भारतीय निजी कॉरपोरेट सेक्टर ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, सूचीबद्ध गैर-सरकारी गैर-वित्तीय कंपनियों की बिक्री वृद्धि Q1 में बढ़कर 19.4 फीसदी हो गई, जो पिछली तिमाही में 13.9 फीसदी थी. RBI का यह विश्लेषण 3,247 सूचीबद्ध कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजों पर आधारित है.

ऑटो, पेट्रोलियम और इलेक्ट्रिकल मशीनरी ने मैन्युफैक्चरिंग को दिया जोर

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने कॉरपोरेट प्रदर्शन में खास भूमिका निभाई. RBI के मुताबिक, 1,827 सूचीबद्ध निजी मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की बिक्री Q1:2026-27 में सालाना आधार पर 21.4 फीसदी बढ़ी. पिछली तिमाही में यह वृद्धि 14.5 फीसदी थी.

इस तेज़ी के पीछे मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल, पेट्रोलियम और इलेक्ट्रिकल मशीनरी उद्योगों का योगदान रहा. यानी औद्योगिक क्षेत्र में मांग और कारोबार की गतिविधियों में पिछली तिमाही की तुलना में स्पष्ट मज़बूती दिखाई दी.

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IT सेक्टर में भी लौटी दोहरे अंक की रफ्तार

आईटी कंपनियों के लिए भी पहली तिमाही के आंकड़े सकारात्मक रहे. RBI के अनुसार, IT कंपनियों की बिक्री वृद्धि 14.8 फीसदी रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 9.9 फीसदी थी.

दूसरी ओर, गैर-आईटी सेवा कंपनियों ने भी 19.7 फीसदी की मजबूत बिक्री वृद्धि दर्ज की. हालांकि यह पिछली तिमाही के 20.3 फीसदी से मामूली कम है. RBI के मुताबिक, गैर-आईटी सेवाओं की वृद्धि में थोक और खुदरा कारोबार की अहम भूमिका रही.

कच्चे माल की लागत में 27.5% की छलांग, लेकिन मार्जिन पर बड़ा दबाव नहीं

कॉरपोरेट सेक्टर के लिए सबसे बड़ी चुनौती लागत के मोर्चे पर रही. वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान के बीच मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का कच्चे माल पर खर्च 27.5 फीसदी बढ़ गया.

हालांकि बिक्री के मुकाबले कच्चे माल के खर्च का अनुपात 58.5 फीसदी से मामूली घटकर 58.1 फीसदी रहा. इसका मतलब है कि इनपुट कॉस्ट बढ़ने के बावजूद कंपनियां बिक्री में उससे भी बेहतर वृद्धि दर्ज करने में कामयाब रहीं.

कर्मचारियों पर खर्च भी बढ़ा

कंपनियों के स्टाफ कॉस्ट में भी वृद्धि हुई. मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का कर्मचारी खर्च 12.4 फीसदी, IT कंपनियों का 7.6 फीसदी और गैर-आईटी सेवा कंपनियों का 11.2 फीसदी बढ़ा.

मैन्युफैक्चरिंग और गैर-आईटी सेवा कंपनियों के लिए स्टाफ कॉस्ट-टू-सेल्स अनुपात क्रमशः 5.5 फीसदी और 10.1 फीसदी तक पहुंच गया. वहीं IT कंपनियों में यह अनुपात पिछली तिमाही की तुलना में घटा.

बिक्री के साथ मुनाफे की रफ्‍़तार भी तेज

RBI के आंकड़ों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिक्री बढ़ने के साथ ऑपरेटिंग प्रॉफिट में भी तेज सुधार हुआ है.

मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट Q1 में 21.3 फीसदी बढ़ा, जबकि पिछली तिमाही में इसकी वृद्धि केवल 9.4 फीसदी थी.

इसी तरह IT कंपनियों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 19.9 फीसदी और गैर-आईटी सेवा कंपनियों का 12.7 फीसदी बढ़ा. RBI ने यह भी बताया कि तिमाही-दर-तिमाही आधार पर सभी प्रमुख सेक्टरों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन में सुधार हुआ.

इसका मतलब क्या है?

यहां सबसे अहम संकेत pricing power का है. कच्चे माल की लागत में 27.5 फीसदी की वृद्धि के बावजूद कंपनियों के मुनाफे में तेज बढ़ोतरी बताती है कि कई कंपनियां लागत के बढ़े हुए बोझ को कीमतों, बेहतर बिक्री या ऑपरेशनल दक्षता के जरिए संभालने में सक्षम रहीं.

खासकर मैन्युफैक्चरिंग में बिक्री वृद्धि 21.4 फीसदी और ऑपरेटिंग प्रॉफिट वृद्धि 21.3 फीसदी रही. यह दिखाता है कि पहली तिमाही में सेक्टर की कमाई की क्षमता मजबूत बनी रही.

कंपनियों की कर्ज चुकाने की क्षमता भी सुधरी

RBI के आंकड़ों में कंपनियों की वित्तीय मजबूती का एक और संकेत Interest Coverage Ratio (ICR) है. यह बताता है कि कंपनी अपने ब्याज खर्च को ऑपरेटिंग कमाई से कितनी आसानी से पूरा कर सकती है.

मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों का ICR पहली तिमाही में बढ़कर 10.2 हो गया. गैर-आईटी सेवा कंपनियों का ICR भी बढ़कर 2.6 पहुंच गया, जबकि IT कंपनियों का ICR ऊंचे स्तर पर बना रहा.

RBI के अनुसार, ICR का न्यूनतम व्यवहार्य स्तर 1 माना जाता है. इसलिए 10.2 का ICR मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की ब्याज भुगतान क्षमता को काफी मजबूत दिखाता है.

 

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