पंजाब की राजनीती में सियासत से लेकर धर्म तक  इस समय चर्चा में छाया हुआ है. दरसल यह मामला अकाल तख़्त से जुड़ा हुआ है.  नए बने हुए कानून से अकाल तख़्त  संतुष्ट नहीं है, और इसको लेकर वह  संसोधन की मांग कर रहा है.  बीते 29 जून  को पंजाब के कैबिनेट मंत्री और विधायक अकाल तख़्त पहुंचे. और आम आदमी विधायकों के बिना सहमति के  साहिबानों समन को साइन कर दिया. जिससे यह मामला अब तूल पकड़ लिया है,और  राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है.

अकाल तख़्त क्या है , और क्यों झुक जाती है बड़ी हस्ती ?
अकाल शब्द का मतलब होता है,'अमर का सिंहासन ; सिख में इसे सबसे सर्वोच्च धर्म माना जाता है. यह परिसर स्वर्ण मंदिर के  सामने मौजूद है. इसकी स्थापना 1606 ई. में छठे सिख गुरु हरगोविंद ने की थी. हरगोविंद इसे ऐसी जगह बनाना चाहते  थे. जंहा पर धर्म के साथ -साथ राजनीतिक मामलों  में भी न्याय हो सके. यही कारण है की अकाल तख़्त को सीखो का सर्वोच्च सांसारिक (राजनीतिक )आसन भी कहा जाता है.

अकाल तख़्त  की सबसे बड़ी बात यह है की, वह आध्यात्मिक और लौकिक दोनों तरह के मामलों में सिख समुदाय के लिए आदेश जारी कर सकता है. तख़्त के जरिए ही सिख पंथ सामूहिक फैसले लेता है, और उसे लागू करवाता है.

महाराजा रणजीत सिंह के समय में भी अकाल तख्त के फैसलों और उसकी अहमियत का सम्मान किया जाता था. लेकिन वर्ष 1809 के बाद उन्होंने राजनीतिक मामलों में गुरमतों की परंपरा को बंद कर दिया और शासन से जुड़े फैसलों के लिए सिखों के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोगों की भी राय लेनी शुरू कर दी. हालांकि, धार्मिक विषयों में अकाल तख्त को आज भी सिख धर्म का सबसे सर्वोच्च संस्थान माना जाता है.

सिख धर्म के पाँच तख़्त की कहाँ है लोकेशन 
.    अकाल तख्त साहिब    अमृतसर, पंजाब
.    तख्त केशगढ़ साहिब    आनंदपुर साहिब, पंजाब
.    तख्त दमदमा साहिब    तलवंडी साबो, पंजाब
.    तख्त पटना साहिब    पटना, बिहार
.    तख्त हजूर साहिब    नांदेड़, महाराष्ट्र

क्यों झुक जाती है बड़ी से बड़ी शख्सियत 
अकाल तख़्त अथॉरिटी धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक तीनों में अपना फैसला ले सकता है. आइए विस्तारपूर्वक समझते है इनकी वजहो को -

.ऐतिहासिक महत्व:
अकाल तख्त का इतिहास कई सदियों पुराना है. इसकी स्थापना गुरु हरगोबिंद साहिब ने की थी.  इसी वजह से सिख धर्म में इसे बेहद सम्मान और आदर की दृष्टि से देखा जाता है.

• धार्मिक महत्व:
सिख समुदाय में अकाल तख्त से जारी होने वाले हुक्मनामे को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे मानना हर सिख का धार्मिक कर्तव्य समझा जाता है. इसकी अवहेलना करना गंभीर धार्मिक गलती मानी जाती है.

• एकता का प्रतीक:
अकाल तख्त पूरे सिख पंथ को एकजुट रखने का काम करता है. इसके सामने सभी समान माने जाते हैं, चाहे वह आम व्यक्ति हो या कोई बड़ा नेता.

• :फैसले लेने का अधिकार
अकाल तख्त केवल धार्मिक मामलों तक सीमित नहीं है. जरूरत पड़ने पर यह पंथ से जुड़े सामाजिक और सार्वजनिक मुद्दों पर भी अपना निर्णय या निर्देश जारी कर सकता है.

• सामूहिक निर्णय की परंपरा:
अकाल तख्त के महत्वपूर्ण फैसले पांच सिंह साहिबानों की सहमति से लिए जाते हैं. माना जाता है कि ये निर्णय पूरे सिख समुदाय की भावना और परंपरा के अनुरूप होते हैं.

पंजाब सरकार को क्यों आदेश दिया अकाल तख़्त नें ? 
पंजाब सरकार ने 'जांगत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब (संशोधन ) एक्ट -2026 ; को पास किया था. इस कानून में बेअदबी करने  वालों को सजा का प्रावधान था. लेकिन अकाल तख़्त और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC )ने इस कानून में आपत्ति जताई है. आखिर क्या है उनकी आपत्तियाँ -

.कानून में सिख शब्दावली, मर्यादा और पंथ से जुड़े मामलों में विधानसभा के फैसले को गलत बताया गया.

.जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के दो पुराने बयान सुनवाए, जिनमें वह कह रहे थे कि 'अगर बेअदबी करने वाला मानसिक रोगी हुआ तो उसके मां-बाप या कस्टोडियन को सजा मिलेगी.'

.जत्थेदार ने मंत्रियों से सीधा सवाल पूछा, 'क्या कानून की किताब में ऐसी कोई व्यवस्था वास्तव में दर्ज है?' इस पर पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां कोई साफ जवाब नहीं दे सके.

.आप के कुछ विधायकों ने जत्थेदार के सामने यह हैरान करने वाला कबूलनामा किया कि उन्होंने विधानसभा में कानून का मसौदा ठीक से नहीं पढ़ा था.

अकाल तख़्त नें इस कानून को संशोधित करने का आदेश दिया 
.एक महीने के भीतर कानून में संशोधन करें.

.संशोधन होने तक कानून लागू न करें.

.अगर सरकार ने आदेश नहीं माना तो सख्त कार्रवाई की चेतावनी.

क्या सच में मुख्यमंत्री को आदेश दे सकता है अकाल तख़्त ?
अकाल तख़्त सिर्फ एक इमारत नहीं बल्कि सिख पंथ की आत्मा है. यही कारण है की इनके एक आदेश से मंत्री से लेकर विधायक तक नंगे पाँव दौड़े चले आते है. केवल इतना ही नहीं उनके दिए गए आदेश को भी मानना पड़ता है. इसी वजह से अकाल तख़्त को सर्वोच्च माना जाता है. यह सिख समुदाय की भावनाओं और मर्यादा की  रक्षा के लिए सरकार को भी चुनौती दे सकते  है.


 

"पंजाब की राजनीती में सियासत से लेकर धर्म तक  इस समय चर्चा में छाया हुआ है. दरसल यह मामला अकाल तख़्त से जुड़ा हुआ है.  नए बने हुए कानून से अकाल…"