उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अब करीब आठ महीने बचे हैं. दिसंबर 2025 में पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. करीब 6 महीने बाद अब उन्हें पूरी टीम अब मिली है. भाजपा ने 8 महामंत्री, 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष और 19 उपाध्यक्षों की नियुक्ति की है. यह टीम जाति और वर्ग के हर समीकरण को साधते हुए बनाई गई है. जो कड़ी दिल्ली और लखनऊ के बीच फंसी हुई थी. वह अब साफ हो गई है.
पंकज चौधरी का अध्यक्ष बनना भी आसान नहीं था
पंकज चौधरी महाराजगंज से सात बार के सांसद हैं और केंद्र में राज्य वित्त मंत्री भी हैं. वह गोरखपुर मंडल से आते हैं यानी उसी इलाके से जहां से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आते हैं. योगी चाहते थे कि कुर्मी जाति से ही आने वाले स्वतंत्र देव सिंह को दोबारा अध्यक्ष बनाया जाए. स्वतंत्र देव 2019 से 2022 तक यह पद संभाल चुके हैं.
लेकिन दिल्ली आलाकमान ने कुर्मी जाति से ही आने वाले पंकज चौधरी को चुना जो दिल्ली के करीबी माने जाते हैं. हालांकि, लखनऊ और दिल्ली के बीच की यह तनातनी कोई नई बात नहीं है. वहीं, बीजेपी 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजे देखने के बाद भाजपा किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती.
एक और दिलचस्प बात यह है कि अगर केंद्र में मंत्रिपरिषद का विस्तार होता है तो पंकज चौधरी को केंद्रीय मंत्री पद से मुक्त भी किया जा सकता है. हालांकि यह आसान नहीं होगा क्योंकि वह नरेंद्र मोदी के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं.
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कौन हैं महामंत्री और क्षेत्रीय अध्यक्ष?
आठ महामंत्रियों में राम प्रताप सिंह चौहान, गीता शाक्य, अभिजात मिश्रा, उपेंद्र रावत, संजय सिंह, शंकर लोधी, दिलीप पटेल और राजेश चौधरी के नाम हैं. छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में ब्रज से पूरन सिंह लोधी, पश्चिम से नवाब सिंह नागर, कानपुर से रामकिशोर साहू, अवध से अवधेश द्विवेदी, काशी से अशोक चौरसिया और गोरखपुर से विनोद राय को जिम्मेदारी दी गई है.
19 उपाध्यक्षों में हर जाति का ध्यान
19 उपाध्यक्षों की सूची में सुरेश राणा, सत्यपाल सैनी, ब्रज बहादुर, धर्मेंद्र सिंह, मोहित बेनीवाल, देवेश कोरी, प्रियंका रावत, दुर्विजय शाक्य, रमेश सिंह, नीरज सिंह, अर्चना मिश्रा, पूजा पाल, शंकर गिरी, कामेश्वर सिंह, कृतिका अग्रवाल, सुरेश मौर्य, राजेश यादव, कृष्ण बिहारी राय और आलोक गुप्ता के नाम हैं. इस सूची में एक खास नाम है रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह का. यह शक्ति संतुलन बनाने की रणनीति का हिस्सा है.
पूजा पाल का नाम क्यों है खास?
19 उपाध्यक्षों में सबसे चर्चित नाम पूजा पाल का है जो समाजवादी पार्टी की निष्कासित विधायक हैं. उनकी राजनीति की शुरुआत एक दर्दनाक घटना से हुई. उनके पति राजू पाल प्रयागराज से बसपा विधायक थे. 2005 में उनकी हत्या हो गई.
मीडिया रिपोर्ट्स में अतीक अहमद गुट का नाम आया लेकिन न्यायिक प्रक्रिया में यह कभी साबित नहीं हो पाया. इसके बाद पूजा पाल ने न्याय के लिए लंबी लड़ाई लड़ी. वह सपा से जुड़ीं और कौशांबी की चायल सीट से विधायक बनीं. ओबीसी की मुखर महिला नेता के रूप में उनकी पहचान बनी.
करीब 19 साल बाद 2024 में सीबीआई की अदालत ने राजू पाल हत्याकांड में सभी दोषियों को सजा सुनाई. फैसले के बाद पूजा पाल प्रयागराज पहुंचीं और पति की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. इसके बाद वह योगी आदित्यनाथ की कानून व्यवस्था और माफिया विरोधी कार्रवाई की तारीफ करने लगीं. सपा से दूरी बढ़ती गई. 2024 के उपचुनाव में वह खुलकर भाजपा के लिए प्रचार करती दिखीं. अगस्त 2025 में सपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया. अब भाजपा ने उन्हें उपाध्यक्ष बनाया है.
मोर्चा अध्यक्षों की नियुक्ति भी हुई?
युवा मोर्चा की कमान रोहित मिश्रा को, पिछड़ा मोर्चा प्रकाश पाल को, किसान मोर्चा देवेंद्र सिंह को, अनुसूचित मोर्चा अशोक रावत को, महिला मोर्चा सरोज कुशवाह को और अनुसूचित जनजाति मोर्चा विद्याभूषण गोंड को सौंपा गया है.
अखिलेश के PDA का जवाब है यह टीम?
भाजपा की इस पूरी टीम को देखें तो साफ समझ आता है कि यह अखिलेश यादव के पीडीए यानी पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक के फार्मूले का सीधा जवाब है. सपा का सबसे बड़ा वोट बैंक यादव समुदाय है. लेकिन भाजपा यादवों के बजाय बाकी छोटी ओबीसी जातियों को साथ लेकर एक नया समीकरण बना रही है. हर जाति, हर वर्ग और हर क्षेत्र को प्रतिनिधित्व देने की यह कोशिश 2027 की लड़ाई की तैयारी है.
"उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव में अब करीब आठ महीने बचे हैं. दिसंबर 2025 में पंकज चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था. करीब 6 महीन…"
