भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की तीन प्रमुख क्रेडिट सूचना कंपनियों- TransUnion CIBIL, CRIF High Mark और Equifax पर नियामकीय नियमों का पालन नहीं करने के मामले में कुल ₹34.96 लाख का जुर्माना लगाया है. RBI के अनुसार, इन कंपनियों ने कुछ पात्र शिकायतकर्ताओं को क्रेडिट जानकारी में देरी से सुधार या उसे अपडेट करने के बदले मिलने वाली मुआवजा राशि तय समय के भीतर उनके बैंक खातों में जमा नहीं की.
RBI ने तीनों कंपनियों के खिलाफ यह कार्रवाई 31 अगस्त 2026 के आदेश के आधार पर की है. इनमें सबसे बड़ा जुर्माना TransUnion CIBIL पर ₹26.82 लाख लगाया गया है.
वहीं, CRIF High Mark Credit Information Services पर ₹6.896 लाख और Equifax Credit Information Services पर ₹1.194 लाख का जुर्माना लगाया गया है.
आखिर मामला क्या है?
RBI ने क्रेडिट जानकारी में देरी से सुधार या उसे अपडेट करने के लिए ग्राहकों को मुआवजा देने की व्यवस्था से जुड़े नियम बनाए हैं. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी ग्राहक की क्रेडिट रिपोर्ट से जुड़ी शिकायत का समय पर समाधान नहीं होता और वह मुआवजे का पात्र बनता है, तो उसे निर्धारित राशि समय पर मिले.
लेकिन RBI की जांच में पाया गया कि तीनों कंपनियों ने कुछ पात्र शिकायतकर्ताओं के बैंक खातों में मुआवजा राशि निर्धारित समय के भीतर जमा नहीं की. यही वह मुख्य वजह थी, जिसके आधार पर RBI ने कार्रवाई की.
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RBI ने कैसे की जांच?
RBI ने इन कंपनियों की वैधानिक जांच की थी. यह जांच 31 मार्च 2025 की वित्तीय स्थिति को आधार बनाकर की गई थी. जांच के दौरान नियमों के पालन में कमियां सामने आईं. इसके बाद संबंधित कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और पूछा गया कि उनके खिलाफ जुर्माना क्यों न लगाया जाए.
कंपनियों के जवाब, अतिरिक्त प्रस्तुतियों और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद RBI ने पाया कि आरोप टिकते हैं और मौद्रिक दंड लगाया जाना उचित है.
ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब?
क्रेडिट रिपोर्ट किसी व्यक्ति की बैंकिंग और कर्ज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी होती है. इसमें गलत जानकारी या उसके सुधार में देरी होने पर ग्राहक को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. RBI की यह कार्रवाई इस बात पर जोर देती है कि क्रेडिट सूचना कंपनियों को शिकायतों और उनसे जुड़े मुआवजे के नियमों का समय पर पालन करना होगा.
हालांकि, RBI ने स्पष्ट किया है कि यह जुर्माना कंपनियों और उनके ग्राहकों के बीच किसी लेन-देन या समझौते की वैधता पर कोई फैसला नहीं है. यह कार्रवाई मुख्य रूप से नियामकीय नियमों के पालन में कमी को लेकर है.
कुल मिलाकर, RBI का यह कदम क्रेडिट रिपोर्ट से जुड़ी शिकायतों में ग्राहकों के अधिकार और समय पर मुआवजे के महत्व को रेखांकित करता है. तीन बड़ी क्रेडिट सूचना कंपनियों पर एक साथ हुई यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि ग्राहकों से जुड़ी नियामकीय जिम्मेदारियों में देरी को RBI हल्के में नहीं लेगा.
"भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की तीन प्रमुख क्रेडिट सूचना कंपनियों- TransUnion CIBIL, CRIF High Mark और Equifax पर नियामकीय नियमों का पालन…"













