उत्तर प्रदेश और राजस्थान से बुधवार सुबह दो बड़े दर्दनाक हादसे सामने आए हैं. इन दोनों हादसों में अभी तक कुल 13 लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 44 लोग बुरी तरह से घायल हुए हैं. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर दिन सड़क हादसे में जान गवाने वाले लोगों की संख्या करीब 485 है और हर घंटे कम से कम 20 लोग इन हादसों के शिकार होते हैं.

एक्सप्रेसवे-हाईवे ट्रेवलिंग के समय को कम करने के लिए बनाये जाते हैं, लेकिन सवाल ये पैदा हो जाता है अगर जान ही नहीं बचेगी तो समय बचा कर क्या होगा? दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे हाईवे पर हुआ यह हादसा भी इसी प्रश्न पर प्रकाश डालता है. 

6 लोगों की जिंदा जलने से मौत 

हरिद्वार से इंदौर जा रही एक निजी बस बुधवार यानी की 1 जुलाई को सुबह 2-3 बजे एक ट्रेलर से टकराई और फिर अनियंत्रित होकर खाई में जा गिरी, जहां कुछ समय बाद बस के पीछे के हिस्से में भीषण आग लग गई. 

मौजूदा लोगों के अनुसार, अधिकांश यात्री इस हादसे के समय गहरी नींद में थे. जब बस की टक्कर ट्रेलर से हुई तब ऊपरी बर्थ पर सो रहे यात्री नीचे गिर पड़े और  करीब 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और 8 लोगों ने इस हादसे में अपनी जान गवा दी. 

यह हादसा राजस्थान के दौसा के पास दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस हाईवे पर कोलवा थाना क्षेत्र स्थित रेस्ट एरिया के पास हुआ था. अधिकारियों के अनुसार, हादसे में 6 लोगों की मौत बस में ज़िंदा जल जाने से हुई और शव इतनी बुरी तरह से झुलसे थे कि पुलिस के लिए उनकी पहचान और आयु पता लगाना एक चुनौती बन चुका है. जिन 2 लोगों की मौत सिर पर गंभीर चोट लगने से हुई थी, उनमे से एक की पहचान धर्मेंद्र के रूप में हुई है. बाक़ी मृतकों की पहचान की कोशिश अभी भी जारी है. कोलवा थाना पुलिस हादसे के कारणों की जाँच में जुटी है.

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे सड़क हादसा 

उत्तर प्रदेश से भी कुछ ऐसे ही दर्दनाक दृश्य सामने आए हैं. उन्नाव जिले में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर सुबह करीब 5 बजे एक तेज रफ्तार बस अनियंत्रित होकर कार से टकरा गई. टक्कर इतनी तेज थी कि कार में सवार 8 लोगों में 5 की मौत हो गई. मृतकों में दिव्या (13), अमृता (5), अंजू (40), धुनमुन (60) और कार चालक विनोद (45) शामिल हैं. 

तेज रफ्तार स्लीपर बस ने पहले कार को टक्कर मारी. इसके बाद बस अनियंत्रित होकर डिवाइडर की ग्रिल तोड़ते हुए खंती में जा गिरी. बस खंती में पलटने से 17 से ज़्यादा लोगों को गंभीर चोट आई है. 

5 वर्षों का आकंडा 

पिछले 5 सालों में उत्तर प्रदेश और राजस्थान के हाईवे और एक्सप्रेसवे पर हुए सड़क हादसों में करीब 1.6 लाख से अधिक लोग अपनी जान गवा चुके हैं. उत्तर प्रदेश में यह संख्या 1,08,882 से अधिक है, वहीं, राजस्थान में यह संख्या 54,815 से भी ज़्यादा है. 

MoRTH के अनुसार, यह हादसे मुख्यतः ओवरस्पीडिंग यानी कि तेज रफ़्तार और ग़लत दिशा में वाहन चलाने और यातायात नियमों का उल्लंघन करने से होते हैं. 

सड़क हादसे: गलती किसकी?

सवाल अब ये है कि इतनी मौतों के बाद भी सरकार और विभाग इंजीनियरिंग की खामियों, जैसे अचनाक आने वाले खतरनाक मोड़ या गलत तरीके से बनाए गए कट, जिन्हें 'ब्लैक स्पॉट' कहा जाता है, उनमे सुधार क्यों नहीं करती? 

दिल्ली-मुंबई या यमुना एक्सप्रेसवे जैसे बड़े रूटों पर सीसीटीवी और स्पीड रडार होने के बावजूद, ओवरस्पीडिंग (तेज रफ्तार) और गलत दिशा में वाहन चलाने वाले मामलो पर सख्त कारवाही क्यों नहीं की जाती? 

कई हाईवे पर रात के समय या कोहरे के दौरान जरूरी साइन बोर्ड, लाइटें या रिफ्लेक्टर नहीं होते, जिससे चालकों को रास्ता समझने में दिक्कत होती है. जिन पर विभाग का ध्यान बेहद ज़रूरी है. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिटनेस फेल गाड़ियां या बिना परमिट और ओवरलोडेड ट्रक हाईवे पर चलते रहते हैं, जिन्हें रोकने में परिवहन विभाग (RTO) का चेकिंग सिस्टम पूरी तरह कामयाब नहीं रहा है.

हालांकि सभी हादसे केवल इन कारणों से नही बल्कि चालकों या यात्रियों की गलती की वजह से भी होते है, जैसे नींद की झपकी लग जाना, ओवरस्पीडिंग या यातायात नियमों की अनदेखी. 

वजह कुछ भी हो लेकिन आगे एसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार और चालकों दोनों को सख्ती और सेफ्टी बरतनी होगी ताकि ये हर दिन मौत का सिलसिला कम हो सके. 

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