भारत भर में विपक्ष की एकता स्थापित करने जहां कांग्रेस दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक कर रही है, तो वहीं भारत के दिल मध्य प्रदेश में कांग्रेस के ही विधायक दल में फूट पड़ने के आसार प्रबल हो चुके हैं. फूट से बचने कांग्रेस राज्यसभा चुनावों से पहले अपने विधायकों को कर्नाटक के रिजॉर्ट में पैक करने पर भी विचार कर रही है.
दरअसल, मध्य प्रदेश में 18 जून को 3 सीटों पर राज्यसभा चुनाव होने हैं. शुरुआत में भाजपा ने 2 और कांग्रेस ने एक उम्मीदवार मैदान में उतारा था, पर जैसे ही कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की घोषणा की, उसके चंद दिन बाद भाजपा ने अपना तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतार दिया. इस तीसरे नामांकन ने प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं तेज कर दी हैं.
प्रदेश का गणित
मध्य प्रदेश में कांग्रेस के पास 61 सीटें हैं. एक राज्यसभा सीट के लिए 58 वोटों की दरकार है. इन समीकरणों के आधार पर सारा मामला मीनाक्षी नटराजन के पक्ष में दिखाई देता है. लेकिन, मध्य प्रदेश कांग्रेस की बगावत को देखते हुए मामला फंस सकता है.
क्योंकि राहुल खेमे की मानी जाने वाली मीनाक्षी को दिग्विजय सिंह के स्थान पर और कमलनाथ को दरकिनार कर राज्यसभा भेजा जा रहा है. हालांकि, दिग्विजय सिंह कह चुके हैं कि वे नहीं जाएंगे, लेकिन दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के समर्थक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी इस बगावत को काबू नहीं कर पाएंगे.
भाजपा का तीसरा उम्मीदवार
भाजपा ने महेश केवट को प्रत्याशी बनाकर पूरे देश और खासकर यूपी में सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने इस फैसले से प्रदेश के अति पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए वहां के प्रभावशाली निषाद-केवट समाज को भी साधने का प्रयास किया है. महेश केवट लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं. वे बुंदेलखंड क्षेत्र के निवाड़ी जिले के ओरछा से आते हैं.
कौन हैं मीनाक्षी
राहुल गांधी खेमे से आने वाली मीनाक्षी 2009 से 2014 के बीच मंदसौर से सांसद रहीं. छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाली मीनाक्षी, NSUI में सक्रिय रहीं और बाद में इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनीं. तेलंगाना की प्रभारी रहीं मीनाक्षी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) में महत्वपूर्ण पदों पर भी रहीं. राहुल गांधी की शुरुआती टीम में भी मीनाक्षी की मौजूदगी थी. इसी लिए प्रदेश कांग्रेस के विरोध के बावजूद मीनाक्षी का टिकट नहीं कटा क्योंकि उनका नाम राहुल ने तय किया था.
अति पिछड़ा वर्ग को क्या संदेश?
मध्य प्रदेश में केवट, निषाद, धीवर, मांझी और मछुआरा समाज की अच्छी उपस्थिति मानी जाती है. नर्मदा, बेतवा, तवा, चंबल, बुंदेलखंड और अन्य नदी क्षेत्रों से जुड़े जिलों में इन समुदायों का प्रभाव है. भाजपा ने इस वर्ग को यह संदेश देने की कोशिश की है कि संगठन और सरकार में उन्हें भी सम्मानजनक भागीदारी दी जा रही है.
अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करें कांग्रेस विधायक
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार जीत के लिए उतारा है और पार्टी पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ रही है. उन्होंने कहा कि भाजपा का कोई विधायक या नेता किसी के संपर्क में नहीं है. यदि कोई विधायक अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान करता है तो भाजपा उसका स्वागत करेगी. कांग्रेस को भाजपा की चिंता छोड़कर अपनी पार्टी पर ध्यान देना चाहिए.
हमारा कोई विधायक बिकने वाला नहीं
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट है और पार्टी के सभी 62 विधायक एकजुट होकर कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे. भाजपा पर निशाना साधते हुए सिंघार ने कहा कि भाजपा इसलिए आत्मविश्वास दिखा रही है, क्योंकि उसके पास पैसा और संसाधन हैं, लेकिन कांग्रेस का कोई भी विधायक बिकने वाला नहीं है. विधायकों को दूसरे राज्य भेजे जाने की संभावना पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में पार्टी की बैठक में चर्चा होगी और सामूहिक निर्णय लिया जाएगा कि विधायकों को बाहर भेजना है या प्रदेश में ही रखना है.
"भारत भर में विपक्ष की एकता स्थापित करने जहां कांग्रेस दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक कर रही है, तो वहीं भारत के दिल मध्य प्रदेश में कांग्र…"
