भारतीय कॉरपोरेट जगत ने चालू वित्त वर्ष के पहले महीने यानी अप्रैल 2026 में विदेशी बाजारों से भारी मात्रा में पूंजी जुटाई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में कुल 3,76,52,67,866.43 अमेरिकी डॉलर का 'एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग' (ECB) रूट के जरिए कर्ज लिया है. भारतीय रुपये में यह राशि लगभग 36,000 करोड़ रुपये होता है.

प्रमुख कंपनियां और सेक्टर

आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, वेदांता लिमिटेड और इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (IREDA) जैसी प्रमुख कंपनियों ने बड़े पैमाने पर विदेशी फंड जुटाया है. रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 48 करोड़ डॉलर, इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी ने 17.57 करोड़ डॉलर और वेदांता लिमिटेड ने 12.5 करोड़ डॉलर का कर्ज लिया है.

कर्ज के मुख्य उद्देश्य

कंपनियों ने यह कर्ज मुख्य रूप से निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए लिया है:

कई वित्तीय संस्थानों ने आगे कर्ज देने के लिए यह राशि जुटाई है.

उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नई परियोजनाओं को शुरू करने के लिए बड़ी रकम का आवंटन किया गया है.

बड़ी संख्या में निजी कंपनियों ने अपने दैनिक परिचालन और कार्यशील पूंजी की जरूरतों के लिए विदेशी ऋण का सहारा लिया है.

कई कंपनियों ने अपने पुराने महंगे कर्ज को चुकाने और कम ब्याज दर वाले विदेशी कर्ज लेने के लिए इस सुविधा का उपयोग किया है.

वित्तपोषण के स्रोत

इस बार अधिकांश ऋण 'फॉरेन इक्विटी होल्डर' अर्थात् विदेशी शेयरधारकों और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) में स्थित वित्तीय संस्थानों से प्राप्त हुए हैं. अप्रैल के आंकड़ों में 'स्पेशल परमिशन' के तहत शून्य प्रविष्टि रही, जिसका अर्थ है कि पूरा लेनदेन 'जनरल परमिशन' के तहत हुआ है.

बाजार पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों का विदेशी मुद्रा में कर्ज जुटाना भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते विश्वास और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बढ़ती मांग को दर्शाता है. विशेष रूप से अक्षय ऊर्जा और निर्माण क्षेत्र में निवेश के लिए यह विदेशी पूंजी काफी महत्वपूर्ण साबित हो रही है.

रुपी डिनोमिनेटेड बॉन्ड (RDB) के मामले में, अप्रैल 2026 के लिए कोई नई एंट्री नहीं देखी गई है, जो यह दर्शाता है कि कंपनियों का झुकाव वर्तमान में सीधे विदेशी मुद्रा ऋण (ECB) की ओर अधिक है.

 

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