कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले देशभर में पुलिस की कार्रवाई तेज़ हो गई है. पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने 9 अक्टूबर को दावा किया कि देशभर में कम से कम हज़ार लोगों को हिरासत में लिया गया है. इनमें छात्र संगठनों, किसान और दलित संगठनों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल हैं. रंका ने X पर लिखा, ‘यह आपातकाल है.’
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी हिरासत के एक वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा, ‘सीधे आपातकाल की घोषणा क्यों नहीं कर देते?’ पार्टी के मुताबिक़ राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपक बालियान को 8 अक्टूबर को पुलिस हिरासत में लिया गया. उन्हें उसी रात छोड़ दिया गया.
इटारसी में ट्रेन से उतारे गए छात्र
सबसे ज़्यादा चर्चा मध्य प्रदेश के इटारसी की घटना की है. आरोप है कि पुणे से दिल्ली आ रहे AISF के छात्रों को मध्य प्रदेश पुलिस ने ट्रेन से उतारकर हिरासत में ले लिया. सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में महिला पुलिसकर्मी ट्रेन के भीतर कार्यकर्ताओं के बीच दिखती हैं. AISF से जुड़े विराज देवांग ने लिखा कि छात्रों को कहाँ ले जाया जा रहा है और किस आधार पर हिरासत में लिया गया है, यह उन्हें नहीं बताया गया.
CJP का कहना है कि छात्रों को बस में किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया. हिरासत के आधार पर पुलिस की ओर से कोई बयान उपलब्ध सामग्री में नहीं है.
कई राज्यों से शिकायतें
छात्र नेता आइशी घोष ने बेंगलुरु से लौटने के बाद दावा किया कि हर राज्य में पुलिस कार्यकर्ताओं को परेशान कर रही है. उनके मुताबिक़ दिल्ली में पुलिस उनके राष्ट्रीय कार्यालय में डंडों के साथ घुसी और कार्यकर्ताओं की जानकारी माँगी और गुजरात में उनके राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सत्येशा को घर में नज़रबंद रखा गया. घोष ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा से भी ऐसी ही सूचनाएँ मिलने की बात कही.
CJP प्रवक्ता सौरव दास ने उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में ‘सामूहिक हिरासत’ का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘हममें से कोई गिरफ़्तारी या हिरासत से नहीं डरता. प्रदर्शन हमारे साथ या हमारे बिना होकर रहेगा.’
दिल्ली में सुरक्षा बंदोबस्त
रेपोर्ट्स के अनुसार छत्तीसगढ़ से 7,000 CRPF जवानों को बुलाकर बंगाल और दिल्ली में तैनात किया गया है. उन्हें नवीनतम दंगा-रोधी उपकरण और निर्धारित गोला-बारूद साथ रखने को कहा गया है. उनके मुताबिक़ गृह मंत्री अमित शाह ने CJP के 3 अक्टूबर को प्रदर्शन का आह्वान करने के बाद तेलंगाना, मेघालय, मिज़ोरम और मणिपुर के अपने दौरे रद्द कर दिए और दिल्ली में रहकर स्थिति पर नज़र रख रहे हैं.
मस्जिदों में पुलिस की ‘आउटरीच’
सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा हो रहा है, जिसमें दिल्ली पुलिस का एक कर्मचारी मस्जिद के भीतर लोगों को संबोधित करता दिखता है. दावा है कि उसमें लोगों से अफ़वाहों से सावधान रहने, भड़काऊ संदेशों से बचने, प्रदर्शन से दूर रहने और पुलिस का सहयोग करने की अपील की गई. पुलिस इसे सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम बता सकती है, जबकि आलोचक इसे प्रदर्शन से पहले दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं.
‘जंतर-मंतर किसी की जागीर नहीं’
8 अक्टूबर को प्रेस वार्ता में अभिजीत दिपके ने दिल्ली में सार्वजनिक जमावड़े पर लगी पाबंदियों पर सवाल उठाया. उन्होंने पूछा कि मुंबई और बेंगलुरु में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो सकते हैं तो दिल्ली में क्यों नहीं. उन्होंने कहा, ‘जंतर-मंतर देश के लोगों का है, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नहीं.’ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे देश के मालिक नहीं, ‘तय कार्यकाल वाले सेवक’ हैं. उन्होंने दिल्ली पुलिस को कर्नाटक पुलिस से सीखने की भी अपील की कि लोगों के अधिकारों की रक्षा कैसे की जाती है.
मुद्दा क्या है?
CJP का यह प्रदर्शन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने और कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर जवाबदेही की माँग को लेकर है. दिपके ने SIR को ‘लोकतंत्र को ख़त्म करने वाला सबसे बड़ा घोटाला’ बताया है. उन्होंने ऐसे लोगों की गवाहियों का हवाला दिया, जिन्हें आधार, पैन जैसे दस्तावेज़ दिखाने के बावजूद कथित तौर पर मृत घोषित कर दिया गया. उन्होंने ममता बनर्जी, एम.के. स्टालिन और अरविंद केजरीवाल से जुड़े निर्वाचन क्षेत्रों में कथित कटौती का ज़िक्र करते हुए पूछा कि क्या यह संयोग है या किसी पैटर्न का हिस्सा. उन्होंने भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत का आरोप भी लगाया. दिपके के मुताबिक़ 10 अक्टूबर का मार्च मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र को जवाबदेह ठहराने के लिए है. उन्होंने कहा कि पार्टी देश को अस्थिर करना नहीं चाहती.
बेंगलुरु में अभिनेता प्रकाश राज ने कहा कि कर्नाटक के नागरिक संगठन क़रीब एक साल से SIR में कथित अनियमितताओं का दस्तावेज़ीकरण कर रहे हैं. उनके अनुसार एक ट्रिब्यूनल में रखी गई गवाहियों से पता चलता है कि यह मुद्दा सिर्फ़ कर्नाटक तक सीमित नहीं है. उन्होंने दिल्ली जा रहे युवाओं के प्रति एकजुटता जताई और मीडिया से SIR के मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की.
अब देखना यह होगा कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर क्या होता है और क्या पुलिस और प्रशासन इस प्रदर्शन को होने देते हैं.
-ममता सिंह
"कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले देशभर में पुलिस की कार्रवाई तेज़ हो गई है. पार्…"













