चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में लगातार तीसरे दिन नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करने के बाद, मीडिया से बातचीत में बघेल ने कहा कि अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए रखने का निर्णय पूरी तरह कायम है. उन्होंने नेतृत्व परिवर्तन की मांग को खारिज करते हुए कहा, 'जब पार्टी हाईकमान कोई निर्णय ले लेता है, तो उसे बार-बार बदलने का सवाल ही नहीं उठता. यह कोई गुड्डा-गुड्डी का खेल नहीं है कि हर थोड़े समय बाद फैसला बदल दिया जाए.'

दरअसल, करीब एक सप्ताह पहले कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह राजा वडिंग  को पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बरकरार रखने की घोषणा की थी. इसके साथ ही साल 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न चुनावी समितियों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों का भी ऐलान किया गया था.

बैठकों में हाईकमान के फैसले को मिला समर्थन
भूपेश बघेल ने बताया कि पिछले दो दिनों में आयोजित सभी बैठकों में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सर्वसम्मति से हाईकमान के फैसलों का समर्थन किया. उनके अनुसार, नेताओं ने वॉयस वोट के जरिए राजा  को वडिंग प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के निर्णय का स्वागत किया और पार्टी नेतृत्व का आभार भी व्यक्त किया.

चन्नी और रंधावा से जल्द होगी मुलाकात
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं की अब तक बघेल से मुलाकात नहीं हुई है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बघेल ने कहा कि उनकी चन्नी से बातचीत हो चुकी है और जल्द ही मुलाकात भी होगी. उन्होंने बताया कि वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा भी उनसे मिलने आएंगे. बघेल ने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह स्वयं उनके आवास पर जाकर भी मुलाकात करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कहा कि पहले भी कई वरिष्ठ नेताओं से उनके घर जाकर चर्चा की गई है. इस बार भी ऐसा करने में कोई संकोच नहीं होगा.

वडिंग ने भी दिया मुलाकात का संकेत
इससे पहले पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा  वडिंग ने कहा था कि चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी और कोर कमेटी के प्रमुख सुखजिंदर सिंह रंधावा जल्द ही भूपेश बघेल से मुलाकात करेंगे. वडिंग   के अनुसार, चन्नी ने उन्हें जानकारी दी थी कि वह एक-दो दिनों के लिए शहर से बाहर हैं, जिसके बाद बैठक का समय तय किया जाएगा.

किस कारण से शुरु हुआ ये पूरा बवाल, क्या रही इसकी वजह ?
इस बवाल के  शुरू होने का मेन कारड़ तब शुरू हुआ जब  आलाकमान ने राजा वड़िंग को अध्यक्ष पद पर बरकरार रखते हुए चन्नी को केवल 'कैंपेन कमेटी का चेयरमैन' बनाया. चन्नी गुट का मानना है कि 2027 का चुनाव चन्नी के चेहरे पर लड़ा जाना चाहिए, इसलिए वे वड़िंग के नेतृत्व का खुलकर विरोध कर रहे हैं. चन्नी ने अपने समर्थकों के साथ गुप्त बैठकें कीं और पंजाब के नए कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल की आधिकारिक बैठकों का बहिष्कार कर दिया. बात इतनी बढ़ी कि यह गुट अपनी शिकायतें लेकर दिल्ली आलाकमान तक पहुंच गया.

पार्टी नेतृत्व की ओर से दिए गए इन बयानों के बाद यह साफ संकेत मिला है. कि फिलहाल पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नेतृत्व में किसी बदलाव की संभावना नहीं है.  हाईकमान अपने फैसले पर पूरी तरह कायम है.

 

"चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस मुख्यालय में लगातार तीसरे दिन नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करने के बाद, मीडिया से बातचीत में बघेल ने कहा कि अ…"