औरतों की सुरक्षा के मुद्दे पर बंगाल की राजनीति फिर से गरमा गई है. इस दफे अपराध की तपिश शुभेंदु अधिकारी के हिस्से आई है. दरअसल, पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर रेप और मर्डर मामले में एक के बाद एक बड़े घटनाक्रम सामने आ रहे हैं. इस मामले के मुख्य आरोपी प्रभास मंडल को पुलिस ने बुधवार तड़के एक एनकाउंटर में ढेर कर दिया है. इस पूरे मामले को लेकर ममता बनर्जी सड़क पर उतर गई हैं, तो वहीं भीड़ द्वारा पीटे जाने के चलते एक आरोपी की जान चली गई है.

इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है. इसी बीच आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज मामले की पीड़िता की मां और विधायक रत्ना देबनाथ के तीखे बयानों ने भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं.

आरोपी का एनकाउंटर

मामले के मुख्य आरोपी प्रभास मंडल के एनकाउंटर मामले में पुलिस के अनुसार, मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात करीब 12:45 बजे जांच टीम आरोपी को सूरज्यापुर हाट स्थित घटनास्थल पर लेकर गई थी. यहां आने का मकसद क्राइम सीन का रीक्रिएशन था. पुलिस का कहना है कि घटनाक्रम दोबारा दिखाने के दौरान प्रभास मंडल ने अचानक एक ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी की बंदूक छीन ली और पुलिस टीम पर एक राउंड फायरिंग कर मौके से भागने की कोशिश की.

पुलिस के मुताबिक, आरोपी की फायरिंग के बाद टीम ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें प्रभास मंडल गंभीर रूप से घायल हो गया. घायल आरोपी को बरुईपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने बताया कि मुठभेड़ के बाद मामले से जुड़ी सभी आवश्यक कानूनी और वैधानिक प्रक्रियाएं शुरू कर दी गई हैं. वहीं, इस पूरे घटनाक्रम की भी नियमानुसार जांच की जाएगी.

'शव लेने भी नहीं जाऊंगी': आरोपी की मां

एनकाउंटर के बाद पुलिस जब आरोपी प्रभास मंडल के घर उसकी मौत की सूचना देने पहुंची, तो उसकी मां संध्या मंडल ने ममता या संवेदना दिखाने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने मीडिया से कहा, "एक मां होने के नाते दर्द जरूर है, लेकिन उस दर्द का कोई मतलब नहीं है. उसने जो जघन्य कर्म किया था, उसकी यही सजा होनी चाहिए थी. मैं उसके किए से आई मौत से संतुष्ट हूं. मैं उसका शव लेने अस्पताल नहीं जाऊंगी. पुलिस उसका शव ले जाए, दफना दे या कहीं भी फेंक दे."

मामला कब का है?

यह मामला दक्षिण 24 परगना जिले के बरुईपुर इलाके से जुड़ा हुआ है. 4 जुलाई को 12 वर्षीय एक नाबालिग लड़की लापता हो जाती है. परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस भी उसकी तलाश में जुट जाती है. लेकिन 5 जुलाई को सूरज्यापुर हाट इलाके में एक बोरे के अंदर बच्ची का शव बरामद होता है. जब इस शव की तफ्तीश की जाती है, तो शुरुआती जांच और पोस्टमॉर्टम में दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना सामने आती है.

पुलिस की कार्रवाई कहां तक पहुंची

बरुईपुर नाबालिग रेप और हत्या मामले में पुलिस ने अब तक कई अहम कदम उठाए हैं. सबसे पहले घटना के बाद कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी प्रभास मंडल समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. साथ ही मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय जांच दल (SIT) का गठन किया गया है. यह दल पूरे घटनाक्रम, साक्ष्यों और आरोपियों की भूमिका की गहनता से जांच करेगा.

