कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 24वें मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की तैयारी जोरों-शोरों से जारी है. इसी बीच सूत्रों के हवाले से खबर भी आने लगी है कि डीके शिवकुमार की सरकार में दलित नेता जी. परमेश्वर उपमुख्यमंत्री का पद संभालेंगे. साथ ही 13 से 15 मंत्रियों के शपथ ग्रहण की भी चर्चाएं तेज हैं. साथ ही बी. के. हरिप्रसाद के कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलें राज्य में चलने लगी हैं. इस ताजपोशी के साथ शिवकुमार के ज्योतिषी द्वारकानाथ गुरुजी और उनकी भविष्यवाणियां भी सुर्खियों में आ गई हैं.
कब होगा शपथ
कांग्रेस के संकटमोचन डीके शिवकुमार आज बेंगलुरु के लोक भवन में शाम करीब 4 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं. उनके साथ 13 मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना भी है. हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व द्वारा मंत्रिमंडल की अंतिम सूची जारी किए जाने का इंतजार किया जा रहा है.
कौन होंगे उपमुख्यमंत्री
राज्य के समीकरणों को साधने के लिए एक से ज्यादा उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की चर्चाएं हैं. हालांकि, गृह मंत्री जी. परमेश्वर का नाम उस समय लगभग तय हो गया, जब वह दोपहर को शिवकुमार के साथ सिद्धारमैया से मिलने पहुंच गए.
दरअसल, सिद्धारमैया AHINDA समीकरणों के तहत दलितों और पिछड़ों की राजनीति करते आए हैं. राज्य में अनुसूचित जाति की आबादी 17.15% है. ऐसे में अगर सिद्धारमैया को हटाया जाता है तो गलत संदेश जा सकता है. इस समीकरण को पाले में रखने के लिए पार्टी ने कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में गिने जाने वाले जी. परमेश्वर के हाथ उपमुख्यमंत्री पद की कमान सौंपने का फैसला लिया है. राज्य के दलित वोट बैंक पर मजबूत पकड़ रखने वाले जी. परमेश्वर राज्य में गृह मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी रह चुके हैं.
पार्टी में बदलाव
सत्ता हस्तांतरण को सुचारु रखने के लिए शपथ ग्रहण से पहले सिद्धारमैया को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) का सदस्य नियुक्त कर दिया गया है. वहीं राज्य स्तर पर भी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी खाली होगी, इसे भरने के लिए बी. के. हरिप्रसाद का नाम तय माना जा रहा है.
कर्नाटक के तटीय क्षेत्र से आने वाले बिल्लवा (OBC) समुदाय के नेता हरिप्रसाद, डी. के. शिवकुमार की जगह कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं. हरिप्रसाद का राजनीतिक सफर राज्यसभा से चार बार गुजरता है. साथ ही संयुक्त विपक्ष की ओर से राज्यसभा के उपसभापति पद के उम्मीदवार भी रह चुके हैं, यानी आलाकमान की मोहर भी उनके साथ है. वे वर्तमान में कर्नाटक विधान परिषद के सदस्य (MLC) हैं और सदन में विपक्ष के नेता (2022-23) की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं.
कौन हैं ज्योतिषी
शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने की चर्चाएं सत्ता के गलियारे में आते ही ज्योतिषी द्वारकानाथ गुरुजी के नाम के साथ जुड़ गईं. राजगुरु द्वारकानाथ गुरुजी, जिन्हें बेलूर शंकरनारायणन द्वारकानाथ के नाम से भी जाना जाता है, कर्नाटक के आध्यात्मिक और ज्योतिष जगत की एक अत्यंत विख्यात हस्ती हैं. वह लंबे समय से मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के निजी ज्योतिषी, मेंटर और मार्गदर्शक के रूप में जाने जाते रहे हैं.
क्या थी भविष्यवाणी
गुरुजी के मुताबिक, शिवकुमार की कुंडली में बेहद शक्तिशाली राजयोग है और वे राज्य में 'लंबी पारी' खेलने वाले मुख्यमंत्री साबित होंगे. दिलचस्प बात यह है कि यह भविष्यवाणी उन्होंने चार दशक पहले, शिवकुमार के राजनीतिक सफर की शुरुआत में ही कर दी थी.
