ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर शामिल नहीं होंगे. इनके स्थान पर एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुंचेगा. सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि इस प्रतिनिधिमंडल में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा होंगे.

कब और कहां होगा अंतिम संस्कार

अली खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम चार चरणों में आयोजित किया जाएगा. पहला चरण 4 और 5 जुलाई को तेहरान स्थित इमाम खुमैनी मोसल्ला में आयोजित होगा. इस दौरान खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए जनता के बीच रखा जाएगा. इसके बाद 6 जुलाई को तेहरान में मुख्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी. फिर 7 जुलाई को पवित्र शहर क़ोम में श्रद्धांजलि और धार्मिक समारोह आयोजित किए जाएंगे. अंततः 9 जुलाई को खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद स्थित इमाम रज़ा दरगाह परिसर में पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक (दफन) किया जाएगा.

भारत कब होगा शामिल

फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा मुख्य राजकीय अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए 4 जुलाई को तेहरान पहुंचेंगे और कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे.

भारत को निमंत्रण कब मिला?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा था. यह निमंत्रण 24 जून को भारतीय विदेश मंत्रालय को सौंपा गया था.

प्रधानमंत्री क्यों नहीं होंगे शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकेंगे, क्योंकि रिपोर्टों के अनुसार जुलाई के पहले सप्ताह में प्रधानमंत्री इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के दौरे पर रहेंगे. विदेश मंत्री के न जाने को लेकर अब तक कोई खबर सामने नहीं आई है.

आलोचक क्या बोले

सरकार के आलोचकों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञों ने सरकार पर अमेरिका और इज़रायल के दबाव में होने के आरोप लगाए हैं. उनके मुताबिक, जब 28 फरवरी को खामेनेई की मौत हुई थी, तब भी भारत सरकार दो दिन तक कुछ नहीं बोली थी. उस दौरान भी सरकार पर दबाव के आरोप लगे थे. जिस बात को विपक्ष बार-बार रेखांकित करता आया है, वह यह है कि सरकार ने खामेनेई की मौत की निंदा तो की थी, लेकिन अमेरिका का नाम नहीं लिया था.

खामेनेई की मौत कब हुई?

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की 28 फरवरी को तेहरान पर हुए संयुक्त अमेरिकी-इज़रायली हवाई हमले में मौत हो गई थी. इसके बाद पश्चिम एशिया में कई सप्ताह तक संघर्ष जारी रहा था. सुरक्षा और युद्ध की परिस्थितियों के कारण अंतिम संस्कार तत्काल नहीं हो सका था. अब अंतिम संस्कार की औपचारिकताएं 4 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित की जाएंगी.

कौन हैं सैयद अता हसनैन?

सैयद अता हसनैन भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल हैं. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 15 कोर (चिनार कोर) की कमान संभाली थी. राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के जानकार माने जाने वाले हसनैन को मार्च 2026 में बिहार का राज्यपाल बनाया गया था.

पबित्रा मार्गेरिटा केंद्र सरकार में विदेश राज्य मंत्री हैं और विदेश मंत्रालय में भारत के राजनयिक संबंधों से जुड़े मामलों को देखते हैं.

"ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर शामिल नहीं होंगे. इनके स्थान पर एक उच्…"