देश में महंगाई एक बार फिर ऊपर की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है. जुलाई 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.45 प्रतिशत पहुंच गई, जबकि जून में यह 4.38 प्रतिशत थी. इससे भी ज्यादा चिंता खाद्य महंगाई को लेकर है, जो जुलाई में बढ़कर 5.52 प्रतिशत हो गई. खास बात यह है कि महंगाई का दबाव शहरों की तुलना में गांवों में अधिक रहा है.
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर 4.45 प्रतिशत रही. ग्रामीण क्षेत्र में यह दर 4.84 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में 3.96 प्रतिशत रही. यानी ग्रामीण और शहरी महंगाई के बीच 0.88 प्रतिशत अंक का अंतर रहा.
चार महीने में करीब एक प्रतिशत अंक बढ़ी महंगाई
जुलाई की महंगाई को केवल एक महीने के आंकड़े के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं बताता. अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई 3.48 प्रतिशत थी. मई में यह बढ़कर 3.93 प्रतिशत, जून में 4.38 प्रतिशत और जुलाई में 4.45 प्रतिशत हो गई.
यानी केवल चार महीनों में खुदरा महंगाई 3.48 प्रतिशत से बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गई. यह करीब एक प्रतिशत अंक की वृद्धि है और महंगाई के लगातार ऊपर जाने वाले रुझान को दिखाती है. इस तरह जुलाई लगातार तीसरा महीना है जब खुदरा महंगाई बढ़ी है.
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खाने की थाली पर बढ़ता दबाव
आम परिवार के लिए सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा खाद्य महंगाई का है. जुलाई में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक आधारित खाद्य महंगाई 5.52 प्रतिशत रही. जून में यह 5.32 प्रतिशत थी. ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.79 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 5.05 प्रतिशत रही.
इसका सीधा अर्थ है कि रसोई का खर्च औसत खुदरा महंगाई की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ा है. हालांकि सभी खाद्य वस्तुओं की कीमतें नहीं बढ़ीं. कुछ वस्तुओं में कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई.
प्याज, लहसुन और अदरक ने बढ़ाई चिंता
जुलाई में कुछ प्रमुख खाद्य वस्तुओं में तेज महंगाई दर्ज की गई. अदरक की कीमतों में सालाना आधार पर 83.62 प्रतिशत, लहसुन में 35.36 प्रतिशत और प्याज में 22.54 प्रतिशत की महंगाई रही.
दूसरी तरफ आलू की कीमतों में 16.56 प्रतिशत की गिरावट, भिंडी में 5.52 प्रतिशत, मटर में 5.27 प्रतिशत और टमाटर में 4.59 प्रतिशत की गिरावट रही.
गांवों में शहरों से ज्यादा महंगाई
जुलाई में ग्रामीण भारत में खुदरा महंगाई 4.84 प्रतिशत रही. इसके मुकाबले शहरी महंगाई 3.96 प्रतिशत रही.
यह अंतर खास तौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रामीण परिवारों के घरेलू बजट में खाद्य वस्तुओं का महत्व अधिक होता है. जुलाई में ग्रामीण खाद्य महंगाई 5.79 प्रतिशत रही, जो शहरी खाद्य महंगाई 5.05 प्रतिशत से भी ज्यादा है.
इसका असर ग्रामीण उपभोक्ताओं की वास्तविक क्रय शक्ति पर पड़ सकता है, खासकर तब जब खाद्य वस्तुओं की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं.
कौन-सी चीजें सबसे ज्यादा महंगी हुईं?
जुलाई के आंकड़ों में कुछ गैर-खाद्य वस्तुओं और सेवाओं में भी तेज महंगाई देखने को मिली. व्यक्तिगत देखभाल, सामाजिक सुरक्षा और विविध वस्तुओं एवं सेवाओं की संयुक्त महंगाई 14.77 प्रतिशत रही. रेस्तरां और आवास सेवाओं की महंगाई 7.72 प्रतिशत और परिवहन की महंगाई 4.43 प्रतिशत रही.
व्यक्तिगत वस्तुओं की एक श्रेणी ‘अन्य व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुओं’ में महंगाई 43.54 प्रतिशत रही. वहीं भोजन परोसने वाली सेवाओं की महंगाई 7.75 प्रतिशत रही.
इससे संकेत मिलता है कि महंगाई का असर केवल सब्जियों और अनाज तक सीमित नहीं है. उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के कई दूसरे खर्च भी बढ़ रहे हैं.
किन चीजों से मिली राहत?
महंगाई की तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार आवास, पानी, बिजली, गैस और अन्य ईंधन समूह की महंगाई 2.16 प्रतिशत रही. स्वास्थ्य क्षेत्र में यह 1.34 प्रतिशत और सूचना एवं संचार क्षेत्र में केवल 0.63 प्रतिशत रही.
वाहनों की खरीद से जुड़ी महंगाई भी नकारात्मक रही. व्यक्तिगत वाहनों की खरीद की कीमतों में जुलाई में 4.37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसलिए जुलाई की महंगाई को समझते समय यह देखना जरूरी है कि कीमतों का दबाव हर क्षेत्र में समान नहीं है.
राज्यों में तेलंगाना सबसे ऊपर
राज्यवार आंकड़ों में भी काफी अंतर दिखाई देता है. जुलाई में तेलंगाना की संयुक्त खुदरा महंगाई 6.32 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत से काफी ज्यादा है. इसके बाद आंध्र प्रदेश 5.72 प्रतिशत, तमिलनाडु 5.44 प्रतिशत, मध्य प्रदेश 4.91 प्रतिशत और कर्नाटक 4.89 प्रतिशत पर रहे.
उत्तर प्रदेश में संयुक्त खुदरा महंगाई 4.74 प्रतिशत रही. राज्य के ग्रामीण क्षेत्र में यह 5.25 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में 3.62 प्रतिशत थी.
यानी उत्तर प्रदेश में भी ग्रामीण महंगाई शहरी महंगाई से काफी ज्यादा रही.
आरबीआई के लिए क्या संकेत?
जुलाई का आंकड़ा मौद्रिक नीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है. अप्रैल से जुलाई के बीच खुदरा महंगाई लगातार बढ़ी है और अब यह 4.45 प्रतिशत पर पहुंच चुकी है. खाद्य महंगाई भी 5.52 प्रतिशत है.
हालांकि केवल इन आंकड़ों के आधार पर मौद्रिक नीति के अगले फैसले का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा. लेकिन लगातार बढ़ती खुदरा और खाद्य महंगाई यह संकेत जरूर देती है कि कीमतों के मोर्चे पर सतर्कता बनाए रखना जरूरी है.
खास तौर पर यदि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आने वाले महीनों में भी जारी रहती है, तो महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है.
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