भारत में रसोई गैस (LPG) को स्वच्छ ईंधन की सबसे बड़ी सफलता माना जाता है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के जरिए करोड़ों घरों तक LPG पहुंची और लकड़ी-कोयले पर निर्भरता कम हुई. लेकिन अब ताजा आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि भारतीय परिवारों की गैस खपत का पैटर्न बदल रहा है.

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की जून 2026 रिपोर्ट के मुताबिक, देश में जून 2026 के दौरान LPG की खपत 14.3% घटकर 2,188 हजार मीट्रिक टन (TMT) रह गई, जबकि जून 2025 में यह 2,554 TMT थी. अप्रैल-जून तिमाही में भी LPG की मांग 16.3% घटकर 6,509 TMT रही.

आखिर कितने सिलेंडर कम बिके?

  • जून 2025: लगभग 18 करोड़ सिलेंडर
  • जून 2026: लगभग 15.4 करोड़ सिलेंडर

यानी पिछले वर्ष की तुलना में इस महीने में करीब 2.6 करोड़ घरेलू सिलेंडरों के बराबर LPG की खपत कम हुई. इसी तरह अप्रैल-जून तिमाही में भी खपत करीब 54.8 करोड़ सिलेंडर से घटकर 45.8 करोड़ सिलेंडर रह गई यानी तीन महीनों में लगभग 9 करोड़ सिलेंडरों के बराबर गिरावट दर्ज की गई. यह गणना PPAC के खपत आंकड़ों (TMT) को 14.2 किलोग्राम प्रति घरेलू सिलेंडर के आधार पर की गई है.

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सरकार ने भी बदले नियम

LPG की मांग में आई गिरावट ऐसे समय आई है जब केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या घटा दी है. पहले पात्र लाभार्थियों को ₹300 की सब्सिडी के साथ साल में 9 रिफिल तक सहायता मिलती थी. अब इसे घटाकर 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर प्रति वर्ष कर दिया गया है, हालांकि सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम के 12 घरेलू सिलेंडर प्रति वर्ष की व्यवस्था पहले की तरह जारी है.

PNG भी बदल रहा है गैस बाजार

सरकार शहरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को तेजी से बढ़ावा दे रही है. जिन इलाकों में PNG उपलब्ध है, वहां नए घरेलू LPG कनेक्शन नहीं दिए जा रहे हैं. इसका असर धीरे-धीरे महानगरों और बड़े शहरों में LPG की मांग पर दिखना शुरू हो सकता है.

दिलचस्प बात: पेट्रोल-डीजल की मांग बढ़ी

जहां LPG की मांग घटी, वहीं परिवहन ईंधन की मांग बढ़ती रही.

जून 2026 में-

  • पेट्रोल (MS) की बिक्री 7.5% बढ़ी.
  • डीजल (HSD) की बिक्री 6.2% बढ़ी.
  • LPG की मांग 14.3% घट गई.

यानी आर्थिक गतिविधियां कमजोर नहीं हुई हैं, बल्कि घरेलू ऊर्जा खपत का पैटर्न बदल रहा है.

भारत अब भी आयात पर निर्भर

देश में जून 2026 के दौरान करीब 1.5 मिलियन टन LPG का उत्पादन हुआ, जबकि खपत लगभग 2.2 मिलियन टन रही. इसका मतलब है कि भारत अब भी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में LPG की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर घरेलू कीमतों और सरकारी सब्सिडी दोनों पर पड़ सकता है.

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