राजस्थान में राहुल गांधी को एकता की दुहाई दिए हुए एक हफ्ता भी नहीं हुआ था और राज्य में पार्टी की फूट सार्वजनिक हो गई है. दरअसल, बीते रविवार अशोक गहलोत ने 2022 की बगावत के संदर्भ में कहा है कि यदि सोनिया गांधी और कांग्रेस नेतृत्व उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाना चाहता, तो वह इस जिम्मेदारी को स्वीकार करने से इनकार नहीं करते. उन्होंने दावा किया कि उस समय जो घटनाक्रम सामने आया, उसके पीछे एक बड़ी साजिश थी. यह बयान ऐसे समय में आया है, जब मिशन 2029 के तहत पार्टी, संगठन में बड़े बदलाव करने जा रही है.
सचिन पायलट को लेकर भी गहलोत का बयान सामने आया है. वे बोले, 25 सितंबर की घटना उस व्यक्ति के खिलाफ थी जिसका नाम अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए चर्चा में था, और वो नाम पायलट साहब का था…… हम ऐसे व्यक्ति को अगला मुख्यमंत्री नहीं बना सकते जिसने मानेसर जाकर हमारी सरकार को गिराने की कोशिश की थी. इन बयानों को राहुल गांधी की 1 जून वाली राजस्थान यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है. अंदरखाने खबर थी कि यात्रा के दौरान सचिन पायलट के पद को लेकर भी चर्चा हुई थी.
गहलोत क्या बोले
जयपुर में पत्रकारों से बात करते हुए गहलोत बोले कि, 25 सितंबर की घटना उस व्यक्ति के खिलाफ थी जिसका नाम अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के लिए चर्चा में था, पायलट साहब. ऐसी स्थिति पैदा की गई जहां 100 विधायक एक साथ आए और उन्होंने कहा, 'हममें से किसी को भी मुख्यमंत्री बना दीजिए. हमने पार्टी का साथ दिया और इस सरकार को बचाया, लेकिन हम ऐसे व्यक्ति को अगला मुख्यमंत्री नहीं बना सकते जिसने मानेसर जाकर हमारी सरकार को गिराने की कोशिश की. अब इसे हाईकमान के खिलाफ विद्रोह के रूप में गलत तरीके से पेश किया गया है.”
गहलोत अपनी सफाई में बोले
कांग्रेस हाईकमान के खिलाफ बगावत के आरोप पर पूर्व मुख्यमंत्री बोले कि, ”अगर मैंने हाईकमान के खिलाफ बगावत की होती तो क्या मुझे मुख्यमंत्री बने रहने दिया जाता? सचिन पायलट को भी यह बात समझनी चाहिए. हम उनके दुश्मन नहीं हैं. बचपन से ही हमें उनसे स्नेह रहा है. चाहे वो हों या मेरा बेटा वैभव, जब हम सांसद थे तब वे 2-3 साल के थे. इसलिए मैं आज भी उन्हें वैसा ही मानता हूं, लेकिन मुझे नहीं पता कि अब राजनीति में उनका मार्गदर्शन कौन कर रहा है,"
पायलट को लेकर क्या बोले
पूर्व उपमुख्यमंत्री को लेकर उन्होंने आगे कहा, "मैंने कहा था कि माफ कर दो और भूल जाओ... हर कोई गलती कर सकता है. उसने गलती की और उसे इसे स्वीकार करना चाहिए. अगर उस दिन वह मेरी भावनाओं को समझ गया होता, तो वह भी माफ करने और भूल जाने की मेरी सलाह का पालन करता.”
राहुल गांधी का दौरा
इस बयान को राहुल गांधी की पुष्कर यात्रा से जोड़कर देखा जा रहा है, दरअसल 1 जून को नेता विपक्ष पुष्कर में आयोजित 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे.
इस दौरान हवाई अड्डे पर राहुल गांधी के स्वागत के दौरान PCC अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और CLP नेता टीकाराम जूली ने संयुक्त रूप से उन्हें फूलमाला पहनाई थी. इस एकता को देखते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि, “सभी अन्य राज्यों के लिए यह एक बहुत अच्छा उदाहरण है.”
बयान के मायने
राहुल गांधी के डोटासरा और जूली को लेकर दिए गए बयान को 2022 की घटना से जोड़कर देखा गया था. विशेषज्ञों का मानना था कि इस बयान के हवाले से गहलोत और पायलट की आपसी लड़ाई को संबोधित किया गया है.
संगठन में बदलाव
खबरों के मुताबिक 2029 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे कांग्रेस के संगठन में आमूलचूल परिवर्तन कर रहे हैं. इसी क्रम में दक्षिण में डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया गया, विजय के साथ गठबंधन किया गया और रेवंत रेड्डी को मिशन 2029 के लिए तेलंगाना में तैनात किया गया. इन्हीं बदलावों की नीयत से उत्तर भारत में भी बदलाव देखने मिल सकते हैं.
उत्तर भारत में बदलाव
राहुल गांधी की राजस्थान यात्रा को बड़े बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा था. खबरें थीं कि राजस्थान में पायलट का वनवास खत्म हो सकता है. उनका कद राज्य में बढ़ सकता है.
गहलोत की राजनीतिक पारी पर नजर रखने वाले विशेषज्ञ मानते हैं कि गहलोत भावी राजनीति की आहटों को समय से पहले भांप लेते हैं और हाईकमान की परिक्रमा लगाने लगते हैं. गहलोत, जिन्हें जादूगर भी कहा जाता है, उनकी यही राजनीतिक मिजाजी उन्हें प्रासंगिक रखती है.
खबरों के मुताबिक गहलोत ने एक आहट और भांप ली है, उन्हें लग रहा है कि अगर पायलट का कद बड़ा तो उनके खेमे को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा. इसलिए उन्होंने हाईकमान को बयानों के बहाने से याद दिलाया कि पायलट बगावत कर चुके हैं, उन पर भरोसा मत करना.
गहलोत भी फंसे
गहलोत के इस पूरे राजनीतिक दांव में एक समस्या है. दरअसल 2022 वाले प्रकरण में जब गहलोत से कांग्रेस अध्यक्ष बनने को सोनिया गांधी ने कहा था, तब गहलोत ने अपने विधायकों की विरोध परेड आलाकमान के सामने करवा दी थी. यह कदमताल इसलिए हुई थी ताकि गहलोत को मुख्यमंत्री पद छोड़ना न पड़े.
इस बगावत पर पर्दा डालने के लिए, गहलोत ने प्रकरण का सारा जिम्मा साजिश के नाम रख दिया है.
साजिश में कौन
2022 में जो सत्ता हस्तांतरण की कोशिश हुई थी, उसमें बतौर संयोजक अजय माकन और मल्लिकार्जुन खड़गे को तैनात किया गया था. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या गहलोत खड़गे पर भी निशाना साध रहे हैं.
"राजस्थान में राहुल गांधी को एकता की दुहाई दिए हुए एक हफ्ता भी नहीं हुआ था और राज्य में पार्टी की फूट सार्वजनिक हो गई है. दरअसल, बीते रविवार …"
