करीब 30 दशक पुराने यमुना जल बंटवारे के समझौते को लागू करने के लिए सोमवार 29 जून को बड़ा कदम उठाया गया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हरियाणा और राजस्थान ने एक MoU पर हस्ताक्षर किए. इसके तहत मानसून में हरियाणा का अतिरिक्त यमुना जल पाइपलाइन के जरिए राजस्थान भेजा जाएगा, ताकि वहां के लोगों को पीने का पानी मिल सके.
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का बयान
समझौते के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यमुना जल परियोजना को लेकर लगातार बैठकें हो रही थीं. अब हरियाणा और राजस्थान के बीच इस समझौते को अंतिम रूप दे दिया गया है. उन्होंने बताया कि राजस्थान ने जुलाई से अक्टूबर तक मानसून में मिलने वाले अतिरिक्त यमुना जल को पाइपलाइन के जरिए पेयजल के रूप में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा था. हरियाणा ने अपने अतिरिक्त जल का पूरा आकलन करने के बाद इस प्रस्ताव पर सहमति दी.
उन्होंने आगे कहा, 'हमारा मकसद है कि यह पानी व्यर्थ बहने के बजाय राजस्थान के लोगों तक पहुंचे. यह एमओयू हथिनीकुंड बैराज से पाइपलाइन के जरिए पानी राजस्थान तक पहुंचाने का रास्ता तैयार करेगा. इस परियोजना को बिना किसी बाधा के पूरा करने में हरियाणा पूरा सहयोग देगा.' यह समझौता 1994 के अपर यमुना रिवर बोर्ड एग्रीमेंट के क्रियान्वयन से जुड़ा है, जिसके तहत यमुना नदी के जल के बंटवारे और प्रबंधन का ढांचा तय किया गया था. हालांकि, वर्षों तक यह व्यवस्था पूरी तरह लागू नहीं हो सकी थी. अब केंद्र की पहल के बाद इसे अमल में लाने की प्रक्रिया तेज होती दिखाई दे रही है.
राजस्थान के मुख्यमंत्री ने क्या कहा?
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यमुना जल समझौते पर हस्ताक्षर का यह दिन दोनों राज्यों के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा. उनके अनुसार, यह समझौता लाखों लोगों की वर्षों पुरानी उम्मीदों को पूरा करने के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की दिशा में भी एक बड़ा कदम है.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनका हमेशा मानना रहा है कि पानी केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन और भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है. भजनलाल शर्मा ने कहा कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब राजस्थान ने यमुना जल की औपचारिक मांग भी नहीं उठाई थी. इसके बावजूद उन्होंने राज्य की जल समस्या को समझते हुए ऐसी योजना बनाई, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 2003 में बाड़मेर और जालौर जैसे सूखा प्रभावित जिलों तक नर्मदा का पानी पहुंच सका.
"करीब 30 दशक पुराने यमुना जल बंटवारे के समझौते को लागू करने के लिए सोमवार 29 जून को बड़ा कदम उठाया गया. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूद…"
