भारत संग चल रहे सीमा विवाद के बीच नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की है. दरअसल, शिशिर खनाल 15 जून को चीन की आधिकारिक यात्रा के तहत राजधानी बीजिंग पहुंचे थे. खबरों के मुताबिक, इस दौरान उन्होंने चीन के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा की है.

यह दौरा उनकी भारत यात्रा के कुछ दिनों बाद ही हुआ है, इसलिए विश्लेषक इसे नेपाल की संतुलित विदेश नीति की झलक के तौर पर देख रहे हैं. यानी नेपाल की नई सरकार दोनों ही देशों को साधकर आगे बढ़ रही है. हालांकि, नेपाल का भारत संग कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा क्षेत्र को लेकर सीमा विवाद गरमाया हुआ है.

मीटिंग में क्या चर्चा हुई

मार्च 2026 में राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) की सरकार बनने के बाद यह खनाल की पहली चीन यात्रा है. बीजिंग पहुंचकर उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ बैठक की. इस बैठक में विदेश मंत्री वांग यी ने नेपाल को अपनी "पड़ोसी कूटनीति" का महत्वपूर्ण साझेदार बताया है और नेपाल की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन का आश्वासन दिया है. चीन ने बैठक के दौरान बिजली उत्पादन, राजमार्ग, बंदरगाह और विमानन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई है.

दौरे के मायने

पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली की कम्युनिस्ट सरकारों के दौरान चीन का नेपाल में प्रभाव अधिक रहता था, लेकिन जब से नई सरकार बनी है, तब से चीन के प्रभाव में अंतर आया है. इसलिए इस यात्रा के मायने कई आयामों से देखे जा रहे हैं. विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल की नई सरकार चीन और भारत दोनों के साथ व्यावहारिक संबंध विकसित करना चाहती है.

खनाल की भारत यात्रा

चीन यात्रा से पहले नेपाली विदेश मंत्री शिशिर खनाल 5 से 7 जून के बीच भारत यात्रा पर आए थे. इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात कर व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और सीमा विवाद समेत विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की थी.

इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारत संग रिश्तों को लेकर स्पष्ट किया था कि नई सरकार "अतीत के राजनीतिक बोझ से मुक्त" होकर संबंधों को नई दिशा देना चाहती है. उन्होंने भारत के साथ सीमा विवाद सहित सभी लंबित मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने पर जोर दिया था. साथ ही किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता को खारिज कर दिया था.

नेपाल-भारत के रिश्ते

भारत और नेपाल के रिश्ते केवल पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक संबंधों की गहरी नींव है. बिहार और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के बीच गहरा रिश्ता है. दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा के एक-दूसरे के यहां आ-जा सकते हैं और रोजगार, शिक्षा तथा व्यापार के क्षेत्र में भी घनिष्ठ सहयोग मौजूद है.

भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और प्रमुख विकास सहयोगी है. हालांकि, कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे सीमा विवाद समय-समय पर दोनों देशों के संबंधों में तनाव पैदा करते रहे हैं.

नेपाल-चीन के रिश्ते

नेपाल और चीन के संबंध पिछले कुछ दशकों में लगातार मजबूत हुए हैं. चीन नेपाल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. साथ ही चीन ने नेपाल की सड़क, हवाई अड्डा, ऊर्जा तथा कनेक्टिविटी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश भी किया है. नेपाल 2017 में चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में शामिल हुआ था, जिसके तहत कई आधारभूत ढांचा परियोजनाओं की घोषणा की गई थी.

हालांकि, चीन समर्थित कुछ परियोजनाएं विवादों में भी रही हैं. पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना की लागत बढ़ने और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों ने नेपाल में चीनी निवेश को लेकर सवाल खड़े किए हैं. नेपाल की भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं.

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