पंजाब की राजनीति से आ रहे बयानों और बैठकों ने कांग्रेस की दरारें सार्वजनिक कर दी हैं. गुटबाजी का आलम इतना गंभीर है कि पर्यवेक्षक और हाईकमान द्वारा नियुक्त प्रभारी भूपेश बघेल भी इस खाई को पाट नहीं पा रहे हैं. प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग के खिलाफ चरणजीत सिंह चन्नी ने लामबंदी तेज कर दी है. इस विरोधी खेमे में सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ नव-नियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष भी जुड़ गए हैं. हालांकि, राजा वड़िंग ने किसी खेमे के होने की बात से इनकार किया है.

बैठक कहाँ हुई

पंजाब कांग्रेस में चल रहे संगठनात्मक विवाद के बीच सोमवार को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने मोहाली में अहम बैठक की. इस बैठक के समय को लेकर भी राजनीतिक पर्यवेक्षक सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि यह बैठक उसी दिन हुई, जिस दिन पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल ने नाराज नेताओं से बातचीत के लिए बैठक बुलाई थी.

बागी खेमे के नेता चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा अपने समर्थकों के साथ भूपेश बघेल की बैठक में नहीं पहुंचे और उन्होंने अलग बैठक कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया. इस बैठक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए रंधावा ने लिखा, "एकता की शक्ति." अब इस लिखे के भी राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं.

इस बैठक से पहले पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के आवास पर भी एक बैठक हुई थी. इस बैठक को लेकर भी कांग्रेस के अंदरखाने खलबली मच गई थी.

बैठकों में क्या मांग की गई

कांग्रेस अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ 2029 के लोकसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी है. दक्षिण के बाद बारी उत्तरी राज्यों की थी. इसी क्रम में पंजाब संगठन में भी बदलाव होने थे. इन बदलावों को लेकर तीन धड़े राज्य में खड़े हो गए थे. पहला धड़ा पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का था, दूसरा और तीसरा खेमा नेता प्रतिपक्ष सुखजिंदर सिंह रंधावा और प्रदेश अध्यक्ष राजा वड़िंग का था. इन संभावित बदलावों ने उस वक्त सबको चौंका दिया, जब प्रदेश अध्यक्ष का पद राजा वड़िंग के ही पास रखा गया.

राजा वड़िंग की निरंतरता ने पार्टी के खेमों को और अधिक विभाजित कर दिया और बयानों का दौर शुरू हो गया. इन तमाम फैसलों के चलते चन्नी ने खुली बगावत छेड़ दी है. इन बैठकों में पार्टी की नियुक्तियों पर सवाल उठाए जा रहे हैं और पुनर्विचार की सिफारिशें दी जा रही हैं.

कांग्रेस नेतृत्व के सामने अपनी बात रखने के लिए चन्नी खेमे के कई नेता दिल्ली रवाना हो गए हैं.

कौन-कौन आया?

बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक परगट सिंह, बरिंदरमीत सिंह पाहड़ा, त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा, पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष संगत सिंह गिलजियां, पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु, पूर्व विधायक कुशलदीप सिंह ढिल्लों सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल हुए थे.

इससे पहले मोरिंडा में हुई बैठक में राणा गुरजीत सिंह, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, ओ. पी. सोनी, मोहम्मद सादिक, गुरप्रीत सिंह कंगड़, गुरकीरत सिंह कोटली, शेर सिंह घुबाया, दर्शन सिंह बराड़ और कई अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे. यह दिखाने की कोशिश की गई कि चन्नी के साथ पार्टी के बड़े नेताओं का एक मजबूत वर्ग खड़ा है.

"पंजाब की राजनीति से आ रहे बयानों और बैठकों ने कांग्रेस की दरारें सार्वजनिक कर दी हैं. गुटबाजी का आलम इतना गंभीर है कि पर्यवेक्षक और हाईकमान …"