देश का सुप्रीम कोर्ट, जिसे न्याय का सबसे बड़ा मंदिर माना जाता है. वहां, शुक्रवार को अचानक एक शख्स जजों को आदेश देने लगता है, CGI को गाली देता है. इसके बाद जैसे-तैसे लोग उसे पकड़कर बाहर ले जाते हैं. इस घटना से पूरे कोर्ट का माहौल बदल जाता है. ये सारी गतिविधि वीडियो में रिकॉर्ड होती है और फिर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगती है. वायरल वीडियो के पीछे का सच क्या है? मर्यादा लांघने वाला शख्स प्रबल प्रताप कौन है? आखिर उसने ऐसा क्यों किया? फिर उसके साथ क्या कुछ हुआ? आइए जानते हैं पूरा मामला.

क्या है मामला?

पुलिस और सूत्रों के मुताबिक, इटावा का रहने वाला प्रबल प्रताप पहले लखनऊ के जानकीपुरम इलाके में किराए के घर में रहता था. वह, विकासनगर की निजी कंपनी डुप्लेक्स टेक्नोलॉजी में नौकरी करता था. इसी बीच कंपनी में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने उसके खिलाफ शिकायत की. शिकायत के बाद कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया. इसके बाद प्रबल प्रताप ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश भी की.

एफआईआर दर्ज न होने पर प्रबल ने कंपनी के खिलाफ कस्टम कोर्ट में याचिका दायर की. कोर्ट ने उसकी याचिका को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया, लेकिन प्रबल एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर अड़ा रहा. इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां भी उसकी याचिका खारिज कर दी गई. हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए प्रबल प्रताप सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. फिर जो हुआ पूरा मामला सोशल मीडिया पर छा गया.

कोर्ट का पूरा माजरा?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई तो जज ने याचिकाकर्ता से पूछा आप खुद ही पैरवी करेंगे. प्रबल बोला- न्यायिक अधिकारी महोदय, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के एसीपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दें. इस पर जस्टिस केवी विश्वनाथन ने हैरानी जताते हुए पूछा- आप हमें आदेश दे रहे हैं? जवाब में याचिकाकर्ता बोला- मेरी तरफ से बस इतना ही. सब कुछ रिकॉर्ड पर है. इसके बाद उसने केस की फाइल हवा में फेंक दी और सीजेआई को गाली देने लगा.

क्या होगी सजा?

हंगामे के बाद जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा- वह बहुत परेशान है, यह सब उसकी हताशा है. हमें उसके लिए केवल सहानुभूति है. हम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते. जहां तक मामले की बात है, हमें विवादित आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला.

 

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