ग्रामीण रोजगार गारंटी व्यवस्था में बड़े बदलाव के बाद जुलाई 2026 के आंकड़ों ने नई बहस छेड़ दी है. भारतीय रिजर्व बैंक की अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक,VB-G RAM G /MGNREGA के तहत काम की मांग में जुलाई में साल-दर-साल 39.2% की गिरावट दर्ज हुई. जून में यह गिरावट 18.5% थी.
हालांकि, इस आंकड़े को समझना जरूरी है। -39.2% का मतलब यह नहीं है कि गांवों में रोजगार 39.2% कम हो गया. यह आंकड़ा इस रोजगार कार्यक्रम के तहत काम की मांग में साल-दर-साल बदलाव को दर्शाता है.
1 जुलाई से बदली ग्रामीण रोजगार व्यवस्था
जुलाई के आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि VB-G RAM G अधिनियम, 2025, 1 जुलाई 2026 से लागू हुआ और इसने MGNREGA की जगह ली.
यानी जुलाई नई व्यवस्था का शुरुआती महीना था. ऐसे में योजना में बदलाव और उसके क्रियान्वयन के संक्रमण का असर काम की मांग के आंकड़ों पर पड़ सकता है. हालांकि, RBI की रिपोर्ट यह नहीं बताती कि 39.2% की गिरावट में संक्रमण का कितना योगदान रहा.
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125 दिन की रोजगार गारंटी कितनी बड़ी बात?
नई व्यवस्था का प्रमुख बदलाव रोजगार की कानूनी गारंटी से जुड़ा है. VB-G RAM G के तहत रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन की गई है. लेकिन कानून में 125 दिन की गारंटी होना और किसी परिवार को वास्तव में 125 दिन काम मिलना दो अलग बातें हैं.
इसलिए आने वाले महीनों में यह देखना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा कि कितने परिवार काम मांगते हैं, कितनों को काम मिलता है और औसतन कितने दिन रोजगार उपलब्ध कराया जाता है.
60 दिन का कृषि अवकाश क्यों महत्वपूर्ण है?
नई व्यवस्था में कृषि के व्यस्त मौसम के दौरान एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 60 दिनों तक योजना के काम को रोकने का प्रावधान है. इसका उद्देश्य बुआई और कटाई के दौरान किसानों को पर्याप्त श्रमिक उपलब्ध कराना है.
लेकिन मजदूरों के नज़रिए से एक अहम सवाल उठता है ,अगर इन 60 दिनों में योजना के तहत काम उपलब्ध नहीं होगा, तो उस अवधि में ग्रामीण श्रमिकों के लिए वैकल्पिक रोजगार कितना उपलब्ध होगा?
राज्यों की वित्तीय जिम्मेदारी भी बढ़ी
VB-G RAM G में फंडिंग व्यवस्था भी बदली है.पहले इस योजना में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 100 प्रतिशत होती थी लेकिन अब सामान्य राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में खर्च का बंटवारा किया गया है. इसका मतलब है कि राज्यों को योजना में अपनी हिस्सेदारी का पैसा उपलब्ध कराना होगा. ऐसे में राज्यों की वित्तीय स्थिति और समय पर धन जारी करना योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
क्या गांवों में रोजगार की स्थिति वास्तव में खराब हुई है?
जुलाई में ग्रामीण बेरोज़गारी दर 5.0% से घटकर 4.5% हुई. श्रम बल भागीदारी दर 54.4% से बढ़कर 55.4% और रोजगार-जनसंख्या अनुपात 51.4% से बढ़कर 52.5% हुआ.
ग्रामीण मांग के कुछ संकेत भी मजबूत रहे. जुलाई में खुदरा वाहन बिक्री 25.9%, ट्रैक्टर बिक्री 28.1% और दोपहिया वाहनों की बिक्री 28.3% बढ़ी.
अब अगले महीनों के आंकड़े बताएंगे असली कहानी
VB-G RAM G की असली परीक्षा इसके पहले साल के क्रियान्वयन में होगी. आने वाले महीनों में यह देखना जरूरी होगा कि:
- कितने लोग रोजगार की मांग करते हैं?
- कितने लोग को काम मिलता है?
- औसतन कितने दिन काम मिलता है?
- मज़दूरी का भुगतान कितनी तेज़ी से होता है?
- केंद्र और राज्य कितना पैसा खर्च करते हैं?
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