अमेरिका में क्रिप्टो उद्योग के भविष्य को तय करने वाला CLARITY Act इस समय राजनीतिक विवादों के केंद्र में है. एक ओर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस कानून को जल्द से जल्द पारित कर अमेरिका को दुनिया की "क्रिप्टो राजधानी" बनाना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर उनकी अपनी अरबों डॉलर की क्रिप्टो कमाई इस विधेयक पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यही विवाद फिलहाल अमेरिकी सीनेट में इस कानून के पारित होने की राह में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक बन गया .
2025 में क्रिप्टो से 1.4 अरब डॉलर की कमाई
30 जून 2026 को जारी ट्रम्प के वित्तीय खुलासे के अनुसार, ट्रम्प और उनके परिवार ने वर्ष 2025 में विभिन्न क्रिप्टो परियोजनाओं से 1.4 अरब डॉलर (करीब 11,500 करोड़ रुपये) से अधिक की आय अर्जित की.
इसमें प्रमुख स्रोत शामिल हैं-
- World Liberty Financial (WLFI) से 50 करोड़ डॉलर से अधिक की आय.
- $TRUMP मेमकॉइन से लाइसेंसिंग समझौतों के जरिए लगभग 63.5 करोड़ डॉलर की कमाई.
इन्हीं आंकड़ों के सामने आने के बाद CLARITY Act को लेकर हितों के टकराव (Conflict of Interest) की बहस तेज हो गई है.
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डेमोक्रेट्स ने उठाए सवाल
डेमोक्रेटिक सांसदों का कहना है कि जब देश का राष्ट्रपति स्वयं क्रिप्टो कारोबार से भारी कमाई कर रहा हो, तो वह इस उद्योग के लिए पूरी तरह निष्पक्ष नियम कैसे बना सकता है?
इसी वजह से कई डेमोक्रेट सांसद चाहते हैं कि CLARITY Act में ऐसे नैतिकता (Ethics) प्रावधान जोड़े जाएं, जिनके तहत राष्ट्रपति, मंत्री और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के निजी क्रिप्टो निवेश और कारोबारी हितों पर कड़े नियम लागू हों.
वहीं रिपब्लिकन पार्टी और व्हाइट हाउस इन आरोपों को राजनीतिक हमला बताते हुए खारिज कर रहे हैं.
ट्रम्प क्यों चाहते हैं CLARITY Act?
राष्ट्रपति ट्रम्प कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वह अमेरिका को दुनिया की "क्रिप्टो राजधानी" बनाना चाहते हैं.
उनका कहना है कि CLARITY Act के जरिए ऐसे स्थायी नियम बनाए जाएंगे जिन्हें भविष्य में कोई भी सरकार या नियामक एजेंसी आसानी से बदल न सके. ट्रम्प इसे "फ्यूचर-प्रूफ रेगुलेशन" बताते हैं.
उनके अनुसार यदि अमेरिका ने जल्दी स्पष्ट नियम नहीं बनाए तो क्रिप्टो उद्योग का बड़ा हिस्सा यूरोप, सिंगापुर और अन्य देशों की ओर चला जाएगा.
दूसरे विधेयकों के कारण भी बढ़ा राजनीतिक दबाव
रिपोर्टों के अनुसार ट्रम्प ने हाल के दिनों में कुछ अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों पर हस्ताक्षर टाल दिए और संकेत दिया कि उनकी प्राथमिकता पहले रिपब्लिकन एजेंडा से जुड़े अन्य प्रमुख कानूनों को आगे बढ़ाने की है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी कारण कांग्रेस के विधायी कार्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है और CLARITY Act पर समय पर मतदान कराना और चुनौतीपूर्ण हो गया है.
सरकारी डिजिटल डॉलर के खिलाफ ट्रम्प
ट्रम्प लंबे समय से सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) का विरोध करते रहे हैं.
उनका कहना है कि सरकारी डिजिटल मुद्रा नागरिकों की वित्तीय गोपनीयता और स्वतंत्रता के लिए खतरा बन सकती है. इसके विपरीत वह निजी स्टेबल कॉइन, ब्लॉकचेन तकनीक और बिटकॉइन जैसे डिजिटल एसेट्स को बढ़ावा देने के पक्षधर हैं.
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टो उपयोगकर्ता देशों में गिना जाता है. ऐसे में यदि अमेरिका में CLARITY Act पारित होता है तो इसका असर वैश्विक निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे-
- बिटकॉइन और एथेरियम जैसे प्रमुख डिजिटल एसेट्स में संस्थागत निवेश बढ़ सकता है.
- वैश्विक क्रिप्टो कंपनियों को अधिक नियामकीय स्पष्टता मिल सकती है.
- भारतीय ब्लॉकचेन स्टार्टअप्स के लिए विदेशी निवेश के अवसर बढ़ सकते हैं.
- भारत में भी व्यापक क्रिप्टो नियमन पर चर्चा तेज हो सकती है.
हालांकि भारत में निवेशकों पर वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत सरकार भविष्य में क्रिप्टो को लेकर अपनी नीति और कर व्यवस्था में क्या बदलाव करती है.
क्या पास हो पाएगा CLARITY Act?
फिलहाल CLARITY Act के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजनीतिक सहमति है. रिपब्लिकन इसे अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी बता रहे हैं, जबकि डेमोक्रेट्स राष्ट्रपति ट्रम्प के निजी क्रिप्टो हितों को देखते हुए इसमें मजबूत नैतिकता प्रावधान जोड़ने की मांग कर रहे हैं.
यही कारण है कि दुनिया की नजर अब अमेरिकी सीनेट पर टिकी है. यदि यह कानून पारित होता है, तो यह केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि वैश्विक क्रिप्टो उद्योग के लिए भी एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है.
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