हाल ही के साक्षात्कारों में गुरुजी ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिवकुमार कोई 'वन-टाइम सीएम' नहीं हैं, बल्कि वे आलाकमान के पूर्ण समर्थन से एक लंबा और सफल कार्यकाल पूरा करेंगे. गुरुजी ने तो आगामी चुनावों को लेकर भी कह दिया है कि 2028 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी शिवकुमार भारी जीत दर्ज कर, दोबारा सत्ता में लौटेंगे, जिसके बाद उनका कद और अधिक मजबूत होगा. खबरों के मुताबिक गुरुजी से परामर्श के बाद ही शिवकुमार ने शपथ लेने की तारीख, जगह और समय तय किया है.
हालांकि, टीवी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में गुरुजी ने स्वयं खुलासा किया कि, उन्होंने शिवकुमार को शपथ ग्रहण के लिए तीन शुभ तारीखें—31 मई, 5 जून और 6 जून दी हैं, जिनमें से 5 जून 2026 का दिन ग्रहों के विशेष संयोग के कारण ज्योतिषीय दृष्टि से सबसे उत्तम और फलदायी है. राजनीतिक गलियारे जिस रूपरेखा की मुनादी 2023 के कर्नाटक चुनावों से पीट रहे थे, उसकी गूंज तीन साल बाद अब जाकर राजभवन से लौटी है. कांग्रेस तैयार है डीके शिवकुमार के रूप में राज्य को 24वां मुख्यमंत्री देने के लिए.
शिवकुमार का राजनीतिक सफर
डोड्डालाहल्ली केम्पेगौड़ा शिवकुमार यानी डी. के. शिवकुमार का जन्म 15 मई 1962 को बेंगलुरु के पास कनकपुरा में हुआ था. वोक्कालिगा जाति से आने वाले शिवकुमार की राजनीतिक पारी RSS की शाखाओं से आरंभ हुई.
इस राजनीतिक कहानी में पहला ठहराव 1985 में आया, जब वह पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़े और हार गए. लेकिन इस राजनीतिक कहानी में मुख्यमंत्री का सुख लिखा था, कहानी ऐसे कैसे खत्म हो जाती. सफर फिर चला और 1989 में वह पल आया, जिसने उन्हें कर्नाटक की राजनीति का एक बड़ा चेहरा बना दिया. जायंटकिलर शिवकुमार ने पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा को उनकी सतानूर सीट से ही हरा दिया था. ध्यान देने वाली बात यह है कि एच. डी. देवेगौड़ा भी वोक्कालिगा थे और अन्य मंडल नेताओं की तरह जाति की राजनीति किया करते थे.
जायंटकिलर ने 1999 में पिता के बाद बेटे एच. डी. कुमारस्वामी को भी उसी सतानूर सीट से हार का स्वाद चखाया. कुल मिलाकर शिवकुमार देवेगौड़ा परिवार और अपनी जाति के दो बड़े नेताओं को हरा चुके हैं. यानी राज्य की अहम ओबीसी जाति वोक्कालिगा, जो जनता दल सेक्युलर के पीछे लामबंद थी, उसमें शिवकुमार ने गहरी सेंधमारी की है.
शिवकुमार की राजनीति समझने के लिए इस जाति के समीकरण समझ लीजिए. वोक्कालिगा कर्नाटक की एक प्रमुख जाति है, पारंपरिक रूप में इसे कृषि से जोड़कर देखा जाता है. समुदाय की मुख्य आबादी दक्षिण कर्नाटक और पुराने मैसूर क्षेत्र में बसती है. कर्नाटक की राजनीति में मुख्यतः दो बड़े समुदाय हैं, लिंगायत और वोक्कालिगा. राज्य की राजनीति इन दो ओबीसी जातियों के इर्द-गिर्द ही घूमती है. बी. एस. येदियुरप्पा के कारण लिंगायत भाजपा के नाम पर मुहर लगाते हैं, वहीं वोक्कालिगा वोटरों की कचौरी शिवकुमार और देवेगौड़ा परिवार के बीच बंटती है. लेकिन शिवकुमार की पकड़ वोक्कालिगा समुदाय पर मजबूत मानी जाती है.
