अयोध्या में स्थित राम मंदिर के चढ़ावा और दान में चल रही हेर फेर की जांच के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक दान के पैसों की गिनती करने वाली टीम को बदल दिया गया है. बैंक की ओर से पैसों की गिनती में शामिल कर्मचारियों की टीम भी नई कर दी गई है. इसके साथ ही प्रक्रिया में लगाए गए स्वयंसेवकों की ड्यूटी और निगरानी व्यवस्था में तैनात कर्मियों को भी बदल दिया गया है.   

सूत्रों के अनुसार अब सुरक्षा और निगरानी संबंधी नियमों में सख्ती कर दी गई है. साथ ही काउंटिंग रूम में ड्रेस कोड भी अनिवार्य कर दिया गया है, जिसके तहत कर्मचारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को केवल बिना जेब वाले कपड़े पहनकर ही प्रवेश करने की अनुमति दी जा रही है. साथ ही, काउंटिंग रूम से बाहर निकलने वाले कर्मचारियों की तलाशी भी की जा रही है. निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों पर नजर रखने हेतु अलग से कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जो काउंटिंग रूम की गतिविधियों की लगातार मॉनिटरिंग करेंगे.

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई अहम सुझाव

इस मामले की जांच कर रही SIT ने अपनी शुरूवाती रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया है. सूत्रों के अनुसार, जांच पूरी होने तक संबंधित व्यक्तियों के अयोध्या छोड़ने पर रोक लगाने की सिफारिश की गई है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनसे दोबारा पूछताछ की जा सके.

रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन का सुझाव भी दिया गया है. SIT का मानना है कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से तय की जानी चाहिए और उन्हें समान रूप से जवाबदेह बनाया जाना चाहिए. इसके अलावा, ट्रस्ट के संचालन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए किसी प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने की प्रस्तावना दी गई है.

रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन को अधिक पेशेवर, जवाबदेह और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है. इसके तहत दान राशि का साप्ताहिक या पाक्षिक ऑडिट कराने, प्रतिदिन प्राप्त होने वाली नकदी का नियमित रिकॉर्ड बनाए रखने तथा ट्रस्ट संचालन से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है.

इसके अलावा, मंदिर परिसर में स्थापित सीसीटीवी कैमरों की डेटा स्टोरेज क्षमता बढ़ाने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी जांच या सत्यापन की स्थिति में पर्याप्त रिकॉर्ड उपलब्ध हो सके. हालांकि, एसआईटी की यह रिपोर्ट अभी प्रारंभिक चरण की मानी जा रही है और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तथा निर्णय लिए जाएंगे.

 

 

 

 

 


 

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