पंजाब विधानसभा चुनावों से सालभर पहले ही प्रदेश में पंथिक राजनीति सक्रिय हो गई है. एक तरफ जहां अकाल तख्त और भगवंत मान की ठन गई है, तो वहीं दूसरी तरफ केजरीवाल इस अदावत की भरपाई हिंदू वोट बैंक से करना चाह रहे हैं. दरअसल, बीते रोज अमृतसर में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अकाल तख्त के सामने AAP विधायकों के पेश होने की घोषणा की, जबकि AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लव-कुश और माता जानकी के भव्य मंदिर के निर्माण की बात छेड़ दी.
गौरतलब है कि अकाल तख्त ने पंजाब के सभी सिख विधायकों को 29 जून को अकाल तख्त के समक्ष पेश होने के लिए तलब किया था. ऐसे में एक दिन पहले केजरीवाल और मान सरकार की ओर से आए दोनों बयान प्रदेश की राजनीति में चल रही खींचतान की ओर इशारा कर रहे हैं. आइए इन दोनों बयानों के मायने टटोलते हैं.
क्या बोले केजरीवाल
28 जून को अमृतसर में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद केजरीवाल बोले, “अमृतसर में लव, कुश और माता जानकी का एक भव्य मंदिर बनाया जाएगा.” केजरीवाल ने आगे कहा, "यही वह स्थान है जहां श्री भगवान वाल्मीकि तीर्थ स्थल स्थित है. मान्यता है कि भगवान वाल्मीकि ने यहीं रामायण की रचना की थी. माता सीता ने भी यहीं स्थित वाल्मीकि आश्रम में निवास किया था और इसी स्थान पर लव और कुश का जन्म भी हुआ था तथा उनका पालन-पोषण और शिक्षा-दीक्षा भी यहीं हुई थी.
इसलिए यह भूमि सभी धर्मों के लोगों के लिए अत्यंत पवित्र है और विशेष रूप से हिंदू समाज तथा वाल्मीकि समुदाय के लिए गहरी आस्था और श्रद्धा का केंद्र है."
इस बयान के मायने
पंजाब भारत का एकमात्र ऐसा राज्य है जहां सिख धर्म के लोग बहुसंख्यक हैं, जिनकी आबादी राज्य की कुल जनसंख्या का लगभग 57.69% है. वहीं हिंदू धर्म यहां दूसरा सबसे बड़ा समुदाय है, जिसकी आबादी लगभग 38.49% है.
इस जनसांख्यिकी को अगर राजनीतिक चश्मे से देखें, तो यह वोट पार्टियों में बंटा हुआ है. एक तरफ अकाली दल और आम आदमी पार्टी हैं, जो सिख और ग्रामीण वोट बैंक पर निर्भर हैं. दूसरी तरफ कांग्रेस है, जो शहरी सिख और मुख्यतः हिंदू वोट बैंक की तलबगार है. इस वोट बैंक में भाजपा भी सेंधमारी करना चाहती है, लेकिन सफलता उसके रथ पर सवार नहीं हो रही है.
हाल के वर्षों में पंजाब की राजनीति में कुछ बदलाव आए हैं. मसलन, अकाली दल और बादल परिवार की पकड़ सिख वोट बैंक और प्रदेश में कमजोर हुई है. साथ ही अकाली दल और भाजपा का गठबंधन भी टूट गया है, जिसका सीधा असर भाजपा पर पड़ा है. हाल ही में हुए निकाय चुनावों में यह बात स्पष्ट दिखी, जब प्रदेश में घुटनों के बल चल रही भाजपा रेंगने लगी और अपने गढ़ पठानकोट में भी चुनाव नहीं जीत पाई.
विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा दशकों से प्रदेश का हिंदू वोट बैंक हासिल करना चाह रही है, लेकिन कांग्रेस के पीछे लामबंद यह वोट भाजपा के पाले में शिफ्ट नहीं हो रहा है. इसी बीच आम आदमी पार्टी भी इस वोट बैंक की होड़ में जुट गई है.
आप का खिसकता वोट
दरअसल, आम आदमी पार्टी का ग्रामीण सिख वोट उससे खिसक रहा है और इसकी दो वजह हैं. पहली, अकाली दल फिर से खड़ा हो रहा है और दूसरी, अकाल तख्त से AAP के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं. इन दोनों फैक्टरों की वजह से AAP के वोट बैंक में दरारें आ रही हैं और इस दरार को भरने के लिए AAP हिंदू वोट बैंक की तरफ बढ़ रही है. इसी कारण माता जानकी और लव-कुश का मंदिर बनाने की बात छेड़ी गई है.
भगवंत मान का बयान
अकाल तख्त के समन को लेकर भगवंत मान ने कहा, "हमारे विधायकों और मंत्रियों को कल श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया गया है. जिन-जिन विधायकों और मंत्रियों को बुलाया गया है, वे सभी वहां उपस्थित होंगे. हम श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को सर्वोपरि मानते हैं."
इसके बाद भगवंत मान ने जो कहा, उसने नया विवाद छेड़ दिया. मुख्यमंत्री बोले, "जब मुझे पहले अकाल तख्त द्वारा बुलाया गया था, तब भी मैं राष्ट्रपति के कार्यक्रम को छोड़कर श्री अकाल तख्त साहिब में मत्था टेकने गया था." इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है. साथ ही कुछ अहम सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि क्या अकाल तख्त, राष्ट्रपति से ऊंचा है?
"पंजाब विधानसभा चुनावों से सालभर पहले ही प्रदेश में पंथिक राजनीति सक्रिय हो गई है. एक तरफ जहां अकाल तख्त और भगवंत मान की ठन गई है, तो वहीं दू…"