मंत्री से मास्टर रणनीतिकार तक
मुख्यमंत्री बनने से पहले शिवकुमार ने मंत्रिमंडलों की एक लंबी डगर तय की है. एस. बंगारप्पा सरकार में जेल और होमगार्ड मंत्री से शुरू हुआ सफर सिंचाई और ऊर्जा विभागों से गुजरते हुए जल संसाधन मंत्रालय तक पहुंचा.
लेकिन पार्टी के अंदर शिवकुमार के नाम की धाक 2017 के गुजरात राज्यसभा चुनावों में स्थापित हो गई. जब कांग्रेस के विधायक टूटने की कगार पर आ गए, तब शिवकुमार ने 42 कांग्रेसी विधायकों को साध लिया और अहमद पटेल की जीत सुनिश्चित कर दी. संकटमोचक ने 2018 में अपना हुनर फिर दिखाया, कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को एक पाले में रखा और सरकार बनवाई. अब तक वे राहुल गांधी और सोनिया गांधी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने लगे थे. कांग्रेस कवर करने वाले पत्रकार बताते हैं कि शिवकुमार गांधी परिवार के अंदर प्रियंका गांधी के विश्वसनीय माने जाते हैं.
कितनी दौलत, कितने मामले
ADR और नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्टें शिवकुमार को पहले ही देश का सबसे अमीर विधायक घोषित कर चुकी हैं. 2023 के चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपनी संपत्ति ₹1,413 करोड़ बताई थी. 2018 में यही आंकड़ा ₹840 करोड़ था और 2013 में ₹251 करोड़. यानी एक दशक में संपत्ति पांच गुना से ज्यादा तेजी से बढ़ी है. इस दौलत में रियल एस्टेट, निवेश और कारोबार सभी की हिस्सेदारी शामिल है.
हालांकि, इस दौलत के दामन पर कुछ दाग भी हैं. विवाद 2017 का है, जब आयकर विभाग ने दिल्ली, बेंगलुरु, मैसूरु, चेन्नई और कनकपुरा में 67 ठिकानों पर 300 अधिकारियों की फौज के साथ 80 घंटे की छापेमारी की थी. इस छापेमारी में ₹10 करोड़ से ज्यादा नकद जब्त हुआ था. साथ ही ₹300 करोड़ की अघोषित आय का दावा भी सामने आया था.
2019 में एक ऐसा मंजर फिर बना था, जब प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में शिवकुमार को गिरफ्तार करके तिहाड़ जेल भेज दिया था. जमानत के दो आवेदन खारिज होने के बाद अक्टूबर 2019 में रिहाई मिली थी. इस दौरान सोनिया गांधी जेल पहुंची थीं, जिसका जिक्र शिवकुमार बार-बार करते हैं. इसके अलावा अवैध खनन और जमीन हड़पने के आरोप भी उपमुख्यमंत्री के नाम पर लगे हैं. कुल मिलाकर उनके खिलाफ 19 मामले दर्ज हैं. शिवकुमार ने हमेशा इन्हें भाजपा की साजिश बताया है.
CM की कुर्सी
सिद्धारमैया ने इस्तीफा देते हुए कहा, "हाईकमान ने कहा, इसलिए इस्तीफा दे दिया." कर्नाटक के कानून मंत्री एच. के. पाटिल ने पुष्टि की कि डीके शिवकुमार नए मुख्यमंत्री होंगे. 1993 में पत्नी उषा से विवाह, दो बेटियां और एक बेटा, एक सामान्य पारिवारिक जीवन जीने वाले शिवकुमार का असामान्य राजनीतिक सफर अब अपने सबसे बड़े पड़ाव पर है.
RSS की शाखा से निकलकर, NSUI की ठोकर खाकर, जेल की सलाखें गिनकर और कांग्रेस के हर बड़े संकट में दीवार बनकर खड़े रहने वाले शिवकुमार का कर्नाटक की गद्दी तक पहुंचना महज एक नियुक्ति नहीं, यह चार दशकों की राजनीतिक तपस्या का फल है.
"कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 24वें मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की तैयारी जोरों-शोरों से जारी है. इसी बीच सूत्रों के हवाले से खबर भी आने लगी …"
