सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों को लेकर उज्जैन में सड़कों को चौड़ा करने और पुराने निर्माण हटाने का काम चल रहा है. इसी दौरान सती गेट के पास स्थित खड़े हनुमान जी का मंदिर भी प्रशासन के निशाने पर आया. मंदिर का ढांचा तो हटा दिया गया, लेकिन जब हनुमान जी की प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश हुई तो मामला वहीं अटक गया.

बताया जा रहा है कि नगर निगम की टीम ने कई बार प्रतिमा को शिफ्ट करने की कोशिश की, लेकिन हर बार प्रयास असफल रहा. करीब 8 फुट ऊंची प्रतिमा अपनी जगह से हिली तक नहीं. इसके बाद प्रशासन को भी अंदाजा हुआ कि प्रतिमा के नीचे की नींव बेहद मजबूत हो सकती है.

चार बार कोशिश, हर बार नाकाम

4 और 5 सितंबर को मंदिर का ढांचा हटाने की कार्रवाई की गई. इसके बाद प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाने की कोशिश शुरू हुई. हाइड्रोलिक मशीन से भी इसे हटाने का प्रयास किया गया, लेकिन सफलता नहीं मिली.

प्रतिमा के आसपास करीब डेढ़ फुट तक खुदाई करके उसकी नींव का पता लगाने की कोशिश भी की गई, लेकिन इससे भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी. अब प्रशासन और पुरातत्व विभाग ग्राउंड स्कैनिंग जैसी तकनीक से यह पता लगाने की तैयारी में हैं कि प्रतिमा जमीन के अंदर कितनी गहराई तक जुड़ी हुई है.

प्रतिमा कितनी पुरानी है, इसे लेकर भी सवाल

इस मामले में एक और दिलचस्प बात सामने आई है. स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर करीब 170 साल पुराना है, लेकिन पुरातत्व विशेषज्ञ प्रतिमा को इससे भी ज्यादा पुराना मानने की संभावना देख रहे हैं.

विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक, प्रतिमा मालवा क्षेत्र में मिलने वाले मजबूत बेसाल्ट पत्थर से बनी हो सकती है. उन्होंने यह भी संभावना जताई कि इसका संबंध परमार वंश और राजा भोज के समय की कला परंपरा से हो सकता है. हालांकि प्रतिमा की सही उम्र अभी आधिकारिक तौर पर तय नहीं हुई है.

मंदिर टूटा, प्रतिमा वहीं रही

फिलहाल खड़े हनुमान जी की प्रतिमा अपने पुराने स्थान पर ही सुरक्षित है. मंदिर का ढांचा हटाए जाने के बाद प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए उसके ऊपर कैनोपी लगाई गई है.

इस बीच सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा में है. भक्तों का कहना है कि मंदिर का ढांचा भले ही हटा दिया गया, लेकिन हनुमान जी का अपनी जगह से न हिलना उनके लिए किसी संकेत से कम नहीं है. कई लोग इसे भगवान का चमत्कार मान रहे हैं और कह रहे हैं कि उनकी इच्छा के बिना कुछ नहीं हो सकता.

हालांकि प्रशासन की ओर से इसे फिलहाल तकनीकी और पुरातात्विक नजरिए से देखा जा रहा है. प्रतिमा की नींव, उसकी बनावट और उम्र की जांच के बाद ही यह तय होगा कि उसे सुरक्षित तरीके से वहां से हटाया जा सकता है या नहीं.

यानी एक तरफ सड़क चौड़ीकरण का काम है और दूसरी तरफ सैकड़ों साल पुरानी आस्था. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि खड़े हनुमान जी की प्रतिमा आखिर जमीन में कितनी गहराई तक जुड़ी है और क्या इसे बिना नुकसान पहुंचाए दूसरी जगह ले जाया जा सकेगा?

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