषद में जोड़े जा सकते हैं.
कौन कहां पहुंचेंगे
सूत्रों की मानें तो रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव शक्तिकांत दास को कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है. यानी निर्मला सीतारमण को किसी और विभाग में भेजा जा सकता है. अटकलों के मुताबिक शिक्षा मंत्रालय सीतारमण का अगला ठिकाना बन सकता है.
नीट पेपर को लेकर धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ मामला गरमाया हुआ है और हरदीप सिंह पुरी का नाम भी एप्सटीन फाइल्स में आ चुका है. इन दोनों कारणों के चलते इन दोनों मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी की कार्यशैली पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि नरेंद्र मोदी ऐसे दबावों में फैसले नहीं लेते हैं.
उद्धव ठाकरे के बागी सांसदों को इनाम मिल सकता है. छह बागियों की टूट में सक्रिय भूमिका निभाने वाले श्रीकांत शिंदे को कैबिनेट में जिम्मेदारी मिल सकती है. साथ ही बंगाल की बगावत को मैनेज करने वाले अनुराग ठाकुर की कैबिनेट में वापसी हो सकती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश को साधने और राज्य में हिंदुत्व के मुद्दे को मजबूत करने के लिए मेरठ से सांसद अरुण गोविल को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है.
साथ ही पंजाब भाजपा में भी फेरबदल होंगे. बंगाल जीतने के बाद भाजपा का रथ पंजाब की ओर रवाना हो चुका है. इसी क्रम में रवनीत सिंह बिट्टू को विधानसभा चुनावों में उतारा जा सकता है. गौरतलब है कि संसद में राहुल गांधी के साथ हुई तीखी बहस के बाद माना जा रहा था कि बिट्टू की वापसी हो सकती है. हालांकि भाजपा ने उनका राज्यसभा कार्यकाल नहीं बढ़ाया है, यानी अब उन्हें अपने राज्य मंत्री पद से इस्तीफा देना होगा. बिट्टू के खाली स्थान को भरने और पंजाब की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए राघव चड्ढा को मंत्रिपरिषद में लाए जाने की चर्चा है. सूत्रों के मुताबिक राघव को वित्त मंत्रालय में पद मिल सकता है.
खबरें तो यह भी हैं कि वित्त राज्य मंत्री का जिम्मा संभाल रहे पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इसलिए अब उन्हें केंद्र की जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाएगा. पंकज चौधरी के स्थान पर राघव चड्ढा बैठ सकते हैं. केजरीवाल के ही दूसरे बागी, अशोक मित्तल को भी मंत्री बनाए जाने की अटकलें हैं.
रवनीत सिंह बिट्टू की जगह तरुण चुग को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है. हाल के राज्यसभा चुनावों में चुग को मध्य प्रदेश से सांसद चुना गया है.
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य नीतीश कुमार को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है. साथ ही खजुराहो सांसद विष्णु दत्त शर्मा और बिहार के महाराजगंज से सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना है.
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