IAS पद से इस्तीफा देने वाली उत्तर प्रदेश की पूर्व अधिकारी दिव्या मित्तल राजनीति में उतरने जा रही हैं. 29 सितंबर सुबह सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में उन्होंने कहा कि वो किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़ेंगी. उनके मुताबिक वो उत्तर प्रदेश की जनता के साथ मिलकर एक नया राजनीतिक मंच तैयार करेंगी. इस्तीफा मंजूर होने के बाद से उनके अगले कदम को लेकर कयास लगाए जा रहे थे. 

वीडियो में क्या कहा?
करीब 10 मिनट के इस वीडियो में दिव्या मित्तल ने कहा कि वो उत्तर प्रदेश में ही रहेंगी और राज्य को अपनी कर्मभूमि बताते हुए यहीं से राजनीतिक शुरुआत करने की बात कही. उन्होंने कहा कि उनका मकसद सिर्फ किसी नेता को बदलना नहीं, बल्कि राजनीति के तरीके को बदलना है. उनके मुताबिक इस राजनीति की शुरुआत कैसे होगी और यह कैसे चलेगी, यह लोग मिलकर तय करेंगे. उन्होंने राजनीति को किसी पद तक पहुंचने का जरिया नहीं, बल्कि आम लोगों की आवाज बनने का माध्यम बताया. 

उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए उन्हें पैसा, बाहुबल या जाति-धर्म के समीकरण नहीं चाहिए.

‘चलिए हिसाब मांगते हैं’
दिव्या मित्तल ने अपना नारा भी बताया, ‘चलिए हिसाब मांगते हैं.’ उन्होंने कहा कि उन्हें देश की आजादी के 80 सालों का हिसाब चाहिए. अपने प्रशासनिक अनुभव के उदाहरण देते हुए उन्होंने स्कूल, जमीन पर कब्जे, सड़क, पुल और सरकारी कामों में देरी जैसे मुद्दे उठाए. 

जनता से अपील
उन्होंने शिक्षक, डॉक्टर, किसान, मजदूर, वकील और छात्रों से इस मंच से जुड़ने की अपील की. उन्होंने यह भी कहा कि लोग उन पर नहीं, अपने आप पर भरोसा करें. उन्होंने अपना व्हाट्सएप नंबर साझा कर लोगों से सुझाव भी मांगे हैं. 

आरोपों पर जवाब
दिव्या मित्तल ने कहा कि इस्तीफे के कुछ घंटों में ही उन्हें राजनीति की चुनौतियों का अंदाजा हो गया. उन्होंने बताया कि एक बड़ी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता ने लिखा कि वो रात के अंधेरे में दूसरी बड़ी पार्टी के एक बड़े नेता से मिलने गई थीं. उनके मुताबिक ऐसी कोई मुलाकात नहीं हुई थी. उन्होंने इसे झूठा आरोप बताया और कहा कि वो डरेंगी नहीं, सवाल पूछेंगी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सवाल उठाने वालों को डराने के लिए FIR और ट्रोलिंग जैसे तरीके अपनाए जाते हैं. 

‘यूपी ने मुझे बेटी बनाया’
उत्तर प्रदेश को अपनी शुरुआत के लिए चुनने की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि वो यहां अधिकारी बनकर आई थीं, लेकिन लोगों ने उन्हें बेटी की तरह अपनाया. उनके मुताबिक यहां की मिट्टी ने उन्हें सिखाया कि वो कौन हैं और किसके लिए हैं. 

13 साल की सेवा, 30 अगस्त को इस्तीफा
2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था. वो संतकबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकी हैं. इस्तीफे के वक्त वो राजस्व परिषद में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं. केंद्र सरकार ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया, जो 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया. उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी दी और लिखा कि इस सेवा में जनसेवा का जो अवसर मिला, वह उनके लिए अविस्मरणीय रहेगा. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने इस्तीफे के लिए निजी कारणों, पारिवारिक जिम्मेदारियों और जीवन के नए मकसद का हवाला दिया था. अपनी भावुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि उन्हें लगता था कि वो लोगों को कुछ देने आई हैं, लेकिन असल में उन्हें ही सबसे ज्यादा मिला. इस्तीफे के पीछे उन्होंने किसी राजनीतिक दबाव या सरकार से जुड़े कारण का जिक्र नहीं किया था. 

मिर्जापुर प्रोटोकॉल विवाद
दिव्या मित्तल का प्रशासनिक करियर सबसे ज्यादा 2023 में मिर्जापुर के एक विवाद के लिए याद किया जाता है. मिर्जापुर की डीएम रहते हुए उन्होंने लहुरियादह गांव में पहली बार नल से पीने का पानी पहुंचाया. पानी पहुंचने के बाद गांव में जल पूजन का आयोजन हुआ. बताया गया कि इस कार्यक्रम में स्थानीय सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों को नहीं बुलाया गया था. भाजपा नेता विपुल सिंह ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन बताते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत की. इसके बाद दिव्या मित्तल का तबादला कर दिया गया और उन्हें कुछ समय तक कोई तैनाती नहीं मिली. 

मिर्जापुर से बस्ती तबादला होने पर लोगों ने, खासकर महिलाओं ने, उन पर फूल बरसाकर विदाई दी थी. लेकिन बस्ती में कार्यभार संभालने से पहले ही आदेश रोक दिया गया और उन्हें प्रतीक्षा सूची में रखा गया. बाद में उन्हें राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम में प्रबंध निदेशक बनाया गया. 

देवरिया में भी जनप्रतिनिधियों से टकराव की चर्चा
देवरिया की जिलाधिकारी रहते हुए भी उनका कार्यकाल चर्चा में रहा. जुलाई 2025 में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में बरहज विधायक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के बीच विवाद हुआ था, जिसमें डीएम के रुख पर भी सवाल उठे थे. मई 2026 में उन्हें देवरिया के डीएम पद से हटाकर राजस्व परिषद में विशेष सचिव बनाया गया. 

इस्तीफे के बाद विपक्ष का हमला, भाजपा का पलटवार
इस्तीफे के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई थी. कांग्रेस ने योगी सरकार पर ईमानदार अधिकारियों को अपमानित करने का आरोप लगाया था. कांग्रेस प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने कहा कि सरकार में योग्य अधिकारी किनारे किए जा रहे हैं. सपा प्रवक्ता पूजा शुक्ला ने भी सरकार को घेरा. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने किसी अधिकारी का नाम लिए बिना X पर लंबी पोस्ट लिखी और कहा कि ऐसे दबावों के कारण अधिकारियों को इस्तीफा तक देना पड़ सकता है. भाजपा ने इन आरोपों पर पलटवार किया. 

उनके चुनाव लड़ने की अटकलों पर कांग्रेस नेता अजय राय ने पहले कहा था कि अगर वो चुनाव लड़ना चाहती हैं तो पार्टी उनके नाम पर विचार कर सकती है. 

IIT-IIM से सिविल सेवा तक
सिविल सेवा में आने से पहले दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली से बी.टेक और IIM बेंगलुरु से एमबीए किया. उन्होंने लंदन में जेपी मॉर्गन जैसी वित्तीय कंपनी में काम किया था. 2012 की UPSC परीक्षा पास कर वे 2013 बैच की IAS अधिकारी बनीं. 

 

-ममता सिंह 

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