भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार चार कारोबारी दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया, लेकिन सप्ताह का अंत फिर भी कमजोर रहा. 4 सितंबर को Sensex 362.57 अंक यानी 0.48 प्रतिशत चढ़कर 76,515.43 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 सिर्फ 24.25 अंक यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,897.70 पर पहुंचा.
सबसे बड़ी चिंता यह है कि Nifty और Sensex लगातार चौथे सप्ताह गिरकर बंद हुए हैं. Nifty में इस सप्ताह करीब 1.2 प्रतिशत और Sensex में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट रही. यह पांच महीनों में दोनों सूचकांकों की लगातार चौथी साप्ताहिक गिरावट है.
महंगा कच्चा तेल बढ़ा रहा है चिंता
बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती इस समय कच्चे तेल की कीमत बनी हुई है। Brent crude करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतों में करीब 7 प्रतिशत की तेजी आई है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए लंबे समय तक महंगा तेल रुपये, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव डाल सकता है.
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विदेशी निवेशक बेच रहे हैं, घरेलू निवेशक संभाल रहे बाजार
4 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII ने भारतीय शेयरों में ₹3,111.94 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की. इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने करीब ₹8,930.12 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की.
यानी विदेशी पैसा बाजार से निकल रहा है, लेकिन घरेलू निवेशक इस दबाव को काफी हद तक संभाल रहे हैं. सितंबर के शुरुआती चार कारोबारी सत्रों में FII सिर्फ दो दिन ही शुद्ध खरीदार रहे हैं.
किन सेक्टरों में दिखी हलचल?
शुक्रवार को Metal stocks ने बाजार को सहारा दिया. Nifty Metal इंडेक्स करीब 1.07 प्रतिशत चढ़ा. दूसरी ओर Realty इंडेक्स करीब 0.90 प्रतिशत गिरा. Midcap 100 में 0.25 प्रतिशत की गिरावट रही, जबकि Smallcap 100 करीब 0.22 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ.
आगे बाजार की दिशा क्या होगी?
अब निवेशकों की नजर अमेरिका के रोजगार आंकड़ों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी. बाजार में यह उम्मीद बनी है कि अमेरिका में तत्काल ब्याज दर बढ़ाने का दबाव कम हो सकता है, लेकिन पश्चिम एशिया का तनाव और महंगा तेल इस राहत को सीमित कर सकते हैं.
तकनीकी स्तर पर भी Nifty के लिए 24,000–24,200 का क्षेत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसके नीचे रहने पर बाजार में तेज़ी टिकना मुश्किल हो सकता है, जबकि 23,830 और 23,700 महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर माने जा रहे हैं.
यानी बाजार में शुक्रवार की तेज़ी को अभी बड़ी वापसी नहीं माना जा सकता. फिलहाल महंगा तेल, विदेशी बिकवाली और वैश्विक ब्याज दरों की अनिश्चितता बाजार की दिशा तय करने वाले सबसे बड़े कारक हैं.
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