बंगाल में विधानसभा चुनावों के महीने भर बाद भी राजनीतिक खींचातानी जारी है. इस तनाव ने अब गिरफ्तारियों का रुख अख्तियार कर लिया है. इसी तहकीकात से बचने बंगाल की फलता सीट से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान फरार चल रहे थे. अभिषेक बनर्जी के करीबी खान को अब बंगाल पुलिस ने नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से पकड़ लिया है.

हालांकि, फलता सीट पर हुए उपचुनाव की वोटिंग से एक दिन पहले ही जहांगीर खान ने मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था. तृणमूल ने उस दौरान भी यह कहा था कि उनके उम्मीदवार पर दबाव बनाया गया है.

क्या आरोप

जहांगीर खान के खिलाफ हत्या के प्रयास, जबरन वसूली और दंगा भड़काने समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं. जहांगीर के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी दर्ज है, जिसकी जांच ईडी कर रही है. जहांगीर खान को कोलकाता हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा दे रखी थी. हालांकि, इसकी मियाद समाप्त होने के बाद कोलकाता हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा बढ़ाने से इनकार कर दिया था.

कैसे पकड़ा

पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने जहांगीर खान को पकड़ने के लिए टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लिया. जहांगीर खान के एक सहयोगी का फोन जब ट्रैक किया गया, और जब खान नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सरहद लांघने की फिराक में थे, उसी दौरान पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

जहांगीर खान की गिरफ्तारी किस जगह से और कब की गई, इस संबंध में अधिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. पश्चिम बंगाल पुलिस की एसटीएफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जहांगीर खान की गिरफ्तारी के संबंध में अधिक जानकारी साझा कर सकती है. मिली जानकारी के मुताबिक जहांगीर खान फलता विधानसभा सीट के लिए हाल ही में हुए चुनाव के बाद से लापता चल रहा था.

क्यों थी चर्चा

पश्चिम बंगाल का फलता विधानसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. यहां से ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी सांसद हैं. जहांगीर खान बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते थे. इस करीबीपन के चलते 2026 चुनावों के दौरान खान चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा से टकरा गए थे. उत्तर प्रदेश के आईपीएस अजय पाल शर्मा अपने एनकाउंटरों के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उन्हें सिंघम भी कहा जाता है. इसी तर्ज पर जहांगीर खान ने खुद को पुष्पा बताया था, और न झुकने की धमकी दी थी.

क्यों हुआ था टकराव

अजय पाल शर्मा ने चुनावों के दौरान जहांगीर खान के समर्थकों को चेतावनी दी थी. साथ ही कई शिकायतों पर कार्रवाई भी की थी. जवाब में जहांगीर खान ने खुद की तुलना फिल्म 'पुष्पा' के किरदार से करते हुए कहा था, "अगर वह सिंघम हैं, तो मैं पुष्पा हूं.”

उपचुनाव

29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान फलता विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चुनावी अनियमितताओं के आरोप लगे थे. विपक्षी दलों और चुनाव अधिकारियों ने मतदाताओं को डराने-धमकाने, बूथों पर अनधिकृत लोगों की मौजूदगी, ईवीएम से छेड़छाड़ और मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की शिकायतें दर्ज की थीं.

इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए, चुनाव आयोग ने फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 मतदान केंद्रों पर हुआ मतदान रद्द कर दिया था. और पूरे निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान कराने के लिए 21 मई की तारीख तय की गई थी. मतदान से दो दिन पहले ही यानी 19 मई को टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से हटने की घोषणा कर दी थी, लेकिन कानूनी प्रक्रिया पूरी हो जाने के कारण उनका नाम ईवीएम पर बना रहा था.

फलता सीट से भाजपा के देबांग्शु पांडा ने 1,09,021 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल कर डायमंड हार्बर क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका दिया था.

"बंगाल में विधानसभा चुनावों के महीने भर बाद भी राजनीतिक खींचातानी जारी है. इस तनाव ने अब गिरफ्तारियों का रुख अख्तियार कर लिया है. इसी तहकीकात…"