पहलगाम हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. इसी बीच तनाव को समाप्त करने की मांग करते हुए दोनों देशों की 117 हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नाम खुला पत्र लिखा है. पत्र में लगातार बढ़ती दुश्मनी के नुकसानों को रेखांकित किया गया है. इस रंजिश से आम नागरिकों, युवाओं और पूरे दक्षिण एशिया के विकास को हो रही दिक्कतों पर भी बात की गई है.

पत्र में क्या लिखा

दोनों मुल्कों के शीर्ष पदों को भेजे गए पत्रों में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले सात वर्षों से जारी तनाव ने दोनों देशों के लोगों को भारी नुकसान पहुंचाया है. साथ ही क्षेत्रीय शांति और आर्थिक विकास को भी गंभीर क्षति पहुंची है. पत्र में परमाणु हथियारों को लेकर कहा गया है कि दोनों देश परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी हैं, ऐसे में इनके बीच लगातार बढ़ता अविश्वास पूरे दक्षिण एशिया के लिए चिंता का विषय है. इसलिए अब टकराव के बजाय बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने का समय आ गया है.

पत्र में दोनों प्रधानमंत्रियों से आग्रह किया गया है कि नई दिल्ली और इस्लामाबाद में उच्चायुक्तों की नियुक्ति फिर से कर दी जाए. साथ ही दोनों देश नियमित कूटनीतिक संवाद शुरू करें, व्यापार और हवाई सेवाएं दोबारा चालू करें. वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने की भी बात कही गई है.

क्रिकेट सहित अन्य खेलों का जिक्र भी इस पत्र में मिलता है. रिश्तों का यह पत्र सांस्कृतिक कार्यक्रम, शैक्षणिक आदान-प्रदान और मीडिया संवाद फिर से शुरू करने की पैरवी भी करता है, ताकि दोनों देशों के नागरिकों के बीच विश्वास बहाल हो सके. जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पत्र में लिखा गया है कि कश्मीर सहित अन्य सभी लंबित और संवेदनशील मुद्दों का समाधान केवल शांतिपूर्ण बातचीत के माध्यम से ही संभव है. हस्ताक्षरकर्ताओं ने 2004–07 के दौरान बने वार्ता ढांचे को आधार बनाकर व्यापक संवाद शुरू करने का सुझाव दिया है. इसके अलावा करतारपुर साहिब कॉरिडोर को और सुगम बनाने, शारदा पीठ यात्रा की सुविधा देने और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की भी अपील की गई है.

पत्र में दोनों नेताओं से यह भी कहा गया है कि वे नफरत और अविश्वास की राजनीति से ऊपर उठकर आने वाली पीढ़ियों के हितों को प्राथमिकता दें.

पत्र किसने लिखा

पत्र पर भारत और पाकिस्तान की कुल 117 प्रमुख हस्तियों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें भारत के 61 और पाकिस्तान के 56 लोग शामिल हैं. इनमें पूर्व राजनेता, पूर्व राजनयिक, शिक्षाविद, लेखक, पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक समाज से आने वाली प्रमुख हस्तियां शामिल हैं.

भारत की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मीरवाइज उमर फारूक, राज्यसभा सांसद मनोज झा, पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर, पूर्व विदेश सचिव शिवशंकर मेनन और निरुपमा राव जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं.

वहीं पाकिस्तान की ओर से पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी, पूर्व विदेश सचिव रियाज मोहम्मद खान, पूर्व राजदूत अशरफ जहांगीर काजी, सांसद इस्फान्यार भंडारा, परमाणु वैज्ञानिक परवेज हुदभोय और मानवाधिकार कार्यकर्ता हिना जिलानी सहित कई प्रमुख हस्तियों ने इस अपील का समर्थन किया है. इन सभी का कहना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने और दक्षिण एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए संवाद ही सबसे प्रभावी रास्ता है.

भारत-पाक संबंध कब और क्यों बिगड़े?

भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापक द्विपक्षीय वार्ता 2016 में पठानकोट और उरी आतंकी हमलों के बाद लगभग ठप हो गई थी. इसके बाद 2019 में पुलवामा आतंकी हमले, बालाकोट एयर स्ट्राइक और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद दोनों देशों के रिश्ते और अधिक खराब हो गए.

भारत सरकार का रुख क्या है?

भारत सरकार लगातार यह कहती रही है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. सरकार का स्पष्ट रुख है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक सामान्य द्विपक्षीय संवाद संभव नहीं है. भाजपा नेताओं ने भी इस नई अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान को पहले आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय कदम उठाने होंगे, तभी किसी सकारात्मक वार्ता की जमीन तैयार हो सकती है.

"पहलगाम हमले के बाद से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. इसी बीच तनाव को समाप्त करने की मांग करते हुए दोनों देशों …"