बेंगलुरु में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में जोर-जोर से नारे लगाने शुरू कर दिए. यह घटना ‘संकल्प समावेश’ कार्यक्रम में हुई, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे भी मौजूद थे.

पार्टी कार्यक्रम पर खर्गे की नाराजगी

कार्यक्रम के बीच अचानक ‘डीके-डीके’ के नारे लगने लगे, जिससे पूरा माहौल बाधित हो गया और मंच पर चल रही औपचारिक कार्यवाही में रुकावट आ गई. भीड़ के एक हिस्से द्वारा की गई इस नारेबाजी पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे ने कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने मंच से ही कार्यकर्ताओं को फटकार लगाते हुए अनुशासन बनाए रखने की सख्त हिदायत दी.

खर्गे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि पूरी कांग्रेस पार्टी का कार्यक्रम है, जिसमें सभी को मिलकर पार्टी के एजेंडे और विचारधारा पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि लोग केवल किसी एक नेता के नाम के नारे लगाने के लिए ही यहां आए हैं तो फिर ऐसे कार्यक्रम का कोई अर्थ नहीं रह जाता.

उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए तीखे शब्दों में कहा कि इस तरह का व्यवहार पार्टी की गरिमा के खिलाफ है और इससे संगठन की छवि प्रभावित होती है. खर्गे ने यह भी कहा कि पार्टी के कार्यक्रमों का उद्देश्य सामूहिक एकता और संगठन को मजबूत करना होता है, न कि किसी व्यक्ति विशेष को बढ़ावा देना.

मल्लिकार्जुन खर्गे ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि वह लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं और उनका अनुभव लगभग 58 वर्षों का है. उन्होंने कार्यकर्ताओं को यह भी याद दिलाया कि पार्टी ने कई नेताओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि संगठनात्मक अनुशासन को तोड़ा जाए.

भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर एक व्यक्ति कुछ बोलता है और दूसरा व्यक्ति अलग-अलग नारे लगाने लगता है तो ऐसे में बाकी लोग वहां क्यों मौजूद हैं. उन्होंने तंज भरे अंदाज में कहा कि क्या वे केवल शोर मचाने के लिए आए हैं या फिर कार्यक्रम को गंभीरता से सुनने के लिए.

खर्गे ने अपने भाषण में यह भी कहा कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है और इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं किया जा सकता. उन्होंने साफ चेतावनी दी कि इस तरह की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे.

उन्होंने यह भी बताया कि कार्यक्रम के दौरान हुई पूरी घटना की रिकॉर्डिंग मौजूद है और उसकी फुटेज की जांच की जाएगी. जांच के बाद जो भी कार्यकर्ता इस अनुशासनहीनता में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ पार्टी स्तर पर कार्रवाई की जाएगी.

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि पार्टी एक विचारधारा और संगठनात्मक ढांचे पर चलती है, और किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत पूजा या गुटबाजी को बढ़ावा देना उचित नहीं है. उन्होंने दोहराया कि पार्टी का हर सदस्य संगठन के प्रति जिम्मेदार है और उसे अनुशासन का पालन करना चाहिए.

इस घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है क्योंकि यह घटना कर्नाटक की कांग्रेस राजनीति में आंतरिक समर्थन और गुटीय राजनीति की ओर भी इशारा करती है. हालांकि खर्गे के सख्त रुख के बाद यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि पार्टी नेतृत्व किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को गंभीरता से लेगा.

कुल मिलाकर, इस पूरे घटनाक्रम ने यह दिखाया कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व अनुशासन और संगठनात्मक एकता को लेकर कितना सख्त रुख अपनाए हुए है, और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर कड़ी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

 


 

"बेंगलुरु में कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के समर्थन में जोर-जोर से नारे लगान…"