मॉब लिंचिंग का मामला

नाबालिग बच्ची का शव मिलने के बाद बरुईपुर के सूरज्यापुर इलाके में लोगों का गुस्सा भड़क गया. आक्रोशित भीड़ ने अपराध में शामिल होने के संदेह में इंद्रजीत मंडल नामक एक व्यक्ति को पकड़ लिया और उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी. साथ ही गुस्साई भीड़ ने बरुईपुर-जयनगर रोड जाम कर दिया, टायरों में आग लगा दी और कई पुलिस वाहनों व सरकारी संपत्ति को भी क्षति पहुंचाई. हालांकि पुलिस की जांच में सामने आया कि इंद्रजीत मंडल निर्दोष था और पूरे मामले से उसका कोई संबंध नहीं था.

पुलिस ने इंद्रजीत मंडल की भीड़ द्वारा हत्या (लिंचिंग) का अलग मामला दर्ज किया है. हिंसा के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले करीब 200 लोगों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

मुख्यमंत्री क्या बोले

पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है. शुभेंदु ने घोषणा भी कर दी है कि सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सभी दोषियों को फांसी की सजा दिलाने की कोशिश करेगी. उन्होंने पुलिस महानिदेशक को मामले की विस्तृत जांच के लिए 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया और साफ चेतावनी दी कि यदि शुरुआती एफआईआर या जांच में पुलिस की तरफ से एक प्रतिशत भी लापरवाही पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत बर्खास्त किया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार की मांग पर स्थानीय स्तर पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए सूरज्यापुर में तत्काल एक नई पुलिस चौकी स्थापित करने के आदेश भी दे दिए हैं.

वहीं, घटना के बाद उग्र भीड़ द्वारा की गई लिंचिंग के मामले पर मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि कानून हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती. उन्होंने स्पष्ट किया कि भीड़ का शिकार हुआ युवक इंद्रजीत मंडल पूरी तरह बेकसूर था और उसकी हत्या में शामिल सभी उपद्रवियों पर हत्या (मर्डर) का केस चलाकर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस पूरी हिंसा और तोड़फोड़ के पीछे विपक्षी दलों और उग्र तत्वों की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश थी, जिसके पुख्ता सबूत और कॉल रिकॉर्डिंग्स पुलिस ने जुटा लिए हैं. ऐसे में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले करीब 200 दंगाइयों को चिन्हित कर जल्द ही जेल भेजा जाएगा.

ममता बनर्जी सड़क पर उतरीं

पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी इस पूरे मामले पर बेहद आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. बनर्जी ने सोमवार शाम को कोलकाता में अपने कालीघाट आवास से एक विशाल कैंडल लाइट मार्च का नेतृत्व भी किया. हाथ में मोमबत्ती लेकर सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी के साथ टीएमसी के कई शीर्ष सांसद और कार्यकर्ता मौजूद थे, जो पीड़ित परिवार के लिए तत्काल न्याय की मांग कर रहे थे. 

इसके साथ ही ममता बनर्जी ने राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया कि पुलिस प्रशासन ने उनके घर के बाहर भारी बैरिकेडिंग करके उन्हें एक तरह से 'हाउस अरेस्ट' (नजरबंद) कर दिया, ताकि वे बरुईपुर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात न कर सकें. खुद जाने से रोके जाने के बाद ममता बनर्जी ने टीएमसी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल को पीड़ित परिवार के घर भेजा और परिवार से फोन पर बात भी की.

BJP विधायक रत्ना देबनाथ का तीखा बयान

आर. जी. कर (RG Kar) अस्पताल मामले की पीड़िता की मां और पानीहाटी से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक रत्ना देबनाथ ने इस घटना पर बेहद भावुक और राजनीतिक रूप से तीखा बयान दिया है. विधानसभा में रोते हुए और मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "इस बार इंसाफ पहले जैसा (ढुलमुल) नहीं होगा." 

त्ना देबनाथ ने सीधे तौर पर पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार को घेरते हुए कहा, "TMC शासन के दौरान राज्य में जो सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक माहौल तैयार किया गया था, दक्षिण 24 परगना की यह वीभत्स घटना उसी का नतीजा है. बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी थी, लेकिन अब व्यवस्था को बदलना होगा."

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