करीब साढ़े तीन महीने से जारी अमेरिका-ईरान-इजरायल संघर्ष में जहां युद्धविराम के समझौते बन-बिगड़ रहे हैं, वहीं भारतीय भी इस जंग की कीमत चुकाने लगे हैं. दरअसल, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है. विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दूतावास को तलब कर विरोध दर्ज कराया है.

दरअसल, होर्मुज की नाकाबंदी जारी है. जहां अमेरिका ईरान से संबंधित जहाजों को निशाना बना रहा है, तो वहीं ईरान अपनी खाड़ी पर चक्का जाम करके आवागमन में अवरोध पैदा कर रहा है. खबरों के मुताबिक, इस खींचतान में अब तक छह भारतीय अपनी जान गंवा चुके हैं.

कब हुई घटना

10 जून को ओमान तट के पास होर्मुज से गुजर रहे तेल टैंकर MT Settebello को अमेरिकी सैन्य बलों ने निशाना बनाया था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरानी तेल से जुड़ा यह जहाज समुद्री नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा था.

कौन थे मरने वाले

हमले के बाद जहाज आग की चपेट में आ गया था और कई चालक दल के सदस्य लापता हो गए थे. जब बाद में बचाव अभियान चलाया गया, तब तीन भारतीय नाविकों के शव बरामद किए गए. मृतकों की पहचान मुख्य अभियंता पतनाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और फिटर शिवानंद चौरसिया के रूप में हुई है.

कितने भारतीय थे

जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें से 21 को सुरक्षित बचा लिया गया है. हालांकि, जहाज प्रबंधन ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि टैंकर किसी भी अवैध गतिविधि में शामिल नहीं था. साथ ही उस पर की गई कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के अनुरूप नहीं थी. कंपनी ने पूरे मामले की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है.

भारतीय पक्ष

विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है. मंत्रालय के अनुसार, संघर्ष क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नागरिकों और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत सभी पक्षों से संयम बरतने, सैन्य कार्रवाई रोकने और संवाद तथा कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने की अपील करता है. हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी और एस. जयशंकर का आधिकारिक बयान नहीं आया है. साथ ही भारत सार्वजनिक बयानों में अमेरिका का नाम लेने से भी बच रहा है.

पहले कब हुई थी घटना

अब तक 6 भारतीय अपनी जान गंवा चुके हैं. मौतें मार्च के दौरान विभिन्न जहाजों पर हुए ड्रोन, मिसाइल और समुद्री हमलों में हुई थीं. इनमें 1 मार्च को तेल टैंकर Skylight पर हमले में दो भारतीय तथा उसी दिन MKD VYOM पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत शामिल है. इसके बाद 12 मार्च को Safesea Vishnu पर हुए हमले में भी एक भारतीय नाविक की जान गई थी.

ईरान का पक्ष

ईरान ने अमेरिकी हमले की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री सुरक्षा मानकों का उल्लंघन बताया है. तेहरान का कहना है कि अमेरिका होर्मुज में अपनी सैन्य मौजूदगी का इस्तेमाल कर नागरिक और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना रहा है.

ईरानी विदेश मंत्रालय ने तीन भारतीय नाविकों की मौत पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं का सबसे बड़ा नुकसान निर्दोष नागरिकों और समुद्री कर्मियों को उठाना पड़ता है. तेहरान ने मामले की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की है और आरोप लगाया है कि अमेरिका प्रतिबंधों के नाम पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को अस्थिर कर रहा है. साथ ही ईरान ने दोहराया कि क्षेत्र में स्थायी शांति केवल बातचीत और कूटनीतिक समाधान से ही संभव है.

"करीब साढ़े तीन महीने से जारी अमेरिका-ईरान-इजरायल संघर्ष में जहां युद्धविराम के समझौते बन-बिगड़ रहे हैं, वहीं भारतीय भी इस जंग की कीमत चुकाने…"